पेयजल सकंट:चंबल परियोजना के 3 पंपसेट खराब, जिले के 422 गांवों में पानी सप्लाई प्रभावित

करौली2 महीने पहले
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गंगापुर सिटी। चंबल परियोजना का इंटेक वेल। - Dainik Bhaskar
गंगापुर सिटी। चंबल परियोजना का इंटेक वेल।
  • 3 साल से बंद कर दिया कंपनी ने काम, देखरेख के बिना यहां से भी पानी की आपूर्ति नहीं

शहर में इन दिनों पीने के पानी का संकट गहराया हुआ है। कई इलाकों तो हालत यह है कि सप्ताह या दो सप्ताह से पानी नहीं आ रहा है। कारण चंबल परियोजना के 4 में से 3 पंपसेट खराब हो गए हैं, जबकि चौथा भी कब खराब हो जाए, कह नहीं सकते। चंबल से पानी नहीं आने के कारण शहर में पानी की यह हालत हो रही है। मामले का चौंकाने वाला पहलू यह भी है कि चंबल का पानी आने से पहले शहर में पानी की आपूर्ति के लिए करीब 50 से ज्यादा बोरिंग थीं लेकिन जब से चंबल से पानी आया तो जलदाय विभाग ने इन बोरिंगों की मरम्मत और देखरेख करना बंद कर दिया, अब जब चंबल से पानी नहीं आ रहा है तो विभाग ने पुरानी बोरिंगों को संभाला लेकिन वहां भी देखरेख के अभाव में ज्यादातर बोरिंगों से पानी का उत्पादन नहीं हो पा रहा है।

शहर में आबादी को देखते हुए प्रतिदिन करीब 130 लाख लीटर पानी की आवश्यकता है। इसके विपरीत चंबल से पानी की आपूर्ति बंद हो गई, ऐसे में जलापूर्ति ठप पड़ी है। विभाग ने अब सीडब्ल्यूआर में टैंकरों से पानी डालने और जलापूर्ति का निर्णय लिया है। गंगापुर ही नहीं बल्कि नादौती, वजीरपुर क्षेत्र के अलावा सवाई माधोपुर को भी चंबल से पानी की आपूर्ति किया जाना शामिल है यहां तो गंगापुर में ही पानी के लाले पड़ गए, ऐसे में नादौती और दूसरी जगहों को तो पानी मिलना दूर की कौडी है।

चंबल से पानी मिलना बंद होने से परेशानी हो रही

चंबल परियोजना का प्रोजेक्ट 16 एमएलडी का है और शुरुआत में इससे 12 से 13 एमएलडी पानी देने की क्षमता थी। परियोजना से शुरु में गंगापुर को 5 एमएलडी पानी मिला लेकिन वर्तमान में हालत यह है कि विगत एक वर्ष में ढाई से 3 एमएलडी और अब तो पूरी तरह से पानी मिलना बंद हो गया। वहीं चंबल के पानी आने से पूर्व शहर में जलापूर्ति के लिए विभाग के पास पूर्व करीब 50 से 55 बोरिंग निजी स्त्रोत के रूप में थी, जिससे शहर को जलापूर्ति होती, फिर चंबल का पानी आया और धीरे-धीरे निजी स्त्रोतों को विभाग भूल गया, अब तो विभाग को यह भी पता नहीं की कौन-कौनसी जगह कितनी बोरिंग है और इनमें कितनी सही और कितनी खराब है, विभाग अब बोरिंगों को ढूंढ रहा है।10 में से केवल 2 ही फिल्टर चालूचंबल परियोजना की यदि बात करें तो परियोजना में 4 पंपसेट अस्थाई लगे है। साथ ही 10 फिल्टर लगाए गए है लेकिन हालत यह है कि वर्तमान में 4 में से 3 पंपसेट खराब है, वहीं 10 में सेकेवल 2 ही फिल्टर चालू है।

तीन साल से भुगतान का विवाद चंबल परियोजना के तहत संबंधित कंपनी एसपीएमएल के द्वारा विगत 3 वर्ष से काम ही बंद कर दिया। सूत्रों की माने तो कंपनी और सरकार के बीच भुगतान और प्राइज वेरिएशन को लेकर काफी समय से विवाद चल रहा है। विवाद का हल निकालने के लिए कई बार बैठक हुई, उच्च स्तर पर वार्ता के बावजूद आज तक हल नहीं निकल पाया चंबल नदी पर मंडरायल के पास बनाए गए इंटेकवेल पर गत वर्ष की तरह इस वर्ष भी बारिश के चलते नदी में पानी का बहाव और बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई।

हालांकि गत वर्ष तो इस वर्ष से भी बुरे हालात थे, बाढ़ के कारण पंपसेट सहित पंप हाउस ही मिट्टी में धंस गए और पूरा सिस्टम जाम हो गया, जेसीबी और क्रेन से पंपसेटों को बाहर निकाला और बाद मेंहमदाबाद में मरम्मत करवाई, तब पंप शुरु हुए।गंगापुर में जल्द होगी निर्बाध जलापूर्तिएडीएम नवरत्न कोली ने कहा कि पंप हाउसों की सफाई करवा दी है, मंडरायल में भी 2 पंप हाउस सही कर चालू करवा दिए है, चंबल का पानी आ गया है, एक-दो दिन में जलापूर्ति शुरू कर दी जाएगी और इसके बाद गंगापुर में पानी की समस्या का समाधान हो जाएगा।

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