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  • The Villagers, Who Became The Support Of The Beleaguered Cow, Used To Bring Water From The Bottom Of The Mountain, Now They Kept Stitches And Made Permanent Arrangements, Also Got Fodder By Public Assistance

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यहां के लोग सच्चे गोसेवक:बेजुबान गोवंश का सहारा बने ग्रामीण, पहले पहाड़ के नीचे से पानी लाकर पिलाते थे, अब टांकें रखवाकर स्थाई व्यवस्था की, जनसहयोग से चारा भी डलवाया

दौसा15 दिन पहले
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टांकें से पानी पीता गोवंश - Dainik Bhaskar
टांकें से पानी पीता गोवंश

कोरोना काल में लोग अपनी जान बचाने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं। ऐसे में बेजुबान गोवंश काल का ग्रास न बने इसके लिए समाज की संवेदनाएं भी मोर्चा संभाल रही हैं। यह संवेदना मनुष्य क्या, पशु-पक्षियों के संदर्भ में भी साक्षात हो रही हैं। कोरोना संक्रमण के चलते सरकार द्वारा लगाए गए लॉकडाउन के कारण लोग घरों में कैद होकर रह गए हैं। ऐसे में गर्मी के मौसम में पहाड़ी क्षेत्र में रहने वाले बेसहारा गोवंश के सामने चारा व पानी की भारी समस्या हो गई है। इस संकट काल में स्थानीय लोगों ने गोवंश को चारा उपलब्ध करवाने का मोर्चा संभाल लिया है।

पहाड पर चारा खाता गोवंश
पहाड पर चारा खाता गोवंश

दौसा, करौली व सवाईमाधोपुर जिले की सीमा पर पहाड़ी क्षेत्र में बसे डूंगरपट्टी कोचर व उसके आसपास के एक दर्जन गांवों में बड़ी संख्या में गोवंश विचरण करता है। बारिश के दिनों में यह गोवंश पास के ही जोहड़ आदि में प्यास बुझाकर जंगल में चारा खाकर अपना पोषण करती है, लेकिन गर्मी के मौसम में जोहड़ का पानी सूखने के कारण पानी व चारे की किल्लत पैदा हो जाती है। इससे प्रतिवर्ष सैकड़ों गोवंश काल का ग्रास बन जाती हैं। ऐसे में मोरध्वज गोसेवा समिति ने गोवंश के संरक्षण का बीड़ा उठाया है।

पानी के टांकें रखवाकर चारा डलवाया
समिति द्वारा गोवंश की प्यास बुझाने के लिए सीमेंट के दो दर्जन टांके रखे गए हैं। जिनमें रोजाना टैंकर द्वारा पानी भरा जाता है। इन टांकों के पास भी चारे के लिए भूसा डलवाया जा रहा है। जिससे कि गोवंश को अकाल मृत्यु से बचाया जा सके। समिति द्वारा वर्ष 2016 में शुरू किए गए इस प्रयास से आज आसपास के गांवों के अनेकों लोग गोसेवा से जुड़ गए हैं।

गोवंश की संभाल करते ग्रामीण
गोवंश की संभाल करते ग्रामीण

गोसेवा समिति से जुड़े महेश ने बताया कि पहाडी पर बसी कोचर ग्राम पंचायत जो बामनवास सवाई माधोपुर में, धोलादाता गांव गढमोरा करौली में तथा निमाज गांव दौसा जिले की सीमा में है। यहां के लोग सच्चे गोसेवक हैं। पहले जब गांव में बिजली नहीं थी तब ये लोग पहाडी के नीचे से पानी लाकर भी गोवंश को पिलाते थे।

प्रशासन को ध्यान देना चाहिए
स्थानीय युवक हरकेश कहना है कि बेजुबान गोवंश की देखरेख करना ही सच्ची मानवता है। आज गोवंश के नाम पर लाखों रुपये का अनुदान लेकर गोशालाएं संचालित हो रही हैं, लेकिन यहां बड़ी तादात में गोवंश चारा-पानी के अभाव में बेसहारा घूम रहा है। प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए।

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