500 वर्ष पुराना माता का मंदिर:600 फीट ऊंची पहाड़ी से रक्षा करती है दुगाहा माता, 500 वर्ष पुराना है माता का मंदिर

करौलीएक महीने पहले
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  • श्रद्धालुओं ने 80 वर्ष पूर्व चारों तरफ परकोटा बनाकर पक्का मंदिर बनवाया था

यह तस्वीर है गेरई गांव की 600 फीट ऊंची पहाड़ी की चोटी पर विराजमान दुगाहा देवी का है यह मंदिर 500 वर्ष पुराना बताया गया है। मंदिर के पुजारी मांगी लाल सहित डॉ रामराज मीणा और बुजुर्ग भूदर पटेल बताते हैं कि गेरई गांव को 700 वर्ष पूर्व का धाकड़ लोधा राजपूत समाज के पूर्वजों का होना बताया गया है। गांव में अकाल मृत्यु के समय स्वयं प्रकट हुई पहाड़ की चोटी पर दुगाहा देवी के मंदिर की स्थापना संवत 1598 में धाकड़ लोधा राजपूत समाज के पूर्वजों द्वारा एक पाटोरनुमा मंदिर में करवाना बताया गया है ग्रामीणों द्वारा 80 वर्ष पूर्व चारों तरफ परकोटा बनाकर पक्का मंदिर का निर्माण करवाया गया।

मान्यता है कि पहाड़ी की ऊंची चोटी से आस पास वाले 12 गावों के ग्रामीणों की बाहरी प्रकोप से रक्षा करती है पहाड़ी पर खड़े होकर देखने पर करौली एवं सवाई माधोपुर जिलों के सैकड़ों गांव नजर आते हैं। ग्रामीण पूर्व में मंदिर पर मानव एवं पशु बलि प्रथा के बारे में बताते कि शारदीय नवरात्र समापन के बाद विजयदशमी के दिवस पर भक्तगण मां को प्रसन्न करने के लिए मानव एवं पशु बलि की भेंट प्रथा की बात कही लेकिन 150 वर्ष पूर्व विजयदशमी के दिवस पर देवी मां को बलि देने के लिए किसी गांव से दो बच्चों को लाया गया तभी परिजनों को बच्चों के गायब होने का पता चला तो पूरा गांव मंदिर पर पहुंच गया दोनों गावो के बीच होने वाले झगड़े से बचाव के लिए देवी मां ने चमत्कार दिखाते हुए दोनों बच्चों को भेड़ के उन्ने बना दिए और मां के चमत्कार से दोनों बच्चे सुरक्षित अपनी मां के पास पहुंचा दिए तभी से मंदिर पर दी जाने वाली मानव बलि कुप्रथा समाप्त हुई इसके बाद कुछ समय के लिए पशु बलि प्रथा चली लेकिन ग्रामीणों ने मां के मंदिर पर आयोजित धार्मिक पर्व पर किसी जीव हत्या को अधर्म मानते हुए हैं 12 गांव के पंच पटेलों द्वारा देवी मां से अर्जी कर 100 वर्ष पूर्व पंचायत कर पशु बलि कुप्रथा समाप्त कर दिया जाने के बारे में बताया है। शारदीय नवरात्रों में अखंड ज्योति के साथ रामायण चलती है विजयदशमी के अलावा चैत्र एवं भादवा सुदी अष्टमी माह में मेला एवं रात्रि को जागरण का आयोजन किया जाता है जिसमें गांव सहित आसपास 12 गांवों के श्रद्धालु प्रसादी चढ़ाकर दर्शन लाभ उठाते हैं ।

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