करणपुर सीएचसी के डॉक्टर का जज्बा:8 दिन से बिजली बंद,भर्ती नवजात को बचाने 35 किमी दूर से डीजल लाए, जेनरेटर से वार्मर मशीन चलाकर बचाई जान

करौली2 महीने पहले
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  • नवजात को रेफर किए बिना किया इलाज, क्षेत्र में बंद है बिजली

मुकेश गुप्ता | डाॅक्टराें काे भगवान का दर्जा क्यों दिया जाता है, ये घटना उसी का उदाहरण है। मामला करणपुर सीएचसी का है। करणपुर सीएचसी केंद्र पर तीन दिन पहले चौरघान गांव निवासी हेमा देवी पत्नी भूरसिह वैरवा ने बच्चे को जन्म दिया। बच्चे का वजन कम था और जन्म के बाद ही वह निमोनिया की चपेट में आ गया। बच्चे की तबीयत काफी बिगड़ गई। डॉक्टरों के पास विकल्प था कि बच्चे को तुरंत रैफर कर देते, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। बच्चे को इलाज के लिए रेडियोवार्मर मशीन में रखना था लेकिन इलाके में बाढ़ के कारण 8 दिन से बिजली गुल है।

ऐसे में चिकित्सा अधिकारी डाॅक्टर महेश मीना ने तुरंत सजगता दिखाई और 35 किलोमीटर दूर पेट्रोल पंप से डीजल मंगाकर जनरेटर चलाया। 16 घंटे तक नवजात को ऑक्सीजन व रेडियोवार्मर मशीन में रखा। करणपुर चिकित्सा प्रभारी के नेतृत्व में डाॅक्टर अमरसिंह मीना, अतुल कुमार, लक्ष्मीकांत शर्मा, मेलनर्स रामसिंह मीना, रमेश मीना ने बच्चे का इलाज किया। बच्चा अब स्वस्थ और ऑक्सीजन हटा लिया गया है। मां और बच्चा दोनों अस्पताल में भर्ती हैं।

निमोनिया से पीड़ित है बच्चा, वजन भी कम है

चिकित्सा प्रभारी डा.महेश मीना ने बताया कि शिशु को जन्म से ही निमोनिया था और वजन भी कम था। हमने बच्चे को बैग एंड मास्क वेंटीलेशन दिया। जिसके थोड़ी देर बाद बच्चे ने रोना शुरू किया। उसके बाद भी बच्चे का सांस सही नहीं चल रहा था। इस पर बच्चे को कृत्रिम रूप से सांस दी गई। एक-दो घंटे के बाद जब बच्चे की सांस नियंत्रित हुई तो बाईपेप के जरिए ऑक्सीजन दी गई। बच्चे को शुरू से क्लोज वाइटल मॉनिटर में रखा गया। अभी बच्चे को कंगारू मदर केयर दी जा रही है।

10 लाख की वैक्सीन भी खराब होने से बचाई करणपुर में चंबल के उफान के कारण बाढ़ के हालात हैं। 8 दिन से बिजली गुल है और कई रास्ते भी बंद हैं। पेट्रोल पंप भी यहां से 35 किमी दूर है। अस्पताल में वहीं से डीजल मंगाकर जनरेटर चलाना पड़ता है। अस्पताल के उपकरण बिना बिजली के बंद रहते हैं। आठ दिन से अस्पताल में बिजली नहीं होने से 10 लाख की वैक्सीन भी खराब होने की आशंका बढ़ गई थी। चिकित्सा अधिकारी ने वैक्सीन पहले ही कैलादेवी अस्पताल भिजवा दी।

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