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  • 8 Months Pregnant, Was Not Ready To Enroll After Seeing Positive Report, There Was Challenge Even In Front Of The Doctor, If He Did Not Lose Courage, He Won The Battle

जन संकल्प से हारेगा कोरोना:8 माह की गर्भवती थी पॉजिटिव रिपोर्ट देख भर्ती करने को कोई तैयार नहीं था, डॉक्टर के सामने भी चुनौती थी, हिम्मत नहीं हारी तो जीत ली जंग

करौली6 महीने पहले
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  • गंभीर कोरोना संक्रमण होने के बावजूद अपनी इच्छाशक्ति से कोरोना को हराने वालों की जांबाज कहानियां, पढ़िए आज पहली कड़ी- सांस लेने में दिक्कत हो रही थी, ऑक्सीजन लेवल 80 पहुंच गया था, मगर हार नहीं मानी...

संगीता सारस्वत | कोरोना वॉरियरकराैली. मन के हारे हार हैं,मन के जीते जीत...। कोरोना से लड़ाई में जीत के लिए इन दिनों यह “अचूक मंत्र’’ किसी दवा से कम नहीं है। यही मंत्र कोरोना संक्रमित मरीजों को दृढ़ इच्छाशक्ति से कोविड-19 वायरस से जंग जीतने में सार्थक भी साबित हो रहा है। आठ माह की प्रेग्नेंट अवस्था में भी कोरोना को हराने की पूरी कहानी बता रही हैं शहर की विवेक विहार कॉलोनी की रहने वाली संगीता सारस्वत...।

मुझे बहुत ज्यादा घबराहट और चलने-फिरने में भी परेशानी के साथ ही सांस लेने में भी बहुत दिक्कत हो रही थी। मेरी तबीयत पिछले महीनेभर से नासाज थी तो पति के साथ जांच करवाई तो मैं कोरोना पॉजिटिव निकली। संक्रमित होने का पता लगते ही पूरे परिवार वाले डर गए, क्योंकि मैं गर्भवती भी हूं। हालांकि, अंदर मन में तो मेरे भी डर पनपने लग गया और माइंड में कई तरह के नकारात्मक विचार भी आने लगे। फिर, मैंने खुद को ही संभालते हुए हौंसले से काम लिया और सोचा कि जब तक मैं खुद निगेटिव नहीं हो जाऊंगी,तब तक निगेटिव विचारों को भी मन में नहीं आने देना है। हर समय,हर घडी दिमाग में एक ही बात चलती रही कि कुछ भी हो जाए मुझे इस कोरोना को हराना ही है।मुझे करौली के ही एक-दो अस्पतालों में ले जाया गया तो जांच व एक्सरे आदि करके चिकित्सकों ने जयपुर के लिए रैफर कर दिया, हमने जयपुर में संपर्क किया तो गर्भवती हालत में कोई भी भर्ती करने तक को तैयार नहीं हुआ।

आखिर में छह दिन पहले ही मुझे गुलाब बाग करौली के एस्सार हॉस्पिटल के कोविड वार्ड में भर्ती करवाया गया। इस दौरान मेरो ऑक्सीजन लेवल भी ऑक्सीजन सेचुरेशन 80 से नीचे तक कम है गयौ, गर्भवती होने की स्थिति में डॉक्टर के सामने भी कई कठिनाइयां थीं कि मुझे सभी दवाइयां दिया जाना संभव नहीं बताया। फिर भी डॉक्टर ने पूरी हिम्मत से काम लियो और मौकूं व मेरे घरवारेन से कही कि डरने की कतईं जरूरत नहीं है, आप धैर्य और विश्वास रखें।भर्ती के दौरान ऑक्सीजन लेवल कई बार कम हुआ तो चिकित्सक व नर्सिंगकर्मियों ने लगातार मेरा ध्यान रखते हुए मॉनिटरिंग भी की।

जब सांस लेने में सहूलियत हुई और ऑक्सीजन लेवल बढकर 98 के साथ ही हालत स्थिर हुई तो सभी ने राहत की सांस ली। कोरोना को लेकर जो भी उपचार डॉक्टरों ने दिया,मैंने उन सभी का पालन किया। मैंने पॉजिटिविटी, आत्मविश्वास के साथ धैर्य व संयम से काम लिया और इसी के चलते पांच दिन ऑक्सीजन पर रहने के छठवें दिन ही मुझे एस्सार के निदेशक डॉ.जे.पी.गुप्ता ने छुट्‌टी भी दे दी।(जैसा कि सुखदेव डागुर को बताया)

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