पक्षी प्रेमियों के लिए खुशखबरी:साइबेरियन हवासील पक्षियों को मोरेल बांध दे रहा संरक्षण, पिछले साल दिसंबर में 20 आए थे, इस बार 1000 से अधिक

दौसाएक महीने पहले
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  • सांभरलेक (जयपुर) और केवलादेव (भरतपुर) पक्षी विहार से ज्यादा मोरेल बांध आ रहे प्रवासी पक्षी

कमलेश आसीका | लालसोट शीत लहर बढ़ने के साथ उपखंड के मोरेल बांध पर प्रवासी पक्षियों की संख्या में इजाफा हो रहा है। हालत यह है कि संकटासन्न श्रेणी के साइबेरियन पक्षी डेलमेसियन पेलिकन आईयूसीएन को मोरेल बांध संरक्षण देने में अपनी महती भूमिका का निर्वाह कर रहा है। राजेश पायलट राजकीय महाविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.सुभाष पहाड़िया ने बताया कि मोरेल बांध पर इन दिनों अन्य पक्षियों के साथ विश्व के सबसे बड़े उड़ने वाले जलीय पक्षी डेलमेसियन पेलिकन जिन्हें सामान्य रूप से हवासील भी कहते है। डेलमेसियन पेलिकन आईयूसीएन की रेड डेटा लिस्ट में इनकी तेजी से कम हो रही संख्या के कारण इन्हें संकटासन्न श्रेणी में रखा गया है।

खुशखबरी... बांध का स्वच्छ जल और वातावरण भा रहा, 60 प्रकार के हजारों प्रवासी जलीय पक्षी पहुंचे

ये पक्षी अपने भारी भरकम शरीर और लंबी थैलीयुक्त चोंच के कारण बड़े आकर्षक लगते है। शीत ऋतु में जब यूरोप और साइबेरिया में बर्फ गिरती है तो ये पक्षी भारत में हजारों किलोमीटर का सफर तय कर प्रवास पर आते है। डॉ.पहाड़िया के अनुसार पिछले वर्ष दिसंबर में इनकी संख्या 20 के लगभग थी, जो इस बार इनकी संख्या 1000 दिखाई दे रही है। इससे यह अनुमान है कि अभी इनकी संख्या में और इजाफा हो सकता है। मोरेल बांध का स्वच्छ जल और वातावरण इन प्रवासी पक्षियों को रास आ रहा है। यही कारण है कि बांध पर अब तक यहां पलास गल, ब्लेक हेडेड गल, रूड़ी शेल्डक, ग्रेटर फ्लेमिंगो, नोबबिल्ड डक, स्पूनबिल, रिवर टर्न, व्हिसकर टर्न, ब्लेक टेल्ड गोडविट, रफ, ग्रे हेरोन, परपल हेरॉन, इंडियन स्पोटबिल डक, लिटिल रिंग प्लोवर आदि लगभग 60 प्रकार के जलीय पक्षी हजारों की संख्या में आगमन हो चुके है।

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