मंडी सूनी:करौली मंडी से किसानों का मोह भंग, सीजन में भी रोज 200 कट्टे बाजरा व 40 कट्टे तिल ही आ रही

करौलीएक महीने पहले
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करौली | कृषि उपज मंडी में कुछ ही किसान फसल लेकर आते हैं। बोली लगाते व्यापारी। - Dainik Bhaskar
करौली | कृषि उपज मंडी में कुछ ही किसान फसल लेकर आते हैं। बोली लगाते व्यापारी।
  • करौली क्षेत्र की उपज गंगापुर-हिंडौन मंडी में ले जा रहे किसान, करौली मंडी में 50 में से 6 व्यापारी फर्में ही रह गईं

इस समय प्रदेश की अनाज मंडियों में बाजरा, तिल, मूंगफली की बंपर आवक हो रही है। मंडियों में माल लेकर आने वाले वाहनों की लाइन लगी रहती है, लेकिन करौली अनाज मंडी में गिने-चुने किसान ही सीजन में अपनी उपज लेकर आते हैं। सीजन के समय भी करौली अनाज मंडी सूनी रहती है। जिला मुख्यालय पर व्यापारी किसानों की बाट जोह रहे हैं। कृषि उपजमंडी होने के बावजूद आसपास के लगभग 80 प्रतिशत किसान अपनी उपज को हिंडौन व गंगापुर की मंडियों में बेचने जाते हैं।

वर्तमान में जिला मुख्यालय की मंडी में प्रतिदिन बमुश्किल 200 कट्टे बाजरा व 40 कट्टे तिली की आवक होने से दिनभर व्यापारी किसानों के आने की बाट जोहते रहते हैं। मंडी सुनसान नजर आ रही है। व्यापारियों ने बताया कि जिला मुख्यालय के आसपास के लगभग 80 प्रतिशत गांव बहुत पहले से ही गंगापुर व हिंडौन कृषि उपज मंडी में ही माल बेचते आ रहे हैं, जिससे उनका जुड़ाव वहीं से है। उनके पुराने परिचित या छोटे किसान जिनकी उपज कम होती है वे ही किसान फसल को करौली मंडी में लाकर बेचता है।मंडी व्यापार संघ के अध्यक्ष रामेश्वर गुप्ता बताते हैं कि गत वर्ष की अपेक्षा इस बार अभी बाजरे की बहुत कम ही आवक हो रही है।

जो बाजरे की फसल आ रही है बेमौसम की बरसात से उसके दाने काल पड़ गए हैं, लेकिन मांग ज्यादा और फसल कम आने से गत वर्ष की अपेक्षा 300 रुपए प्रति क्विंटल की तेजी है। उन्होंने बताया कि यहां प्रतिदिन लगभग 200 कट्टे बाजरे की आवक होती है जिससे मंडी के व्यापारी बोली लगाकर खरीदते हैं। वर्तमान में बाजरे का भाव 1500 से 1700 रुपए प्रति क्विंटल चल रहा है। मंडी में प्रतिदिन 40 से 50 कट्टे तिली की फसल की आवक है। जो गत वर्ष 8 से 9 हजार प्रति क्विंटल में बिकती थी वह फसल की कमी को देखते हुए इस बार 10 हजार 500 रुपए प्रति क्विंटल है।

क्षेत्र के किसानों को अपनी फसल को करौली मंडी में बेचने के लिए बहुत प्रेरित करने के साथ सभी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं उसके बावजूद भी किसान फसल को करौली मंडी में बेचने के लिए नहीं आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि फसल की कम आवक होने से उन्हें ही बहुत नुकसान उठाना पड़ता है। फसल कम आती है तो वह कम फसल को बाहर नहीं भेज सकते और दूसरे दिन भाव गिरने की आशंका रहती है। इसलिए उनका प्रयास रहता है कि खरीदे हुए माल को एकत्र कर उसी दिन बाहर की मंडियों में भिजवा सकें।

व्यापारियों की भी कमी मंडी में कुछ सालों पहले तक पर्याप्त लाइसेंसधारी व्यापारी थे, मगर अब मंडी में माल कम आने और मंडी प्रशासन की अनदेखी के कारण व्यापारियों की भी कमी हो गई है। कुछ व्यापारियों ने माल खरीदना बंद कर दिया है तो कुछ बाहर अन्य मंडियों में चले गए हैं। कहने को तो मंडी में 50 से अधिक फर्म पंजीकृत हैं, लेकिन मंडी में फिलहाल 6 फर्म ही काम कर रही हैं। व्यापारियों का कहना है कि मंडी में माल ही नहीं आएगा तो हम क्या करेंगें।

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