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  • Planting One Million Saplings In 1350 Km On The Country's Longest Expressway Will Reduce Carbon Dioxide Emissions, Harvesting Systems Will Also Be Installed To Save Water.

देश का पहला ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे:पांच तरह के 10 लाख पौधे कम करेंगे पॉल्यूशन, पहला हाईवे जहां वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के लिए बनेंगे 700 लीटर के टैंक

दौसा4 महीने पहलेलेखक: राघवेंद्र सिंह गुर्जर
दौसा जिले में तैयार हुआ एक्सप्रेस-वे।

भारतमाला परियोजना के तहत बन रहे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे को ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे भी कहा जा रहा है। 1350 किलोमीटर लंबे इस हाईवे पर प्रदूषण कम करने के लिए करीब 10 लाख पौधे लगाए जाएंगे। हाईवे पर लगने वाले खास 5 किस्म के पौधों की खासियत यह है कि यह प्रदूषण कम करेंगे।

अधिकारियों का कहना है कि देश के सबसे लंबे हाईवे पर परदेशी नीम, स्नेक, एरिका, गरबेरा व जाइलीन यह पांच किस्म के पौधे लगाए जाएंगे। ये प्लांट पॉल्यूशन को कम करने के साथ ही पर्यावरण को शुद्ध रखेंगे। इनमें एरिका पॉम कार्बनडाइ ऑक्साइड ग्रहण करता है और फिर ऑक्सीजन छोड़ता है। वहीं स्नेक प्लांट जहरीली गैसों को ऑब्जर्व कर लेता है। यह प्लांट हाईवे के किनारे और बीच में लगाए जाएंगे।

बारिश का पानी बचाने के लिए बनेंगे टैंक
इस हाईवे की खासियत यह होगी कि बारिश के पानी को बचाने के लिए यहां वॉटर हार्वेस्टिंग टैंक बनेंगे। दौसा जिले में करीब 130 टैंक बनाए जाएंगे। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि पूरे हाईवे पर 500 मीटर की दूरी पर करीब 2 हजार टैंक बनेंगे। प्रत्येक टैंक की क्षमता 700 लीटर की होगी। यानी हर साल बारिश का करीब 14 लाख लीटर पानी बचाया जाएगा। यही पानी इन प्लांट के लिए उपयोग किया जाएगा।

एक्सप्रेस-वे के बीच में लगाए गए पौधे।
एक्सप्रेस-वे के बीच में लगाए गए पौधे।

राजस्थान में 374 KM होगी लंबाई
इस एक्सप्रेस-वे का 2023 तक काम पूरा करने का टारगेट रखा गया है। अभी तक 350 किलोमीटर का एक्सप्रेस-वे बनकर तैयार हो चुका है। राजस्थान के अलवर, भरतपुर, दौसा, सवाई माधोपुर, टोंक, बूंदी और कोटा जिलों से गुजरने वाले इस एक्सप्रेस-वे की लंबाई 374 किलोमीटर है। इसमें 16 हजार 600 करोड़ रुपए खर्च होंगे। यह एक्सप्रेस-वे दिल्ली और मुंबई के बीच की दूरी कम करने के लिए बनाया जा रहा है।

12 घंटे में दिल्ली से मुंबई तक का सफर
वर्तमान में दिल्ली से मुंबई की दूरी सड़क मार्ग से लगभग 1510 किलोमीटर है। एक्सप्रेस-वे बनने के बाद यह दूरी 1350 किलोमीटर रह जाएगी। ऐसे में एक्सप्रेस-वे बनने के बाद कार से केवल 12 घंटे में दिल्ली से मुंबई का सफर तय कर सकेंगे।

इसके निर्माण पर लगभग 90 हजार करोड़ रुपए की लागत आएगी। वहीं दिल्ली से दौसा तक एक्सप्रेस-वे का 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। यहां जयपुर-आगरा नेशनल हाईवे 21 से एक्सप्रेस-वे को लिंक करते हुए भाण्डारेज बंध पर सर्किल व टोल प्लाजा बनाने का कार्य चल रहा है। इससे लोगों को जयपुर, आगरा व करौली की ओर जाने में सुविधा होगी। दिल्ली से दौसा तक का एक्सप्रेस-वे इसी साल के अंत तक शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।

इकोनॉमिक हब्स को जोड़ेगा एक्सप्रेस-वे
देश के 5 राज्यों से गुजरने वाला यह एक्सप्रेस-वे प्रदेश के जयपुर, किशनगढ़, अजमेर, कोटा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर जैसे इकोनॉमिक हब के लिए भी शानदार कनेक्टिविटी मुहैया कराएगा। ये एक्सप्रेस-वे 5 साल में बन जाएगा। बता दें कि 1167 किलोमीटर की इंडोनेशिया की ट्रांस जावा रोड 2019 में दो दशकों के बाद बनकर तैयार हुई। इस एक्सप्रेस-वे की खासियत यह है कि यह पांच राज्यों के अधिकतर पिछड़े इलाकों से होकर गुजरेगा।

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