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इंद्रदेव मेहरबान:करौली में 7 दिन बाद 5 घंटे में हुई 10 मिमी बारिश, पर्याप्त नमी से सरसों की बुवाई में होगा फायदा

करौली6 दिन पहले
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जिला मुख्यालय पर सात दिन बाद शनिवार आधी रात इंद्रदेव मेहरबान हुए। रविवार सुबह पांच बजे तक 5 घंटे के भीतर करौली में 10 मिमी बारिश हुई। जबकि, सर्वाधिक बारिश मंडरायल में 23 और नादौती परिक्षेत्र में 16 मिमी वर्षा रिकॉर्ड दर्ज की गई। यही वजह है कि मंडरायल-करणपुर डांग क्षेत्र के नदी-नालों में वर्षा जल की अच्छी आवक होने से शनिवार को कई मार्ग बाधित हो गए और लोगों को परेशानी भी उठानी पड़ी। लिहाजा, खरीफ फसल के लिए यह बारिश फायदेमंद है,मगर अगेती तिल-बाजरे की फसल के लिए नुकसान की आशंका भी है। हालांकि, रबी फसल के लिए सरसों की बुवाई करने वाले किसानों को खेत में पर्याप्त नमी मिलने से बड़ा फायदा होगा।

जल संसाधन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार इस मानसून सीजन में अब तक सर्वाधिक बारिश श्रीमहावीरजी में 1073, कालीसिल में 1061 होने से क्षेत्र के लोगों के चेहरों पर खुशी है।वहीं सबसे कम टोडाभीम ब्लॉक में महज 447 मिमी बारिश होने से क्षेत्र के किसान काफी चिंतित भी हैं। खास यह है कि जिले के कुल 13 बांधों में से अभी भी पांच बांधों की प्यास भी नहीं बुझ सकी है, जबकि पांचना बांध से पांच बार गेट खोलकर करीब 1 हजार एमसीएफटी पानी की निकासी की जा चुकी है। इसके बावजूद पांचना बांध लबालब है। रीते पांच बांधों में बांधवा, बैरूंडा, मोहनपुरा, न्यूटेंक महस्वा व खिरखिरी शामिल हैं। जबकि, पांचना, कालीसिल व जगर बांधों में पिछले साल के मुकाबले इस बार वर्षा जल की अच्छी आवक होने से भराव ठीक है।

जल संसाधन विभाग के सहायक अभियंता सुशील गुर्जर ने बताया कि करौली में 10 मिमी बारिश रिकॉर्ड दर्ज की गई,यानी पांच घंटे के भीतर प्रतिघंटा एक मिमी बारिश हुई है। इससे पहले 3 सितंबर को 4 मिमी बारिश हुई थी,उसके बाद शनिवार रात को बारिश हुई है। इस बारिश को लेकर कृषि विभाग के उप निदेशक रामलाल जाट का कहना है कि अगेती फसल के लिए नुकसान है और पछेती खरीफ में लाभकारी,दूसरा सरसों की बुआई में किसानों को फायदा होगा। हालांकि, फड़का कीट का अंतिम समय चल रहा है,ऐसे में बारिश को ज्यादा कोई असर नहीं पडेगा।अगेती फसल में नुकसान की आशंकाकिसान रामलखन मीना, हरिसिंह, रामभरोसी, भानुप्रतापसिंह, ओमप्रकाश जाट आदि के अनुसार इस समय खरीफ फसल में बाजरे की बालियां पकनी हुई हैं और क्षेत्र में कटाई कार्य शुरू होगा। वहीं फड़का कीट से ज्यादातर बाजरे के डंठल ही रह गए हैं,इससे उपज के साथ ही चारे की गुणवत्ता में भी गिरावट आएगी।

बहरहाल, अगेती बाजरे व तिल की फसल के लिए यह बारिश नुकसानदायी है। जबकि, पछेती खेती के साथ ही सरसों की बुआई के लिए यह वर्षा किसानों को फायदेमंद भी रहेगी। कुडगांव क्षेत्र के किसान गोपाल शर्मा, प्रेमसिंह जाट, उमरावसिंह, खेमचंद मंडावरा, हरिसिंह डिकोली आदि ने बताया कि पकनी फसल पर बारिश होने से उपज का दाना काला पडने का खतरा है और यदि लगातार तीन-चार दिन यह बारिश होती रही तो समय पर कटाई नहीं होने से फसल में खराबे की आशंका भी रहेगी।

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