86 दिन के अथक प्रयासों से बचाई जिदंगी:6 महीने में करवानी पड़ी डिलीवरी, महज 850 ग्राम की पैदा हुई थी नवजात

हिण्डौन सिटी14 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
डॉक्टर्स की गोद में बच्ची। - Dainik Bhaskar
डॉक्टर्स की गोद में बच्ची।

हिण्डौन सिटी में मरणासन्न पैदा हुई एक नवजात बच्ची को स्थानीय जिला अस्पताल की स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) के डॉक्टरों व चिकित्साकर्मियों के अथक प्रयासों से नया जीवन मिल सका है। बालिका जब पैदा हुई, तब उसका वजन महज 850 ग्राम था। 86 दिन तक डॉक्टरों की सघन देखरेख और उपचार के बाद बालिका का जन्म 1420 ग्राम हो गया। गुरुवार को पीएमओ ने बच्ची को पूरी तरह स्वस्थ बताने पर छुट्टी दे परिजनों के सुपुर्द कर दिया।

जिला अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. जयवीर बेनीवाल ने बताया कि ढिंढोरा गांव निवासी राजवीर की पत्नी प्रियंका का एक निजी अस्पताल में प्रसव हुआ था। प्रसूता को दौरे आने के कारण 6 महीने में ही ऑपरेशन कर प्रसव करना पड़ा। यहीं वजह रही कि पैदा हुई बच्ची का वजन महज 850 ग्राम था। ऐसे में मरणासन्न अवस्था में निजी अस्पताल से नवजात बालिका को सरकारी जिला अस्पताल की एसएनसीयू में रेफर कर दिया गया। डॉ. बेनीवाल ने बताया कि 9 माह में जन्म लेने वाले स्वस्थ शिशु का वजन ढाई किलो तक होता है, लेकिन एक सितंबर 2021 को भर्ती की गई उक्त बालिका का वजन बढ़ाने के लिए डॉक्टरों व चिकित्साकर्मियों को अथक प्रयास करने पड़े। इसमें बालिका की मां एवं अन्य परिजनों ने भी पूरा सहयोग किया। डॉ. बेनीवाल ने बताया कि भर्ती होने के बाद नवजात शिशु का वजन 650 ग्राम ही रह गया था, लेकिन बाद में री-कवर होकर 86 दिन में नवजात का वजन 1420 ग्राम हो गया। इन 86 दिनों में कंगारू मदर की भांति शिशु को रखकर नली के माध्यम से दूध पिलाया गया और आईवी एंटीबायोटिक एवं आईवी फ्लूड दिया गया।

तब चेहरा मायूस था, अब चेहरे पर खुशी
850 ग्राम वजन की नवजात बच्ची को जब एक सितंबर को अस्पताल की एसएनसीयू में लाया गया, तब सभी परिजन के चेहरा मायूस था। सभी को डर था कि बालिका स्वस्थ हो पाएगी या नहीं। 86 दिन बाद जब 1420 ग्राम वजन की बच्ची को स्वस्थ अवस्था में परिजन ले गए तो उनके चेहरे पर खुशी देखने को मिल रही थी। लाडो की मां प्रियंका व पिता राजवीर सहित अन्य परिजनों ने पीएमओ एवं अन्य सभी डॉक्टरों को धन्यवाद दिया।