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पैरालिंपिक ब्रॉन्ज मेडलिस्ट सुंदर की कहानी:टीन शेड से कटा था हाथ, फिर भी हौसले को कम नहीं होने दिया; एक हाथ से ही जेवलिन, डिस्कस और शॉटपुट तीनों में गोल्ड जीत चुके

करौली3 महीने पहले

राजस्थान के करौली जिले के रहने वाले पैरालिंपिक खिलाड़ी सुंदर सिंह गुर्जर ने जापान के टोक्यो में 64.01 मीटर जेवलिन थ्रो कर ब्रॉन्ज मेडल जीता। सुंदर की इस सफलता से परिजन और गांव में खुशी का माहौल है। सुंदर गुर्जर का यह सफर आसान नहीं रहा है। एक समय ऐसा आया था जब सुंदर का भविष्य अधर में लटक गया था। सुंदर पूरी तरफ फिट थे और 2015 तक सामान्य वर्ग में भाला फेंक प्रतियोगिता में हिस्सा लेते थे।

2016 में एक दुर्घटना सुंदर के करियर का टर्निंग पॉइंट रहा। इसी साल उन्होंने पैरालिंपिक के लिए क्वालिफाई किया। एक दिन वे अपने दोस्त के घर गए, जहां आंधी में घर के आगे लगी टीन शेड उड़कर सुंदर के ऊपर आ गिरी। इस हादसे में उनका बायां हाथ कट गया। वे पैरालिंपिक में भाग नहीं ले पाए।

हालांकि, सुंदर ने हार नहीं मानी और एक हाथ को ही अपनी मजबूती बनाई। अपनी मेहनत से वे पैरालिंपिक गेम्स के लिए क्वालिफाई कर गए। अब मेडल जीतकर उन्होंने अपने सपनों को पूरा किया। सुंदर को सिर्फ जेवलिन नहीं बल्कि डिस्कस थ्रो और शॉटपुट में भी महारत हासिल है। वे 2017 में FAZAA IPC एथलेटिक्स ग्रां प्री में तीनों स्पोर्ट्स में गोल्ड मेडल जीत चुके हैं।

सुंदर गुर्जर की जीत के बाद उनके घर के बाहर जुटे लोग। सबने मेडल मिलने का जश्न मनाया और एक-दूसरे को मिठाई खिलाई।
सुंदर गुर्जर की जीत के बाद उनके घर के बाहर जुटे लोग। सबने मेडल मिलने का जश्न मनाया और एक-दूसरे को मिठाई खिलाई।

नेशनल रिकॉर्ड भी बना चुके हैं सुंदर
हादसे के बाद सुंदर F46 जेवलिन थ्रो कैटेगरी में हिस्सा लेने लगे। यूं तो इस कैटेगरी में भाला फेंकने का विश्व रिकॉर्ड 63.97 मीटर था, लेकिन ट्रेनिंग में उनका स्कोर 68-70 मीटर के बीच रहा था। उन्होंने 16वीं सीनियर नेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप के दौरान 68.42 मीटर भाला फेंककर नेशनल रिकॉर्ड बनाया था।

पिछली बार सुन्दर गुर्जर ने 2019 में दुबई वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भाग लिया था। इस चैंपियनशिप में प्रदर्शन के आधार पर ही उन्होंने टोक्यो 2021 के लिए क्वालिफाई किया था। 2016 में वह दुर्भाग्यशाली रहे, जब पैरालिंपिक से कॉल रूम में लेट एंट्री के चलते बाहर हो गए थे। गुर्जर को रियो पैरालिंपिक में टॉप करने के बावजूद बिना मेडल के ही घर जाना पड़ा था। उन्होंने अनाउंसमेंट कॉल सुनने में 52 सेकेंड देर कर दी थी। इस कारण उन्हें इवेंट से डिस्क्वालिफाई कर दिया गया था।

वर्ल्ड चैंपियनशिप में दो बार जीता गोल्ड
रियो में हुई घटना के बाद भी सुंदर के कदम नहीं डगमगाए। इसके अगले वर्ष लंदन में हुई वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में जेवलिन थ्रो F46 में अपना बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए पहला गोल्ड मेडल जीता। सुंदर ने इस दौरान 60.36 मीटर के साथ अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। 2019 में दुबई में हुई वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी गोल्ड जीता। वर्ष 2019 में केंद्र सरकार की ओर से अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इसके अलावा एशियन पैरा गेम्स में सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल जीत चुके हैं। 2018 में महाराणा प्रताप पुरस्कार से भी सम्मानित हो चुके हैं।

सुंदर के घर के बाहर बैठे ग्रामीण।
सुंदर के घर के बाहर बैठे ग्रामीण।

बचपन से ही निशानेबाजी में रुचि
सुंदर के पिता कल्याण गुर्जर खेती-बाड़ी और भैंस चराते हैं। मां कलियां घर एवं खेती का काम संभालती हैं। तीन बहन-भाइयों में सबसे छोटे सुंदर शुरू से खेलों में रुचि रखते थे। उनकी मां ने बताया कि खेलों में रुचि के कारण गांव में अक्सर निशानेबाजी के दौरान ग्रामीण महिलाओं के सिर पर रखे पानी के बर्तनों को फोड़ देते थे। इसकी शिकायत हमें रोज मिलती थी। पिता ने बताया कि सुंदर की प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही स्कूल में हुई।

खेलों में रुचि को देखते हुए सरकारी स्कूल में शारीरिक शिक्षक हुकम सिंह ने सुंदर को ट्रेनिंग देना शुरू किया था। ट्रेनिंग के दौरान संसाधन और पैसों के अभाव के कारण गांव में रिश्तेदार, स्कूल औक अन्य दानदाताओं ने मदद की। साथ ही उनके पिता जमीन और ट्रैक्टर गिरवी रखकर पैसों का इंतजाम करते थे।

महावीर सिंह ने कॉम्पिटिशन के लिए तैयार किया
इसके बाद सुंदर जयपुर के प्रसिद्ध कोच महावीर सिंह के संपर्क में आए। महावीर ने उन्हें वर्ल्ड लेवल कॉम्पिटिशन के लिए तैयार किया। उन्हीं की मेहनत का परिणाम है कि इसके बाद सुंदर ने लगातार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन किया। सुंदर की सफलता से उत्साहित परिवार और गांव वालों ने पटाखे फोड़कर और मिठाई बांटकर जश्न मनाया।

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