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कोरोनाकाल में ऑक्सीजन की कमी देखकर लिया सबक:वन विभाग ने नर्सरियों में तैयार करवाए 40 प्रकार के 70 हजार पौधे, इनमें अधिकांश छायादार, वितरण 1 जुलाई से

दाैसाएक महीने पहले
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वन विभाग की नर्सरी में तैयार पौधे। - Dainik Bhaskar
वन विभाग की नर्सरी में तैयार पौधे।

कोरोनाकाल में आक्सीजन की कमी के बाद लोगों का पौधरोपण की ओर रूझान बढ़ा है। वन विभाग बांदीकुई पीचूपाड़ा कला नर्सरी से इस बार बरसात के मौसम में 70 हजार पौधे वितरण करेगा। इसके लिए विभाग ने 40 प्रकार के पौधे तैयार किए हैं जिनका वितरण एक जुलाई से होगा।

वन विभाग प्रतिवर्ष बरसात के मौसम में पौधों का वितरण करता है, लेकिन इस बार वितरण के मायने अलग होंगे। कोरोना को लेकर आक्सीजन की आई कमी के बाद लोग पौधरोपण के लिए जागरूक हैं। इसके चलते पौधों का वितरण होने का इंतजार है। विभाग ने पीचूपाड़ा कलां की नर्सरी में फल, फूल व छायादार 40 प्रकार के 75 हजार पौधे तैयार कराए हैं। इनमें से 70 हजार पौधों का वितरण एक जुलाई से किया जाएगा। पांच हजार पौधे विभाग अपने पास स्टाक में रखेगा।

5 से लेकर 40 रुपए रहेगी पौध की रेट

एक जुलाई से वितरण होने वाले इन 70 हजार पौधों की रेट भी विभाग ने निर्धारित की है। ये पौधे 5 से लेकर 40 रुपए तक बेचे जाएंगे।

एक और बोरिंग कराने का प्रस्ताव

विभाग यहां नर्सरी में फिलहाल एक बोरिंग के भरोसे पौध तैयार कर रहा है जो पर्याप्त नहीं है। इसे लेकर विभाग ने एक और बोरिंग का प्रस्ताव तैयार किया।

बरसात के मौसम में बांटेंगे पौधे

बरसात के मौसम में वितरण के लिए हमने 75 हजार पौधे तैयार किए हैं। इनमें से 70 हजार पौधों का एक जुलाई से वितरण किया जाएगा। पांच हजार पौधे विभाग के पास स्टाक में रहेगा।-सत्यनारायण शर्मा, फोरेस्टर नर्सरी पीचूपाड़ा कलां

मेडिसिन के भी तैयार होंगे ढाई लाख से अधिक पौधे, ये फ्री बांटे जाएंगे

वन विभाग पीचूपाड़ा नर्सरी में कोरोना को लेकर मेडिसिन से जुड़े भी ढाई लाख पौधे तैयार कर रहा है। विभाग अश्वगंधा, गिलोय, कालमेघ व तुलसी के 2 लाख 56 हजार 257 पौधे तैयार करेगा। इनमें से गिलोय के 40 हजार पौधे तैयार भी कर चुका है। शेष पौध मदरबैड में तैयार कर रखे है। ये सभी पौधे करीब 64-64 हजार तैयार होंगे। इनका वितरण एक साथ निशुल्क होगा। विभाग को अनुमान है कि लगभग अगस्त तक ये पौधे वितरण के लिए तैयार हो जाएंगे।

नर्सरी में इन पौधों को किया जा रहा तैयार

विभाग ने इस बार नीम के 2500, कचनार के 200, जामुन के 2250, अमरूद के 7350, बिल्वपत्र के 2450, गुलमोहर के 2500, नीबू के 3700, अशोक के 5700, अर्जुन के 4200, शीशम के 1850, शहतूत के 1650, करंज के 7550, गूलर के 950, लहसवा के 1300, आम के 500, कटल के 100, बड़ के 600, पीपल के 700, चुरैल के 1500, गोल्डन हैज के 4400, बोगनबेल के 2400, गुलाब के 1100, पपीता के 1900, कोशियाश्यामा के 1400, पीली कंडेर के 1200, तल वृक्ष के 600, हार श्रृंगार के 1900, मीठी नीम के 800, मोगरा के 200, गुडहल के 1900, चांदनी के 1400, जटरोपा के 600, अंजीर के 1200, लाल कंडेर के 1000, रातरानी के 800, हेमलिया के 400, अनार के 700, रामबाण के 1100, सहजना के 1900 व तुलसी के 500 पौधे तैयार करवाए हैं। इनमें से 70 हजार पौधों का विभाग वितरण करेगा।

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