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  • The Mortal Remains Of Shivnarayan, Who Was Martyred In An Encounter With Naxalites In Narayanpur, Chhattisgarh, Reached At Night, The Last Rites Today

चांदनगांव से खबर:छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में नक्सलियों से मुठभेड़ में शहीद हुए शिवनारायण का पार्थिव शरीर रात को पहुंचा, अंतिम संस्कार आज

करौली4 दिन पहले
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  • शिव कहतेे थे-जिंदगी का भरोसा नहीं, शादी करके किसी को विधवा नहीं बना सकता

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में नक्सलियों की मुठभेड़ में मंगलवार को सुबह शहीद हुए कौडिया निवासी आईटीबीपी के सिपाही शिवनारायण मीना का पार्थिव शरीर बुधवार को देर रात यहां पहुंच गया। बुधवार को दिनभर शहीद के घर पर सांत्वना देने वालों का तांता लगा रहा। पार्थिक शरीर आने के इंतजार में परिवार के लोगों की आंखें पथरा सी गई। घर में बैठी परिवार की महिलाओं की आंखों के आंसू थम नहीं पा रहे थे। शहीद की मां इसर बाई अपने बेटे की याद में बार-बार जमीन पर लेटकर बेसुध हो रही थी तो अन्य परिजन गमगीन रहे।

बेटे को खोने से परिवार में कोहराम मचा हुआ है। गुरुवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। बुधवार को पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों ने गांव में पहुंचकर अंतिम संस्कार स्थल पर जाकर तैयारियों को देखा। शहीद के छोटे भाई नमोनारायण अपने भाई के गम में बहुत दुखी है। उनका कहना रहा कि उसके भाई ने मां-बाप से बढ़कर प्यार दिया और वो ही उसके लिए सब कुछ था।

बताया कि कई जगह शिवनारायण की शादी की बात चल रही थी, लेकिन वह शादी को तैयार नहीं था। जब भी घर वाले शादी की बात करते तो वह नाराज हो जाता था। कहता था कि उसकी जिंदगी का कोई पता नहीं, कि कब दुनिया को अलविदा कह दूं। ऐसे में किसी के घर की लाड़ली को विधवा नहीं बना सकता। शहीद शिवनारायण मीना का अंतिम संस्कार गुरुवार को होगा।

बुधवार को हिंडौन एसडीएम अनूप सिंह, डीएसपी किशोरीलाल, तहसीलदार मनीराम खीचड, नायब तहसीलदार महावीर प्रसाद गुप्ता व श्रीमहावीरजी थानाप्रभारी धर्मसिंह कौडिया गांव पहुंचे और अंतिम संस्कार की तैयारियों को अंतिम रुप दिया। बताया कि नादौती रोड़ पर कौडिया बगीची के पास औंकारलाल के ही खेत हैं, जहां पर सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।

शहीद शिवनारायण के पार्थिक शरीर को पहले फ्लाइट से रायपुर से दिल्ली लाया गया और उसके बाद सेना के ट्रक में पैतृक गांव। परिजनों ने बताया कि दोपहर 12 बजकर 10 मिनट पर रायपुर एयरपोर्ट से इंडिगो की फ्लाइट में पार्थिक शरीर रवाना हुआ था और दोपहर 2 बजे दिल्ली के एयरपोर्ट पर उतरा। वहां से करीब साढ़े 3 बजे पैतृक गांव के लिए तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर सेना के ट्रक में रवाना हुआ और रात को पहुंच गया।

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