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कोरोना इफेक्ट:इस बार नहीं होगा रावण दहन, अभी कोरोना ही ‘राक्षस’

करौलीएक महीने पहले
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  • दशकों से चली आ रही परंपरा थमी, सरकारी स्तर पर होने वाले शोभायात्रा सहित अन्य कार्यक्रम भी निरस्त

हिंडौन सिटी शहर में पहली बार रावण दहन का आयोजन नहीं होगा। कोरोना को देखते हुए नगर परिषद ने आयोजन को निरस्त करने का निर्णय लिया। शहर में दशकों से रावण दहन का आयोजन होता रहा है। पिछले साल जल सेन की पाल के पास 60 फुट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया था। एक घंटे तक की गई रंग बिरंगी आतिशबाजी लोगों के आकर्षण का केन्द्र रही थी। नगर परिषद आयुक्त प्रेमराज मीना ने बताया कि कोरोना गाइडलाइन में ज्यादा भीड़ एकत्र नहीं होने देने के निर्देशों के कारण यह निर्णय लिया गया है।नगर परिषद का मानना है कि हर साल 10 हजार से ज्यादा लोग रावण दहन देखने आते हैं। अगर आयोजन होता है तो इस भीड़ को रोकना संभव नहीं है। आयुक्त प्रेमराज मीना ने बताया कि कोरोना वायरस के चलते गृह मंत्रालय की गाइडलाइन के अनुसार किसी भी प्रकार के धार्मिक जुलूस या कार्यक्रम का आयोजन निर्धारित संख्या के अनुरूप होना चाहिए, लेकिन रावण दहन में हजारों लोग आने की संभावना को देखते हुए कोरोना गाइड लाइन का पालन कराना संभव नहीं था। ऐसे में सभी से राय लेने के बाद रावण दहन सहित अन्य आयोजन नहीं करने का निर्णय लिया गया है। इस कारण इस बार रामलीला का भी आयोजन नहीं किया गया।इतने लोगों की स्कैनिंग करना संभव नहींगृह मंत्रालय की गाइडलाइन में साफ किया गया है कि आयोजन सीमित संख्या में होंगे। कलेक्टर से अनुमति लेनी होगी। इसमें भी सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क अनिवार्यता है। हर व्यक्ति की स्कैनिंग करनी होगी और सेनिटाइजेशन होगा। दो घंटे के कार्यक्रम में एक साथ आने वाली भीड़ की स्केनिंग करना और हर एक को सेनिटाइज करना संभव नहीं होता। इस कारण समारोह निरस्त किए गए है।रावण दहन 4 साल से नगर परिषद के जिम्मेरामलीला आयोजन कमेटी के संयोजक लक्ष्मण शर्मा ने बताया कि इस बार दशहरा महोत्सव फीका रहेगा। कोरोना के कारण सभी कार्यक्रम निरस्त किए गए हैं। पहले कमेटी चंदा एकत्र कर रामलीला एवं रावण के पुतलों का दहन कराती थी। चार साल से नप ने इन कार्यक्रमों की जिम्मेदारी ली थी।दशहरा और नवरात्र समापन एक ही दिन विजयादशमी 25 अक्टूबर को है। इस दिन नवमी तिथि रहेगी, किंतु दूसरे दिन सोमवार सुबह 8:58 तक ही दशमी तिथि रहने के कारण नवमी के दिन ही विजयादशमी पर्व मनाया जाएगा। रविवार सुबह 7:40 के बाद दशमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। इस बार शारदीय नवरात्र 17 अक्टूबर से प्रारंभ होकर 25 अक्टूबर तक रहेंगे। पं भरतलाल शास्त्री ने बताया कि इस दिन ब्राह्मण सरस्वती-पूजन, क्षत्रिय शस्त्र-पूजन व वैश्य कुबेर पूजन करते हैं। इसके अतिरिक्त भगवान श्रीराम व माता दुर्गा का पूजन अपनी अपनी श्रद्धा के अनुसार करते हैं। विजयादशमी भगवान श्रीराम की विजय के उपलक्ष्य में अथवा दुर्गा पूजा के रूप में, दोनों ही रूपों में शक्ति-पूजा का पर्व है, शस्त्र पूजन की तिथि है। दशहरा और नवरात्र एक ही दिन होने का भी संयोग ही है। सुबह नवरात्र समापन कार्यक्रम होंगे और शाम को रावण दहन।

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