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स्कूल बसों पर RTO की कार्रवाई:क्षमता से ज्यादा स्टूडेंट मिलने और फिटनेस में कमी पर भरे चालान, कई बसों के परमिट भी नहीं मिले

दौसा3 महीने पहले
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स्कूल बस की जांच करता आरटीओ। - Dainik Bhaskar
स्कूल बस की जांच करता आरटीओ।

जिला मुख्यालय पर परिवहन विभाग ने ओवरलोड व नियम विरूद्ध संचालित हो रही स्कूल बसों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। बुधवार सुबह कलेक्ट्रेट बाइपास पर आरटीओ द्वारा स्कूल की बसों की जांच की गई। इसमें कई स्कूल बसों में क्षमता से अधिक स्टूडेंट मिले तो कई बसों में परमिट संबंधित खामियां मिली। जांच में पाया गया कि कई स्कूल वाहनों के परमिट और फिटनेस भी नहीं था। आरटीओ ने बाइपास पर कार्रवाई करते हुए बस ड्राइवरों को हिदायत भी दी। नियम विरूद्ध संचालित स्कूल बसों के खिलाफ आरटीओ द्वारा की गई कार्रवाई से निजी स्कूल संचालकों में खलबली मच गई।

सड़कों पर दौड़ रही अनफिट स्कूल बसें
यूं तो परिवहन विभाग ने दर्जनों स्कूल बसों को फिटनेस प्रमाण पत्र जारी कर रखे हैं। लेकिन सड़कों पर अनफिट होने के कारण हादसों की आशंका बनी रहती है। सबसे ज्यादा घालमेल ग्रामीण अंचल के स्कूलों में देखा जा रहा है। जहां आरटीओ की सीधी पहुंच नहीं होने से गाइडलाइन की अनदेखी कर निजी स्कूलों में धड़ल्ले से प्राइवेट वाहनों से छोटे बच्चों को बेखौफ परिवहन किया जा रहा है। यदि जांच की जाए तो फिटनेस टेस्ट में बड़े पैमाने पर खामियां सामने आने की संभावना है।

इन नियमों की नहीं हो रही पालना
सरकार द्वारा स्कूल बसों के लिए कई नियम बनाए हुए हैं। इनमें वाहन स्कूल के नाम पर रजिस्टर होना चाहिए। यदि किसी एजेंसी से अनुबंध पर वाहन लिया गया हो तो उस पर ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा होना चाहिए। बस पीले रंग की होनी चाहिए, जिस पर ब्राउन या नीले रंग की पट्टी होनी चाहिए। बस की खिड़कियों पर बाहर की ओर से रॉड लगा होना चाहिए। बस 15 साल से अधिक पुरानी नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही वाहनों का हर साल फिजिकल टेस्ट कराना जरूरी है।

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