विरोध:बगैर मुआवजा कब्जा संभालने पहुंचा प्रशासन बैरंग लौटा, ग्रामीणों ने जताया विरोध

दौसा22 दिन पहले
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दौसा गंगापुर रेल लाइन परियोजना के तहत डीडवाना ग्राम में आवाप्त की गई 5 बीघा जमीन का प्रशासन ने मुआवजा दिए बगैर ही मौके पर पहुंचकर रेलवे अधिकारियों को कब्जा संभलवाने की कवायद ग्रामीणों के विरोध के कारण नाकाम हो गई। तहसीलदार मदनलाल मीणा की अगुवाई में पहुंचा राजस्व विभाग का दल बगैर भौतिक रूप से कब्जा संभलवाए मौके से बैरंग लौट गया। तहसीलदार मीणा से गुहार करते हुए जमीन के खातेदार किसान नेता नाथूलाल पटेल, कैलाश शर्मा, ग्राम सेवा सहकारी समिति अध्यक्ष सत्यवान पटेल, रामेश्वर प्रसाद शर्मा आदि ने कहा कि प्रशासन जमीन अवाप्ति की कार्रवाई को पहले पूरा करें, मुआवजा राशि का भुगतान करें, इसके बाद जमीन पर कब्जा संभालवाने की कार्रवाई करें। दौसा गंगापुर सिटी रेल लाइन परियोजना के लिए डीडवाना ग्राम के खातेदार नाथू लाल पटेल बनने की 5 बीघा भूमि को आवाप्त करने की सन 2009 में रेल विभाग ने कार्रवाई शुरू की थाी राजस्व प्रशासन ने जमीन को असिंचित घोषित कर दिया। आपत्ति जताने के बाद दोबारा मौका निरीक्षण कर जमीन को सिंचित घोषित की गई। उसमें वृक्ष, कुएं व अन्य की रिपोर्ट शामिल की गई। सन् 2012 में 20 लाख 20 हजार रुपए का मुआवजा तय किया गया जो असिंचित का बनाया। आपत्ति करने पर संशोधित अवार्ड 12 लाख 30 हजार रुपए जारी किया गया। संशोधित अवार्ड रेलवे द्वारा जमा नहीं कराया गया। जिला एवं सत्र न्यायालय में रेफरेंस पेश किया जहां पर 11 अप्रैल 2016 को पुराने भूमि अवाप्ति नियम 1894 की धारा 11 ए के तहत कार्रवाई की गई। अवाप्ति को समय सीमा में पूरा नहीं होने के कारण निरस्त कर दिया गया। इस आदेश के विरुद्ध उप मुख्य अभियंता दौसा गंगापुर रेल परियोजना ने एक रिट याचिका राजस्थान हाई कोर्ट में पेश की। 5 अगस्त 2021 को जिला एवं सत्र न्यायाधीश के फैसले की पुष्टि करते हुए निर्णय दिया तथा भूमि अवाप्ति अधिकारी द्वारा भी उच्च न्यायालय में अपना जवाब पेश करके बताया कि खातेदारान की भूमि का संशोधित अवॉर्ड 30 जनवरी 2013 को बनाकर भेज दिया है। मगर आज दिन तक भी संशोधित अवॉर्ड राशि 32 लाख 50 हजार रुपए का भुगतान खातेदारों को नहीं किया गया है। तहसीलदार मदन लाल मीणा ने बताया कि गुरुवार को आवाप्त की गई भूमि का कब्जा छुड़वाने के लिए मौके पर गए थे। खातेदारों ने विरोध किया। अधिकारियों से जैसा आदेश मिलेगा वैसे कार्रवाई कर दी गई है।

एसडीएम सरिता मल्होत्रा ने बताया कि मुआवजा लेने के लिए खातेदारों को 3 दिन का समय दिया गया था जाे लेने नहीं आए। इसलिए जो मुआवजा निर्धारित हुआ है वह रेफरेंस से अदालत में जमा करवा दिया है। संशोधित मुआवजा बना ही नहीं है, इसलिए उसका भुगतान संभव नहीं है। इसके लिए खातेदार ट्रिब्यूनल में जाए तथा कार्यवाही करें। नाथूलाल पटेल ने कहा कि जमीन अवाप्ति अधिकारी ने संशोधित मुआवजा निर्धारित कर कलेक्टर को प्रस्ताव भेजा था। इसलिए रेलवे संशोधित मुआवजे की राशि नहीं देता है तो भूमि अवाप्ति अधिकारी को ट्रिब्यूनल में जाना चाहिए। जमीन का मुआवजा लेने का अधिकार खातेदार को भूमि अवाप्ति अधिकारी से है। क्योंकि भूमि अवाप्ति अधिकारी के आदेश की पालना रेलवे नहीं कर रहा है तो ट्रिब्यूनल में भूमि अवाप्ति अधिकारी को जाना चाहिए।

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