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सड़क दुर्घटना में मौत:पिता-पुत्र की मौत के तीसरे दिन बेटी ने भी दम तोड़ा, दो दिन में घर से उठी तीन अर्थियां

दौसा5 दिन पहले
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  • हापावास गांव से श्यारौली भैंरूजी के स्थान जाते समय गंगापुर सिटी में बस ने बाइक को मारी थी टक्कर

ग्राम हापावास में 2 दिन पूर्व सड़क दुर्घटना में हुई पिता-पुत्र की मौत के बाद सोमवार रात 10 बजे बेटी ने भी जयपुर में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।जानकारी के अनुसार गत 12 सितंबर को हापावास की नयाकुंआ ढाणी निवासी हनुमान मीणा व उसका पुत्र प्रकाश मीणा अपनी पुत्री केशंता (20) को बाइक से गंगापुर सिटी के समीप श्यारौली भैरूजी के स्थान पर लेकर जा रहे थे।इस दौरान उदेई मोड़ थाना क्षेत्र के जयपुर बाईपास स्थिति आरटीओ आफिस के पास एक निजी बस व बाइक में आमने सामने की टक्कर हो गई।

इसमें बाइक सवार हनुमान मीणा की मौके पर ही मौत हो गई थी जबकि उनके पुत्र विकास ने अस्पताल ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया था। बेटी केशंता को गंभीर घायल होने पर स्थानीय पुलिस ने अस्पताल में भर्ती करवाया था।रविवार को मृतक पिता-पुत्र के शवों को लाने से पहले ही घायल केशंता को दौसा जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद सोमवार दोपहर को केशंता की तबीयत बिगड़ने पर उसे जयपुर रेफर कर दिया गया। लेकिन रात करीब 10 बजे इलाज के दौरान केशंता ने भी दम तोड़ दिया। इसकी सूचना परिवार के लोगों को मिली तो घर में मातम छा गया। सोमवार को ही पिता-पुत्र का एक साथ दाह संस्कार किया गया था। दूसरे दिन बुधवार को घर में एक और अर्थी उठ गई जिसके चलते पूरा परिवार सदमे में है।

9 वर्ष पहले मां की बीमारी से हुई थी मौत, अब परिवार में तीन और मौत

परिवार के लालनपालन में मुख्य भूमिका निभाने वाली हनुमान की पत्नी कमला देवी की 12 दिसंबर 2012 को बीमारी से मौत हो गई थी। इससे उसे परिवार संचालन में अनेक तरह की परेशानियां झेलनी पड़ी। मृतक हनुमान के अब 4 पुत्र हैं, जिनमें सबसे बड़ा पुत्र हरिकिशन एक पैर से दिव्यांग है और वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है। उससे छोटा राजेश रेलवे ग्रुप डी में नौकरी करता है। तीसरे नंबर का हरकेश 10वीं के बाद पढ़ाई छोड़ मजदूरी करता है।

चौथे नंबर का लालाराम जो बीए तक पढ़ाई कर चुका है। बेटी केशंता इस वर्ष फर्स्ट ईयर में पढ़ रही थी।शव देख बिलख पड़े परिजन, परिवार की माली हालत है कमजोर मंगलवार अपराह्र 3 बजे केशंता का शव ढाणी में पहुंचा तो परिवार के लोग बुरी तरह बिलख रहे थे। वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम हो रही थी। केशंता 5 भाइयों में चौथे नंबर की इकलौती बहन थी जिसकी तबीयत खराब रहती थी। गौरतलब है कि मृतक हनुमान के परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। माली हालत कमजोर होने के बावजूद हनुमान ने बच्चों की पढ़ाई पर हमेशा जोर दिया था। मात्र दो कमरों में परिवार का गुजर बसर हो रहा है और बारिश पर आधारित खेती बाड़ी ही होती है।

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