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सड़क दुर्घटना:ट्रक को ओवरटेक करते तेज रफ्तार बाइक सवार बस से जा भिड़े, पिता-पुत्र की मौत, बेटी गंभीर

दौसा12 दिन पहले
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निजी बस-बाइक की टक्कर में गंभीर घायल बालिका का उपचार करते डॉक्टर। - Dainik Bhaskar
निजी बस-बाइक की टक्कर में गंभीर घायल बालिका का उपचार करते डॉक्टर।
  • गंगापुर सिटी के बाइपास स्थित आरटीओ आॅफिस के पास हादसा, स्पीड ने ली जान, बालिका जयपुर रेफर

गंगापुर सिटी के उदेई मोड़ थाना क्षेत्र के जयपुर बाईपास स्थित आरटीओ ऑफिस के पास रविवार शाम एक निजी बस और बाइक की आमने-सामने की टक्कर हो जाने से बाइक सवार बाप-बेटे की मौत हो गई, जबकि उनके साथ जा रही 17 वर्षीय पुत्री गंभीर घायल हो गई। सूचना मिलने पर उदेई मोड़ थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घायल पुत्री को राजकीय जिला अस्पताल मेंभर्ती कराया।दौसा के हापावास निवासी हरकेश मीना ने बताया कि उसके पिता हनुमान प्रसाद मीना (60), छोटा भाई विकास मीना (18) व बहन केशंता मीना (17) रविवार सुबह 9:30 बजे अपने गांव से दर्शन करने के लिए भैरव धाम श्यारौली जा रहे थे।

इसी दौरान गंगापुर सिटी में जयपुर बाइपास पर आरटीओ ऑफिस के पास सवाई माधोपुर की ओर जा रही एक निजी बस ने बाइक को सामने से टक्कर मार दी।थाना पुलिस के अनुसार बाइक पर 3 लोग सवार थे। चालक बाइक को तेज रफ्तार से चला रहा था। उसने एक ट्रक को ओवरटेक करने का प्रयास किया। इसी दौरान सामने से आ रही एक निजी बस से उसकी आमने-सामने की टक्कर हो गई। हादसे में पिता -पुत्र की मौत हो गई जबकि बेटी गंभीर घायल है।

हादसे में हनुमान प्रसाद मीना की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनका बेटा विकास मीना उर्फ मीनू व उसकी बेटी केशंता मीना घायल हो गई। सूचना मिलने पर 108 एंबुलेंस व उदेई मोड़ थाना पुलिस मौके पर पहुंची। एबुलेंस से दोनों घायलों को राजकीय जिला अस्पताल पहुंचाया, लेकिन विकास ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। चिकित्सालय में डॉक्टरों ने विकास को मृत घोषित कर दिया। घायल केशंता को अस्पताल में भर्ती करने के बाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने उसे जयपुर रेफर कर दिया। दूसरी ओर उदेई मोड़ थाना पुलिस ने मृतक हनुमान प्रसाद मीना के शव को अपनी गाड़ी से ही राजकीय जिला चिकित्सालय पहुंचाया और पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में रखवा दिया। ज्येष्ट पुत्र हरकेश मीना ने बताया कि उसका छोटा भाई विकास गांव में ही 11वीं कक्षा में पढ़ रहा था।

परिवार में पांच बेटों में सबसे छोटा था विकासहनुमान के पांच पुत्रों में विकास सबसे छोटा था। हनुमान खेती बाडी व मजदूरी कर अपने पुत्रों को पढ़ा रहा था। ऐसे में परिवार की आर्थिक स्थिति दयनीय है। अब 4 बेटों को मार्गदर्शक पिता व सबसे छोटे भाई प्रकाश के असमय चले जाने पर परिवार की नैया डगमगा गई है।

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