कोरोना का कहर:जिला अस्पताल में अप्रैल में मौतों का आंकड़ा दुगुना, श्मशान में अंतिम संस्कार की जगह नहीं

करौली6 महीने पहले
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  • आरटीपीसीआर रिपोर्ट में पॉजिटिव, मौत के बाद सामान्य मरीज माने जा रहे

उमेश शर्मा | प्रदेश भर में कोरोना की दूसरी लहर का तांडव हर जगह दिखाई दे रहा है। करौली जिले में भी कोरोना की दूसरी लहर ने अपनों को अपनों से अलग कर दिया है। हालत यह है कि जिला मुख्यालय के श्मशान घाटों में अब चिता जलाने तक को जगह नहीं है तो कब्रिस्तान में रोजाना किसी मृतक को दफनाया जा रहा है। ऐसे में अंतेष्टि में केवल परिजन ही शामिल हो रहे है तो कई बार तो परिजन भी अपनों को मुखाग्नि देने में भयभीत है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय जिले में अब तक 35 कोरोना पॉजिटिव की मौतों की पुष्टि कर रहा है और अप्रेल 2021 में मृतकों की संख्या 13 बताई जा रही है। जो कि चौकाने वाले आंकडे है। ऐसे में किसी के पास जानकारी नहीं कि जिले में अब तक कितने लोगों की मौत हो चुकी है और उनका कारण क्या रहा है। हालांकि जानकारों के अनुसार कोरोना संक्रमण से होने वाली मौतों का आंकड़ों जिले में सैकड़ों की संख्या को पार कर गया है, फिर चाहे मरीज आरटीपीसीआर पॉजिटिव हो या एचआरसीटी पॉजिटिव।

रोज एक-दो गाडी लकड़ी की जरूरत, कंधा देने के लिए लोग भी नहीं

जिला अस्पताल में अप्रैल माह के 28 दिनों में ही मरने वालों की संख्या 69 पहुंच गई है। जबकि जनवरी 2020 में जिला अस्पताल में मरने वालों की संख्या 27, फरवरी में 24, मार्च में 29, अप्रेल 2020 में 25, मई में 23, जून में 22, जुलाई में 19, अगस्त में 21, सितम्बर में 20, अक्टूबर में 23, नवम्बर में 36, दिसम्बर में 30, जनवरी 2021 में 23, फरवरी 2021 में 18, मार्च 2021 में 26 तथा 28 अप्रेल 2021 में 69 हो गई। इस अप्रेल माह में ही 35 लोगों की मौत श्वांस संबंधी बीमारियों से हुई है। जिसमें भी 14 अप्रेल 2021 तक मरने वालों की संख्या महज 18 थी लेकिन 15 से 28 अप्रेल तक 14 दिन में जिला अस्पताल में ही 51 लोगों की मौत हो गई।

जिला मुख्यालय पर मासलपुर दरवाजा, रणगवां तालाब, बरखेडा नदी, पर मुख्यतया श्मशान घाट बने हुए है। जिसमें भी मासलपुर दरवाजा स्थित मोक्षधाम में ही अधिकांशतया लोग शव की अंतेष्टि के लिए लाते है। मासलपुर दरवाजा स्थित श्मशान घाट में काम करने वाले जाहिद खान ने बताया कि इस अप्रेल माह में सारे रिकॉर्ड तोड़ कर रख दिए है। हालत यह है कि आज तक श्मशान घाट में बने 8 प्लेटफॉर्म कभी भरे नहीं रहे लेकिन पिछले 7 दिन से सभी प्लेटफॉर्म भरे हुए है। हमें भी रोजाना एक या दो गाडी लकड़ी की मंगानी पड़ रही है। शवों के साथ महज 5 से 7 लोग ही आ रहे है तो कईयों के साथ तो चार कंधा लगने वाले लोग भी नहीं मिलते है।

आरटीपीसीआर रिपोर्ट पर मरने वाला पॉजिटिव विभागीय जानकारी के अनुसार जिले में आरटीपीसीआर रिपोर्ट के आधार पर पॉजिटिव आने वाले व्यक्ति को पॉजिटिव माना जा रहा है और उसके मौत के बाद उसे पॉजिटिव की गिनती में शामिल किया जाता है। जिसके अनुसार जिले में अब तक अप्रैल माह में 13 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं दूसरी और सीटी स्कैन में फेफड़ों में इन्फेक्शन होने पर अर्थात एचआरसीटी की जांच के अनुसार जांच में गड़बड़ी आने पर उसे चिकित्सा विभाग एचआरसीटी के अनुसार पॉजिटिव तो मानता है लेकिन ऐसे किसी व्यक्ति की मृत्यु होने के बाद उसे पॉजिटिव की लिस्ट में शामिल नहीं किया जाता है। जिला अस्पताल से प्राप्त रिकॉर्ड के अनुसार ही अप्रेल माह में कोविड वार्ड बनने पर जिला अस्पताल में 117 लोगों को कोरोना वार्ड में भर्ती कराया गया है। जिनमें से अब तक आरटीपीसीआर की रिपोर्ट के अनुसार 1 तथा एचआरसीटी की रिपोर्ट के अनुसार 4 लोगों की मौत हो गई है।

पॉजिटिव के संदेह के चलते लोग अंतेष्टि में नहीं आ रहे इन दिनों मासलपुर दरवाजा स्थिति मोक्षधाम में ही 12 से अधिक पॉजिटिव मरीजों की अंतेष्टि की जा चुकी है। वहीं प्लेटफॉर्म खाली नहीं होने के कारण दूसरे दिन ही तीए की रस्म कराई जा रही है। कोरोना पॉजिटिव के संदेह के चलते लोग अंतेष्टि में नहीं आ रहे है, यहां तक की परिजन भी दाह संस्कार में शव को दूर से ही देख रहे है और आंसू बहा रहे है। हमने अब तक 2 लावारिसों के दाह संस्कार किए है और उनकी अस्थियों को गंगा जी भी पहुंचाया है।-बबलू शुक्ला, महामंत्री मोक्षधामसेवा समिति करौली

आरटीपीसीआर कन्फर्म रिपोर्ट लेकिन एचआरसीटी कन्फर्म रिपोर्ट नहींराज्य सरकार के निर्देशानुसार आरटीपीसीआर रिपोर्ट के आधार पर अगर किसी की मृत्यु होती है तो उसे पॉजिटिव माना जाता है। आरटीपीसीआर कन्फर्म रिपोर्ट है जबकि एचआरसीटी कन्फर्म रिपोर्ट नहीं है। हालांकि एचआरसीटी के तहत मरीजों को पॉजिटिव मान कर उनका उपचार किया जा रहा है।-डॉ. दिनेश मीना, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जिला करौली

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