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  • In The Greed Of Money, ASI, Doctors And Advocates Formed An Organized Gang, In Connivance With The Surveyor Of The Insurance Company, Raised A Claim Of 10 Lakhs, 8 People Still Absconding

जिंदा आदमी के पोस्टमॉर्टम से उठाया 10 लाख का क्लेम:हार्ट और कैंसर से हुई मौतों को बता देते एक्सीडेंट, जिसके नाम क्लेम उठाया वो जिंदा है

दौसा14 दिन पहलेलेखक: राघवेंद्र सिंह गुर्जर

जिंदा व्यक्ति की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तैयार कर 10 लाख रुपए का फर्जी क्लेम उठाने का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले की पड़ताल की तो सामने आया कि इसमें पुलिस से लेकर डॉक्टर और वकील तक शामिल हैं। दौसा पुलिस ने 15 लोगों को गिरफ्तार किया है। मामले की पड़ताल में चौंकाने वाले खुलासे हुए। इन लोगों ने हॉस्पिटल में फर्जी हार्ट और कैंसर के मरीजों की भी एक्सीडेंट में माैत बताकर क्लेम का दावा किया था। इससे पहले एक जिंदा व्यक्ति की सड़क हादसे में मौत बताकर उसके नाम का क्लेम उठा लिया।

इस गिरोह में करीब 22 से ज्यादा लोग शामिल थे। पुलिस ने एक डॉक्टर, पुलिस के एएसआई और एडवोकेट समेत 15 लोगों को पकड़ा है। गिरफ्तार डॉ. सतीश खण्डेलवाल टोंक जिले के टोडारायसिंह के सरकारी अस्पताल में तैनात हैं। एएसआई रमेशचंद जाटव के वीआरएस लेना बताया जा रहा है। यह भी सामने आया कि अभी इस मामले में 8 लोग फरार चल रहे हैं।

दरअसल, इसकी शुरुआत 2016 से हुई थी। हार्ट और कैंसर के मरीजों की एक्सीडेंट में मौत बताकर क्लेम का दावा किया था। इसके बाद 2017 में 26 जनवरी को यश चौहान ने कोतवाली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें गणेशपुरा रोड पर अज्ञात वाहन की टक्कर से मनोज और अरुण नामक दो लोगों की अज्ञात वाहन की टक्कर से मौत होना बताया गया था। फाइल में मौके पर पोस्टमॉर्टम करना लिखा गया था। इसी मामले में दौसा जिला अस्पताल के तत्कालीन ज्यूरिष्ट डॉ. सतीश खंडेलवाल ने फर्जी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तैयार की।

वहीं कोतवाली के अनुसंधान अधिकारी एएसआई रमेशचंद जाटव ने जांच में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को आधार बनाया, एडवोकेट चतुर्भुज मीणा ने एक्सीडेंट क्लेम का दावा किया, जिसमें 10 लाख रुपए का क्लेम उठा लिया। असल में यह दोनों जिंदा थे। इसके बाद 2019 में एक साथ तीन केस सामने आने के बाद इसकी जांच की गई। सामने आया कि क्लेम उठाने के लिए यह लोग फर्जीवाड़ा कर रहे थे। एसपी ने बताया कि अभी तक पता चला है कि 10 लाख का ही क्लेम उठाया है, बाकि क्लेम के लिए दावा कर रखा था, लेकिन इससे पहले ही एक्शन हो गया।

एक मामला जिसमें नेचुरल डेथ को बताया एक्सीडेंट
कोतवाली थाने में 14 अक्टूबर 2016 को भांवता निवासी नवल किशोर मीणा ने मामला दर्ज कराया था कि उसके पिता जंसीराम मीणा और नाथूलाल को सिंगवाड़ा मलारना चौराहे पर अज्ञात वाहन टक्कर मार गया। इनकी जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। मामले की जांच करते हुए कोतवाली थाने के एएसआई रमेश चंद जाटव ने सड़क हादसा बताते हुए एफआर लगा दी। 2019 में शिकायत के बाद केस रीओपन किया गया तो सामने आया कि जिनकी मौत एक्सीडेंट में हुई थी, उनमें जसीराम मीणा की मौत हार्ट अटैक और नाथूलाल की कैंसर से मौत होना पाया गया।

इस तरह से हुआ पूरे मामले का खुलासा
पुलिस अधिकारियों और एसओजी जयपुर की ओर से इन केस को रीओपन किया गया। पहले एसओजी और बाद में तत्कालीन जयपुर रेंज आईजी द्वारा जांच कराई गई। तब पूरा फर्जीवाड़ा सामने आया। दर्ज FIR के अनुसार न तो कोई दुर्घटना हुई और न ही किसी की मौत हुई। पूरे प्रकरण में आरोपियों ने षड्यंत्र रचकर झूठा मुकदमा दर्ज करवाकर फर्जी तरीके से इंश्योरेंस क्लेम की राशि उठाई। इसके बाद इसकी जांच फिर से दौसा एसपी अनिल बेनीवाल को दी गई। जांच के लिए 28 अधिकारियों की टीम बनाई तो पता चला कि इन लोगों ने जिंदा आदमी तक का क्लेम उठा लिया।

इस तरह से जुड़ी थी गिरोह की कड़ियां
एडवोकेट चतुर्भुज मीणा: परिचितों के जरिए दौसा क्षेत्र में मरने वाले लोगों का ध्यान रखा जाता था। इसके बाद उनके परिजनों को पैसे का लालच देकर एक्सीडेंट की फर्जी रिपोर्ट दर्ज कराई जाती थी।
ASI रमेशचंद: इन सभी एक्सीडेंट के मामलों की जांच एएसआई रमेशचंद ने ही की थी। मौके पर हादसे में मौत बताकर फर्जी पंचनामा तैयार करवाया जाता था।
डॉ. सतीश खंडेलवाल: फर्जी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बनवाकर बीमा कंपनी के सर्वेयर की मिलीभगत से एडवोकेट द्वारा क्लेम का दवा किया जाता था।