पर्यटन दिवस आज:करणपुर का महेश्वरा व घंटेश्वर धाम झरना बना पर्यटनों के आकर्षण का केंद्र

करौलीएक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
  • बरसाती मौसम में 160 फुट उंचाई से गिरता है झरना

करीब 160 फीट की ऊंचाई से गिर रहा पानी का झरना और नीचे बैठकर उसमें नहाना। कुछ ऐसा ही नजारा मंसूरी के कैंप्टीफॉल में देखने को मिलता है, लेकिन करौली जिले वासियों के लिए महेश्वरा व घंटेश्वर धाम का झरना मसूरी के कैंप्टीफॉल से भी कम नहीं है। बारिश शुरू होते ही महेश्वरा का झरना भी शुरू हो जाता है।जिला मुख्यालय से करीब 50 किमी दूरी पर स्थित करणपुर क्षेत्र का प्रसिद्ध महेश्वरा धाम लोगों की श्रद्धा व आस्था का केन्द्र होने के साथ साथ यहां पर्यटन का केन्द्र बिन्दु भी बना हुआ है। साथ ही पत्थर की चट्टानों के नीचे 200 साल पुराना प्राचीन प्राकृतिक पंच मुखी शिवलिंग (शिव मंदिर)बना हुआ है शिवलिंग के उपर दूध जैसे रंग की एक एक बूदों से पानी भी टपकता है। महेश्वरा धाम के पुजारी रमेश जोगी ने बताया कि पंचमुखी शिव मंदिर की उनकी चार पीढ़ियों से पूजा अर्चना करते आ रहे है। राजस्थान मे इतनी ऊंचाई से गिरने वाला यह तीसरे नंबर का झरना है। प्राकृतिक सौंदर्य से आच्छादित महेश्वरा धाम बीहड़ जंगलों में स्थित है।झरने में नहाने का आनंद लेकर पिकनिक मनाते हैं यहां पहुचने के लिए खिजूरा गांव से कच्चा रास्ता बना हुआ है और जंगली जानवरों की शरण स्थली व गुफाएं भी बनी हुई है। बरसात के दिनों में यहां शहर व ग्रामीण क्षेत्र के लोग पिकनिक का लुफ्त उठाकर झर झर बहते हुए झरने की आवाज सुनकर आनंदित होते हैं। करीब 160 फिट उंचाई से नीचे गिरता पानी का आकर्षण यहां आने बाले पर्यटकों का मन हर लेता है। बरसात शुरू होते ही यहां पर्यटकों का आना शुरू हो जाता है तथा झर झर बहते झरने में नहाने का आनंद लेकर पिकनिक मनाते हैं।

राजस्थान में धौलपुर का दमोह झरना सबसे ऊंचाअरावली पर्वतमाला का राजस्थान मे धौलपुर का दमोह झरना है जो सबसे ऊंचा झरना 250 फुट है वहीं दूसरे नंबर पर पाली जिले का भील बेरी नामक झरना ।182 फीट का है तथा तीसरे नंबर पर करौली का महेश्वरा धाम का 160 व घंटेश्वर धाम का करीब 150 फुट ऊंचाई से बहने वाला झरना जो सभी को आकर्षित करता है

सीढ़ियों से पहुंचते हैं शिव मंदिर की गुफा तकघंटेश्वर धाम में पर्यटन विभाग भले ही विकसित करने के लिए कोई दिलचस्पी नही दिखा रहा हो, लेकिन धार्मिक आस्था व अटूट विश्वास रखने वाले पूर्व केन्द्रीय मंत्री नमोनारायण मीणा ने स्थल को विकसित करने के लिए प्राकृतिक रूप से बने शिव मंदिर में नीचे पहुंचने के लिए चट्टानी रास्तों के विपरीत सीढ़ियों का निर्माण कराकर मार्ग को सुगम बनाया गया था।

शिवालय में बिल्वपत्र चढ़ाने से मन्नत होती पूरीघंटेश्वर धाम में धार्मिक स्थलों के अलावा कई जंगली जानवरों की शरणस्थली व गुफाएं भी बनी हुई है। जंगल प्राकृतिक छटाओं से परिपूर्ण होने से पर्यटकों का मन मोह लेता है। यह स्थल पर्यटन विभाग व प्रशासन की उदासीनता के कारण विकसित नही हो सका है। बताया जाता है कि श्रावण मास में घंटेश्वर में स्थापित शिवालय में बिल्वपत्र आदि चढ़ाने से हर मनौती पूरी होती है।

खबरें और भी हैं...