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पर्यावरण दिवस स्पेशल:संत नानकदास बने हरियाली वाले बाबा, 15 साल में 1100 पौधों को बना दिया पेड़

करौली4 महीने पहलेलेखक: सुखदेव डागुर
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बाबा नानकदास ने 1100 पौधे लगाकर पहाड़ी को हरियाली से आच्छादित कर दिया। - Dainik Bhaskar
बाबा नानकदास ने 1100 पौधे लगाकर पहाड़ी को हरियाली से आच्छादित कर दिया।
  • अतेवा में लहलहा रहे हैं चंदन, जामुन, नीम, अशोक सहित जड़ी-बूटियों के पेड़, ढिंढोरा में पर्यावरण संतुलन के साथ भूजल स्तर भी नहीं गिरा

आज पर्यावरण दिवस है। यानी प्रकृति संरक्षण के जन संकल्प का अवसर। वैश्विक महामारी कोरोना के कारण देश-दुनिया में ऑक्सीजन की कमी को लेकर खूब हाहाकार मचा। हॉस्पिटलों में ऑक्सीजन के अभाव में मरीजों ने दम तोड़ा। ऑक्सीजन को लेकर सबके जहन में निर्बाध सांसों के लिए पर्यावरण संरक्षण के साथ ही पर्यावरण संतुलन के लिए पेड़-पौधों की जरूरत का भी एहसास हुआ है।

जीवन में एक पेड़ हमें क्या देता है, इसी को लेकर पर्यावरण दिवस के पर जन जागरूकता के साथ प्राकृतिक संतुलन के लिए अधिकाधिक पौधे लगाने और हरियाली बढ़ाने की जरूरत है। अतेवा गांव के कजलिया बांध के ऊपर करीब 5 बीघा क्षेत्र मालया (टापूनुमा ) स्थल को तपस्वी सन्त बाबा नानकदास त्यागी ने पिछले 15 वर्षों में 1100 पौधों को पाल पोसकर के पेड़ बना दिया है।

बांध के पास हरियाली से आच्छादित पहाड़ी के प्राकृतिक सौंदर्यता वाले स्थल पर मन को शांति व सुकून मिलना भी लाजमी है। हरियाली वाले बाबा नानक दास बताते हैं कि 7 साल तक दो पीपाें से पानी भरकर के पौंधों को सींचा। बाद में यहां बिजली मोटर की व्यवस्था हो जाने से पौधों की सिंचाई में आसानी हो गई।

खास यह है कि ग्रामीणों के बिना सहयोग के बाबा ने नर्सरी से पौधे खरीद कर हर साल यहां विभिन्न किस्मों के फल व फूलदार और छांव वाले पौधे रोपे जो अब पेड़ों की शक्ल में हैं। सुंगंधित महकती क्यारियां और हरा-भरा यह स्थल अब लाल चंदन, सफेद चंदन, आंवला, जामुन, नीम, आम, अशोक, सफेदा, बरगद सहित जड़ी-बूटियों वाले औषधीय पौधे भी बड़ी संख्या में हैं।

ढिंढोरा के 90% घरों में नीम के पेड़

सूरौठ तहसील के गांव ढिंढ़ोरा में बड़ी आबादी है। यहां 90 फीसदी घरों में नीम के पेड़ जरूर मिलेंगे। आबादी क्षेत्र में तो पेड़-पौधों की भरमार है। क्षेत्र में भूजल स्तर भी ज्यादा नीचे नहीं है और पर्याप्त पानी की पूर्ति होने से खेतीबाड़ी भी अच्छी हो रही है। गांव में कई धार्मिक व सार्वजनिक स्थल स्थल ऐसे हैं जो हरियाली से पूरी तरह आच्छादित हैं। विशाल बरगद की छांव वाले रामदास आश्रम से लेकर नहर वाले आश्रम के इर्दगिर्द बहुसंख्या में पेड़ हैं।

गांव के युवा विष्णु बताते हैं कि कोरोना की दूसरी घातक लहर में भी एक-दो मरीज चपेट में तो आए, मगर वे होम आइसोलेट होकर सही हो गए। सुकून की बात यह है कि यहां कोरोना से एक भी मौत नहीं हुई। बुजुर्ग व युवाओं की मॉर्निंग वॉक व रेस यहां दिनचर्या का अहम हिस्सा है। हर घर में ज्यादा से ज्यादा पेड़ होने से गांव का जल स्तर भी नहीं गिरा।

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