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अच्छी खबर:लालसोट के तालेड़ा जमात में दिखाई दिया दुर्लभ प्रवासी पक्षी ब्लीथ्स रिड वार्बलर, लंबाई व ऊंचाई 12 सेमी. पक्षीप्रेमियों में खुशी

दौसा12 दिन पहले
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दौसा | तालेडा जमात में दिखाई दिया महज 12 सेमी. आकार का दुर्लभ प्रवासी पक्षी ब्लीथ्स रिड वार्बलर। - Dainik Bhaskar
दौसा | तालेडा जमात में दिखाई दिया महज 12 सेमी. आकार का दुर्लभ प्रवासी पक्षी ब्लीथ्स रिड वार्बलर।
  • यूरोप का यह पक्षी अप्रैल तक भारत में रहता है, विशेष लंबी ध्वनि चीक-चीक से पहचाना जाता है, कई अन्य पक्षियों की भी आवाज की नकल कर लेता है

दुर्लभ प्रवासी पक्षी ब्लीथ्स रीड वार्बलर लालसोट के तालेड़ा जमात की ओर से झाड़ियों व कृषि भूमि के पेड़ों पर 2 से चार के समूह में देखे गए हैं। इस विशेष पक्षी का लालसोट क्षेत्र में दिखाई देना पक्षी प्रेमियों के लिए बहुत ही रोमांचक और सुखद अनुभव देने वाली खबर है।लालसोट उपखंड और आसपास क्षेत्र की जैवविविधता संरक्षण और पक्षियों के डेटा संधारण की दिशा में कार्य कर रहे प्राणी विज्ञानी और पक्षीविद् डॉ. सुभाष पहाड़िया ने बताया कि ब्लीथ्स रीड वार्बलर (एक्रोसिफेलस डुमेटोरम ) सबसे लंबे समय तक प्रवास करने वाले छोटे पक्षियों में से एक है जो मूलतः पूर्वी यूरोप के अधिकांश भाग और पैलेआर्कटिक क्षेत्र में प्रजनन करते हैं। यह भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका में शीत ऋतु का प्रवासी पक्षी है।

विश्व में पाई जाने वाली वार्बलर की 8 प्रजातियों में से एक है। ये पक्षी यूरोप से सर्दियों में अगस्त माह में प्रवास करते है और अप्रैल तक ये भारत के दक्षिणी और उत्तरी पूर्वी भाग में रहते हैं। अपनी विशेष लम्बी ध्वनि चीक-चीक से यह पहचाना जाता है। इसकी विशेषता यह है कि यह कई अन्य पक्षियों की आवाज की भी नकल कर लेता है।इस पक्षी का नाम प्रमुख प्राणी विज्ञानी एडवर्ड ब्लीथ के नाम पर दिया गया था। ये अपना प्रजननकाल यूरोप, कजाकिस्तान, मंगोलिया, अफगानिस्तान, पाकिस्तान में व्यतीत करता है और इसी मार्ग से इनका प्रवास भी भारत में होता है। यह मध्यम आकार लगभग 12 से 14 सेमी तथा वयस्क का रंग ऊपर की और हल्का भूरा व नीचे की तरफ हल्का पीला होता है। ब्लीथ रिड वार्बलर का माथा थोड़ा चपटा होता है और चोंच कम मजबूत और नुकीला होती है।

साल में दो बार बदलता है अपने पंख, कीट है इसका मुख्य भोजन ये झाड़ियों के नीचे प्रायः कीटों को अपना भोजन बनाता है लेकिन छोटी बेरी और बीजों को भी खा लेता है। औसत 11 से 12 ग्राम वज़नी यह पक्षी अपने छोटे पंखों के इस्तेमाल से लंबी दूरी तय करने के लिए जाना जाता है जो इसे विशिष्ट बनाता है। इसे आमतौर पर छोटे आकार और वर्ष में दो बार पंख बदलने के कारण पहचानना मुश्किल होता है। प्रजनन के मौसम में इसकी सबसे अच्छी पहचान विशेष गीत है, जो धीमी गति से और दोहराव वाला होता है। अन्य पक्षियों की बहुत अधिक नकल के साथ पेड़ों पर बैठकर ही ध्वनि निकालता है।

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