पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

किसानों के काम की खबर:15 जून तक कर लें मूंगफली की बुआई, उन्नत किस्म के बीज से होगी अच्छी उपज; लालसोट क्षेत्र में लहलहाने लगी मूंगफली की फसल

दौसा11 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
दौसा के लालसोट में लहलहाते मूंगफली के पौधे (फाइल) - Dainik Bhaskar
दौसा के लालसोट में लहलहाते मूंगफली के पौधे (फाइल)

किसानों के लिए खबर है कि मानसून आने पहले अपने खेतों की जुताई कर बुआई के लिए तैयार कर लें तथा मूंग व मूंगफली बुआई के लिए पलाव शुरू कर दें, क्योंकि मूंगफली की बुआई का समय 1 से 15 जून के बीच सही माना गया है। कृषि अधिकारियों का कहना है कि बुआई के लिए तापमान 40 डिग्री से कम होने देना चाहिए। अमूमन बारिश आने से पहले की जाने वाली मूंगफली की बुवाई से पहले खेत में दो से तीन बार हल्की जुताई कर लें। उसके बाद पलाव (सिंचाई) शुरू करें। इससे अच्छी पैदावार होगी।

लालसोट में लहलहाने लगी फसल
जिले के लालसोट क्षेत्र में मई माह में ही इसकी बुआई हो चुकी है तथा पौधे में फूल भी आ गए हैं। यहां की भूमि मूंगफली के लिए सर्वाधिक उपयोगी है तथा उपज भी अच्छी होती है। ऐसे में यहां के किसान अगेती फसल लेकर अच्छा भाव ले लेते हैं। इनकी यह फसल सबसे पहले ठेले आदि पर बिकने के लिए बाजार में पहुंचती है।

हालांकि जानकारों का मानना है कि तय समय से पहले बुआई करने पर 40 किलो प्रति हैक्टेयर प्रतिदिन का उत्पादन कम हो सकता है। इसी प्रकार 15 जून के बाद बुआई से भी 35 किलो प्रति हैक्टेयर प्रतिदिन कम उत्पादन होने की आशंका रहती है। इसलिए बुआई तय समय पर ही करें।

ऐसे करें खेत की तैयारी
मूंगफली की फसल लेने के लिए खेत की 2 या 3 बार जुताई करें। इससे जमीन पोली होने के साथ ही सूत्रकृमि से छुटकारा मिलेगा। रेतीली जमीन में ज्यादा गहराई से जुताई नहीं करें। इससे अच्छा फल ज्यादा नीचे तक चला जाता है और उत्पादन कम मिलता है। बुवाई से पहले स्प्रिंकलर से 6 घंटे लगातार पलेवा करें। इससे भूमि में नमी हो जाएगी।

मूंगफली की कई किस्में
दौसा कृषि अधिकारी (प्रशिक्षण) अशोक कुमार मीणा ने बताया कि मूंगफली की अमूमन कई किस्में होती हैं। इसमें अपने जिले में प्रचलित पहली किस्म टी जी 37 ए व दूसरी गिरनार 2 आदि विकसित किस्म मानी जाती हैं। मूंगफली का बीज महंगा होने के कारण किसान बीजों की बुआई के समय दूरी ठीक से नहीं रख पाते हैं। इससे रोग लगने का खतरा रहता है, इसका असर उत्पादन पर आता है।

पहले बीजोपचार करें
बुआई करने से पहले बीजों का ठीक से उपचार कर लेना चाहिए। इसके लिए डायसानेम-45 या थायरम या ट्राइकोडर्मा 10 ग्राम प्रति किलो की दर से काम में ले सकते हैं। बीजोपचार करते समय इस बात का ध्यान रखना होगा कि हर बीज ठीक से दवा से कोटिंग हो जाए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो उस बीज पर किसी जीवाणु या रोग का असर आ सकता है।

इस तरह से काम लें उर्वरक
मूंगफली की फसल में उर्वरक या फर्टिलाइजर काफी सोच समझकर डालना चाहिए। इसमें 15 से 20 किलो नाइट्रोजन, 60 किलो फास्फोरस और मोटी मूंगफली के लिए जिप्सम 400 किलो और छोटी मूंगफली के लिए 250 किलो जिप्सम डालना चाहिए। खरपतवार नियंत्रण के लिए पेंडीमिथालिन 1 किलो (एआई) प्रति हैक्टेयर बुआई के तुरंत बाद छिड़काव करें।

ऐसे करें सिंचाई
अच्छा पलेवा होने से मूंगफली को तत्काल सिंचाई की जरूरत नहीं रहती। बुआई के 15 से 20 दिन बाद स्प्रिंकलर से पानी देना चाहिए। बारिश आने के बाद सिंचाई की जरूरत नहीं रहती। बारिश में अंतराल हो तो दिन में पानी दे सकते हैं।

बिना सलाह यूरिया न छिड़कें
महंगे बीज के कारण कई बार बीज डालने में दूरी अधिक रह जाती है। इस दूरी के बीच में कई किसान यूरिया डाल देते हैं। इससे पौधे में ऊपरी बढ़वार तो उम्मीद से अधिक हो जाती है, लेकिन जमीन के अंदर फल कम आते हैं।

खबरें और भी हैं...