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  • Out Of 32 Gram Rojgar Sahayaks, Only 17 Are In The Original Panchayats, 15 Are Doing Second Place Work, Two Are Given The Responsibility Of Panchayat.

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करौली ब्लॉक में मनमर्जी:32 ग्राम रोजगार सहायकों में से 17 ही मूल पंचायतों में, 15 दूसरी जगह कर रहे काम, चहेतों को दो-दो पंचायत का जिम्मा

करौलीएक महीने पहले
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  • सरपंचों की डिजायर के नाम पर पंचायत समिति में चल रहा ग्राम रोजगार सहायकों को बदलने का खेल

ब्लॉक करौली में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी (मनरेगा) के संविदा कर्मी ग्राम रोजगार सहायक (जीआरएस) विभागीय अधिकारी व कई सरपंचों की मनमर्जी के आगे पस्त हैं। नियम विरूद्ध असामयिक पंचायतों की अदला-बदली का खेल यहां लंबे समय से हो रहा है। पंचायत समिति में बीडीओ स्तर पर ही कार्य व्यवस्था के नाम पर ब्लॉक के कुल 32 में से 15 ग्राम रोजगार सहायकों को अनुबंधित पंचायत के बजाय दूसरी ग्राम पंचायतों में लगा रखा है। साथ ही चहेतों को तो दो से तीन पंचायतों का अतिरिक्त चार्ज भी दिया हुआ है। जबकि,17 जीआरएस ही अपनी मूल पंचायतों में पदस्थापित हैं, हालांकि इनमें से भी कईयों पर दोहरी पंचायतों की जिम्मेदारी भी है। ऐसे में सिस्टम पर सवाल उठना भी लाजमी है। कई ग्राम रोजगार सहायकों ने मिलीभगत से मलाई वालीपंचायतें हथिया रखी हैं तो कईयों को सजा बतौर दूरस्थ पंचायतों में मजबूरन अल्पवेतन पर नौकरी करनी पड़ रही है।ब्लॉक करौली बीडीओ के अधीन वर्तमान में पंस करौली की 32 व नवसृजित मासलपुर की 18 सहित कुल 50 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें क्लर्कों के अलावा कुल 32 ग्राम रोजगार सहायक महानरेगा में संविदा के रूप में पदस्थापित हैं। वहीं 17 ग्राम रोजगार सहायक ही अपनी मूल पंचायत में कार्यरत हैं, जबकि मनमर्जी व मिलीभगत के चलते विकास अधिकारी ने 15 को दूसरी ग्राम पंचायतों में लगा रखा है। इससे संविदाकर्मियों की गाइड लाइन में अस्पष्टता एवं कार्य व्यवस्था की गली से मनी मंत्र सिस्टम संचालन से भी इंकार नहीं किया जा सकता। जबकि, ग्राम रोजगार सहायकों का पंचायत स्तर पर अनुबंधित शर्तों में अनुशासनहीनता व शिकायतें मिलने पर नियमानुसार सेवा से बर्खास्तगी का प्रावधान तो है, मगर स्थानांतरण का जिक्र नहीं है। जांच योग्य पहलू यह है कि एक-दो जीआरएस को कार्य व्यवस्था के नाम पर विशेष स्थिति में अतिरिक्त पंचायतों का जिम्मा सौंपना तो गले उतरता है, मगर अकारण या बिना शिकायत के ही दूसरी पंचायतों में लगाना संदेहास्पद है।

नियम ताक पर: पंचायतों की अदला-बदली में कईयों को सजा बतौर दूरस्थ जगहों पर भेजकर किया जा रहा परेशान

मूल पंचायत में ही तैनाती का नियमनियमानुसार संविदाकार्मिकों का अनुबंध ग्राम पंचायत स्तर पर हुआ है, उनको दूसरी पंचायत में नहीं लगाया जा सकता। शिकायत पर भी नोटिस व अन्य कार्रवाई होना भी जरूरी है, मगर यहां ऐसा नहीं है। जबकि, जेटीए व अन्य कार्मिकों का अनुबंध पंस स्तरीय होने से उनका स्थानांतरण अंडर ब्लॉक किया जा सकता है। कई जीआरएस ने पूर्व में कोर्ट से स्टे भी लिए हैं। ऐसे में यह अदला-बदली नियमों के विपरीत है, जो महज हाकिम की मनमर्जी को ही दर्शाती है। हैरानी की बात यह है कि सरपंचों की डिजायर पर ही इन संविदाकर्मियों की पंचायतें मनमर्जी व लेनदेन के चलते बदल दी जाती हैं। लिहाजा, कई जीआरएस का स्थानांतरण तो छह माह के भीतर ही तीन से चार बार अलग-अलग पंचायतों में कर दिया गया, जबकि जिले की अन्य पंचायत समितियों में ऐसी स्थिति नहीं है। ऐसे में सिस्टम व कार्यनीति पर संदेह पैदा होना भी स्वाभाविक है। ज्यादातर संविदा कर्मी दबाव में भी काम करने को मजबूर हैं,इसके लिए स्पष्ट व पारदर्शी सिस्टम लागू करने की विशेष जरूरत है। हालांकि,विशेष कारण व परिस्थितियों में ही बीडीओ जीआरएस को अंडर ब्लॉक में व्यवस्थागत जरूर लगा सकते हैं।

ग्राम रोजगार सहायकों का पंचायत में यह काम: ग्राम रोजगार सहायकों का प्रमुख कार्य पंचायत में मनरेगा स्कीम का धरातलीय क्रियान्वयन करने में अहम रोल है। श्रमिकों का प्रपत्र संख्या 6 भरना, मस्टररोल भरना व जमा कराना, मौके पर लेबर जांच करना एवं भुगतान कराना आदि है। साथ ही महानरेगा के तहत अन्य विकासात्मक कार्यों के क्रियान्वयन व मॉनिटरिंग में ग्राम विकास अधिकारी के सहयोगी के रूप में कामकाज करते हैं। कई पंचायतों में तो जीआरएस पीएम आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन आदि योजनाओं में भी सहयोग करते हैं।

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