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मृत युवक को जीवित बताकर 4 घंटे किया हाईवोल्टेज ड्रामा:तांत्रिक के बहकावे में आकर परिजनों ने मोर्चरी से बाहर निकलवाया शव, जादू-टोने के बावजूद जिंदा नहीं हुआ युवक

दौसा6 महीने पहले
दौसा जिला अस्पताल में मृतक के �

जिले के सदर थाना क्षेत्र के चैना का बास में गुरुवार शाम करंट से एक युवक की मौत हो गई, लेकिन परिजनों ने युवक को जिंदा बताते हुए जिला अस्पताल में जमकर बवाल काटा। अस्पताल की मोर्चरी के बाहर धरने पर बैठे परिजनों की जिद के सामने पुलिस को भी झुकना पड़ा और रात को युवक के शव को मोर्चरी से निकालकर परिजनों को सौंपना पड़ा। परिजनों ने शव को जिंदा करने की उम्मीद में कई जतन किए, लेकिन युवक जिंदा नहीं हुआ। इसके बाद परिजनों ने फिर से शव पुलिस को सौंप दिया।

शव बाहर निकालने की जिद पर अड़े रहे

दरअसल युवक भरत लाल की घर में बिजली का करंट लगने से मौत हो गई थी। परिजन युवक को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने युवक के शव को मोर्चरी में रखवा दिया, लेकिन परिजन युवक की मौत को मानने को तैयार नहीं थे। फोन पर एक तांत्रिक परिजनों को यह कहते हुए बरगलाता रहा कि युवक अभी भी जिंदा है। शव को मोर्चरी से निकालकर तंत्र विद्या करोगे तो वह फिर से जीवित हो उठेगा। जहां पुलिस व प्रशासन परिजनों को कई घंटों तक समझाता रहा लेकिन परिजन जिद पर अड़े रहे। अंत में पुलिस को परिजनों की जिद के सामने झुकना पड़ा व शव को रात के अंधेरे में मोर्चरी से बाहर निकलवाना पड़ा।

मोर्चरी रूम के बाहर मृतक के शव पर झाड़-फूंक करता युवक।
मोर्चरी रूम के बाहर मृतक के शव पर झाड़-फूंक करता युवक।

जादू-टोने के बावजूद नहीं हुआ जीवित

इस बीच मृतक युवक के परिजन तांत्रिक से फोन पर संपर्क कर जादू-टोने के प्रयास करते रहे, लेकिन आधा घंटे बाद भी शव में कोई हलचल नहीं हुई तो परिजनों की उम्मीद टूट गई और शव को फिर से पुलिस को सौंपना पड़ा। लेकिन इस बीच यह साफ हो गया कि प्रशासनिक सिस्टम पर एक तांत्रिक की सोच इतनी भारी पड़ी कि प्रशासन को परिजनों के सामने नतमस्तक होना पड़ा।

पोस्टमार्टम के बाद सुपुर्द किया शव

पूरे घटनाक्रम में डिप्टी एसपी कालूराम मीणा, सदर थाना अधिकारी प्रवीण कुमार व कोतवाली के थानाधिकारी लालसिंह यादव परिजनों को समझाते रहे, लेकिन तांत्रिक के झांसे में आए परिजनों के आगे की पुलिस एक भी की नहीं चली। परिजन पुलिस और प्रशासन पर भरोसा नहीं कर तांत्रिक की बात पर ही भरोसा कर रहे थे, जिसके चलते करीब 4 घंटे तक दौसा ज़िला अस्पताल की मोर्चरी के आगे जिद-बहस का खेल चलता रहा। शुक्रवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा गया।

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