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  • Changed 2 Hospitals In Jaipur For 20 Days, To Tell You The Truth ... Strong Self confidence, Family Support And Positive Thinking Brought Me Out Of Death.

जन संकल्प से हारेगा कोरोना:20 दिन तक जयपुर में 2 अस्पताल बदले, सच कहूं...मजबूत आत्मबल, परिवार के संबल व सकारात्मक सोच ने मुझे मौत के मुंह से निकाला

दौसा6 महीने पहले
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  • गंभीर कोरोना संक्रमण होने के बावजूद अपनी इच्छाशक्ति से कोरोना को हराने वालों की जांबाज कहानियां, पढ़िए आज दूसरी कड़ी- फेफड़े 80% संक्रमित थे, ऑक्सीजन लेवल 70 पहुंच गया था, मगर हार नहीं मानी...

दिनेश मिश्रा | कोरोना वॉरियर कोरोना पॉजिटिव होने के बाद घबराहट होती है, मगर मजबूत आत्मबल और सकारात्मक बने रहने से हम हर मुश्किल समय का भी डटकर मुकाबला कर लेते है। यह कहानी लालसोट नगरपालिका के पूर्व चेयरमैन दिनेश मिश्रा की है जिन्होंने कोरोना बीमारी को हराया है।18 जून को अचानक मेरी तबीयत खराब हो गई। खांसी- जुखाम होने के कारण 2 दिन तक मौसम का प्रकोप मानकर घरेलू उपचार लेता रहा। मगर तीसरे दिन स्थिति बिगड़ने पर 21 जून की रात को ही परिजन मुझे जयपुर ले गए जहां 22 जून को कराई कोरोना जांच में मैं पॉजिटिव पाया गया। महात्मा गांधी अस्पताल जयपुर में भर्ती कराया गया। 5 दिन तक उसी अस्पताल में रखा गया मगर उपचार सही नहीं होने के कारण व तबीयत ज्यादा खराब होने की स्थिति में राज्य सरकार के दखल के बाद जयपुर स्थित इंटरनल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।

वहां पर भी मैं 15 दिन तक रहा।मेरे फेफड़े 80 प्रतिशत तक संक्रमित हो गए थे और ऑक्सीजन लेवल भी 70 से 80 के बीच में आ गया। ऐसे में ऑक्सीजन पर ही मुझे रखा गया। अपेक्स हॉस्पिटल, इंटरनल हाॅस्पिटल, वेदांता हॉस्पिटल के चिकित्सकों की रायशुमारी के बाद मुंबई से विशेष इंजेक्शन मंगवाए गए जिसके कारण मैं फेफड़ों के संक्रमण से बच सका। हालात में सुधार होने के 15 दिन बाद मुझे अस्पताल से छुट्टी मिल सकी। इसके बाद एक महीना जयपुर स्थित अपने आवास पर रहा।सच कहूं तो मजबूत आत्मबल, परिवार के संबल और पौष्टिक आहार व सकारात्मक सोच के कारण ही मैं मौत के मुंह से वापस निकल कर आ सका हूं।

आज स्वस्थ हूं। लोगों को मेरी सलाह है कि वे मास्क जरूर लगाएं, सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करें और मुख्यमंत्री चिरंजीवी बीमा योजना में पंजीकरण अवश्य कराएं। क्योंकि इस योजना में कोरोना बीमारी को भी शामिल किया गया है जिससे परिवार पर अनावश्यक आर्थिक बोझ नहीं पड़े। कोरोना के लगातार फैलने से संंक्रमितों की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में हम अपनी सतर्कता से ही संक्रमण से घर पर रहकर खुद को और परिवार को बचा सकते है। (जैसा कमलेश आशिका को बताया)

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