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आरएएस में सफलता:सुनील को इंजीनियरिंग के बाद मिली आरएएस में सफलता

दौसा22 दिन पहले
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सैंथल निवासी सुनील कुमार राजोरा ने आरएएस में 171वीं रैंक प्राप्त कर गांव का नाम रोशन किया। सुनील ने उदयपुर गवर्नमेंट कॉलेज से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर यह सफलता हासिल की है। पिता महादेव प्रसाद चोरड़ी विद्यालय में प्रिंसीपल के पद पर और माता गृहणी हैं। बड़े भाई अनिल कुमार आर्य कॉलेज में व्याख्याता हैं। ताऊ राधेश्याम शर्मा मरुधरा ग्रामीण बैंक में मैनेजर हैं। सुनील वर्तमान में गंगा सागर कॉलोनी आगरा रोड जयपुर में रह रहे हैं।

कुलदीप सिंह को मिली 43वीं रैंक

दौसा | ग्राम मलारना निवासी कुलदीप सिंह पुत्र करण सिंह ने चयन आरएएस परीक्षा में 43वीं रैंक हासिल की। बालाजी नवयुवक मंडल के कार्यकर्ताओं ने घी के दीये जलाकर मिठाई बांटी। चाचा मनोहर सिंह ने इस उपलब्धि को गौरवान्वित करने वाला बताया। भूपेंद्र सिंह मलारना, राहुल पारीक, हरेंद्र सिंह, गिर्राज शर्मा, पूरण मौजूद रहे।

लक्ष्मीकांत का स्कूल स्टाफ ने सम्मान किया

चांदराना| राबामावि नांगल बैरसी में कनिष्ठ सहायक लक्ष्मीकांत शर्मा का आरएएस में चयन होने पर प्रधानाध्यापक व स्कूल स्टॉफ ने सम्मान किया। लक्ष्मीकांत ने बताया कि नौकरी करते हुए जब भी समय मिला तब घर पर ही ऑनलाइन पढ़ाई, क्लासेज के नोट्स के साथ तैयारी की, जिसकी बदौलत आरएएस में चयन हो गया। उन्हें फुटबॉल खेलना पसंद है।

प्रधानाध्यापक बने आरएएस

चांदराना| खुरीकलां निवासी व बीनावाला स्कूल के प्रधानाध्यापक हरमुख गुर्जर का आरएएस में चयन हुआ। हरमुख खुरीकलां ग्राम पंचायत के वर्तमान सरपंच बृजमोहन गुर्जर का छोटे भाई हैं। सबसे पहले उसका चयन सेना में हुआ था। 16 वर्ष तक सेना में सेवा देने के बाद सितम्बर 2017 में सेना से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली। उसके बाद आरएएस को अपना लक्ष्य बना लिया। जयपुर रहकर तैयारी की। इस दौरान तृतीय श्रेणी अध्यापक के लिए चयन हो गया। बाद में द्वितीय श्रेणी में चयनित हो गए। अब आएएस 2018 भर्ती परीक्षा में चयन हुआ तो परिजनों ने मुंह मीठा कराकर खुशी जताई।

दिलीप ने पहले प्रयास में ही पाया मुकाम

मंडावर| ग्राम खेड़ी नारायण सिंह निवासी दिलीप कुमार मीणा ने पहले ही प्रयास में अारएएस में चयन हुआ। उन्होंने जनरल कैटेगरी में 289वीं रैंक प्राप्त की जबकि एसटी वर्ग में 9वीं रैंक प्राप्त की। दिलीप के पिता रामस्वरूप किसान है जबकि मां उगंती देवी गृहणी है। दिलीप ने बताया कि उन्हें आरएसएस बनने की प्रेरणा आरएएस अधिकारी डॉ. सुरेश मीना व आईआरएस डॉ. राजेश मीना से मिली। अपनी दिनचर्या के बारे में बताया कि उन्होंने पढ़ाई को ही प्राथमिकता दी। योजना बनाकर उसे पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत की। परीक्षा से पहले दिल्ली में जाकर कोचिंग की। लक्ष्य निर्धारण करके ईमानदारी के साथ उसका अनुसरण करने से सफलता जरूर मिलेगी।

गांव की बेटी संतोष बनीं आरएएस

बांदीकुई ग्रामीण| पीचूपाड़ा खुर्द की बेटी संतोष चेची का आरएएस में चयन हुआ। राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल भांवता भांवती के प्रधानाचार्य बाबूलाल गुर्जर की बेटी संतोष चेची ने यह सफलता पहले ही प्रयास में हासिल की। संतोष ने आरएएस परीक्षा में 297वीं रैंक प्राप्त की। संतोष ने भारतीय प्रबंध संस्थान इंदौर से प्रबंधन में डिप्लोमा प्राप्त किया। वहीं बीकॉम डिग्री इग्नू भोपाल से प्राप्त की। वर्तमान में वे महिला अधिकारिता विभाग बयाना में सुपरवाइजर है। आरएएस बनने का सपना था। महिला एवं अधिकारिता विभाग में व्यस्त नौकरी होने के बाद भी वे समय निकालकर आरएएस की तैयारी करती थी।

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