सिंचाई का संकट:इस बार 20.40% ज्यादा बारिश, फिर भी 18 में से 17 बांध रीते, अब सिंचाई का संकट

दौसा2 महीने पहले
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  • जिले में इस बार सिर्फ माेरेल बांध से ही हो पाएगी रबी की सिंचाई, 94.86% बारिश हुई है

सतीश सिंह | जिले में इस बार 613.76 मिमी औसत बारिश हुई है। जो कि पिछले साल से 20.40 % ज्यादा है। इसके बावजूद जिले के 18 में से 17 बांधों का कंठ सूखा ही रह गया। इस बार सिर्फ एकमात्र माेरेल बांध से ही रबी फसल की सिंचाई हो सकेगी।जिले में पूरे सीजन में 647 मिमी सामान्य बारिश मानी जाती है। इस बार 613.76 (94.86%) औसत बारिश हुई है।

जबकि पिछले साल 455.53 मिमी औसत बारिश हुई थी। इस बार अच्छी बारिश होने के बावजूद अधिकांश बांध खाली हैं। हालांकि अगस्त माह में जल संसाधन विभाग के अधीन 18 में से 12 बांधों में पानी की आवक हुई थी, लेकिन अब 9 बांधों में आंशिक पानी ही है, जो अब मानसून विदाई के बाद धीरे-धीरे सूख रहा है। इनमें से माेरेल बांध में ही सिंचाई लायक पानी है। अन्य बांधों में बहुत कम पानी है। सैंथल सागर में 0.9, सिनाेली में 2.3, झिलमिली में 3.3, गेटोलाव में 1.3, चांदराना में 2, कालाखाे में 1.8, माधोसागर में 3.2 व जगरामपुरा में 1.6 फुट पानी है। 30 फुट भराव क्षमता वाले माेरेल बांध में 19.4 फुट पानी है। ऐसे में माेरेल बांध से ही रबी फसल में सिंचाई हो सकेगी। पिछले साल 74.46% बारिश हुई थी, यानी इस बार पिछले साल से 20.40 प्रतिशत बारिश अधिक हुई है।

जिले में 18 बांधों से 26 हजार हैक्टेेयर में होती है सिंचाई : जिले में जल संसाधन विभाग के 18 बांधों के अधीन 26 हजार 473 हैैक्टेयर सिंचित क्षेत्र है। इनमें माेरेल बांध से दौसा व सवाई में 11 हजार 963 हेक्टेयर में सिंचाई होती है। इस बार माेरेल बांध में 19.4 फुट पानी है। इस बार रबी फसल में माेरेल बांध से सिंचाई हो सकेगी। गत वर्ष भी एकमात्र माेरेल से ही सिंचाई हुई थी।

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