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ग्रह-नक्षत्र:अधिक मास कल से, मांगलिक कार्यों पर रोक

दौसा3 दिन पहले
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  • पृथ्वी के कालचक्र में तिथियों के अंतराल को पूरा करने के लिए आता है अधिक मास

इस बार 2 अश्विन मास होने के कारण 18 सितंबर से अधिक मास शुरू हो जाएगा। अधिक मास के दौरान मांगलिक कार्य निषेध रहेंगे। पंडित कांता प्रसाद महेश्वरा ने बताया कि अधिक मास 18 सितंबर को सुबह 6:17 बजे शुरू होगा। इस दिन उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र सुबह 7:00 बजे तक रहेगा। उसके बाद हस्त नक्षत्र संपूर्ण दिन व रात्रि 4:07 बजे तक रहेगा। राहुकाल सुबह 10:30 से दोपहर 12:00 बजे तक एवं प्रतिपदा तिथि 12:51 बजे तक रहेगी। इसके बाद द्वितीया तिथि प्रारंभ हो जाएगी। उन्होंने बताया कि 12:51 बजे के बाद संपूर्ण दिन व रात्रि मृत्यु योग रहेगा। इस दिन सूर्य व चंद्रमा दोनों ग्रह कन्या राशि में रहेंगे। अधिक मास को मलमास के नाम से भी जाना जाता है। पृथ्वी एवं सूर्य के कालचक्र में तिथियों के अंतराल को पूरा करने के लिए अधिक मास व कम करने के लिए क्षय मास आता है। जिस साल जिस महीने में सूर्य संक्रांति का अभाव हो जब उस महीने में अधिक मास आता है। जिस वर्ष दो संक्रांति पड़ती है उसे क्षय मास कहते हैं। अधिक मास 32 माह 16 दिन तथा चार घड़ी के अंतर में आता है। जबकि क्षय मास 141 वर्ष बाद और फिर 19 वर्ष बाद पुनः आता है। अधिक मास में दान पुण्य करना उत्तम माना गया है। क्योंकि इसे पुरुषोत्तम मास की संज्ञा दी गई है। इसमें ब्राह्मणों एवं संतों को दान पुण्य करना सर्वश्रेष्ठ होता है। लेकिन नया कार्य प्रारंभ करने, नई वस्तु क्रय करने, व्रत प्रारंभ व उद्यापन आदि कार्य वर्जित हैं। उन्होंने बताया कि अधिक मास के दौरान 11 अक्टूबर को पुष्य नक्षत्र से रवि पुष्य योग व सर्वार्थ सिद्धि योग रहेंगे। पंडित कांता प्रसाद महेश्वरा ने बताया कि अधिक मास 16 अक्टूबर तक रहेगा। 17 अक्टूबर से नवरात्र प्रारंभ होंगे। 24 को दुर्गा अष्टमी व 25 अक्टूबर को महानवमी एवं दशहरा पर्व रहेगा।

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