जन संकल्प से हारेगा कोरोना:3 अस्पतालों में इलाज, ऑक्सीजन लेवल 70 पर आया, मैंने किसी का गलत नहीं किया था तो मेरे साथ भी गलत नहीं होगा, इसी सोच से जीती जिंदगी

करौली6 महीने पहले
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  • गंभीर कोरोना संक्रमण होने के बावजूद इच्छाशक्ति से कोरोना को हराने वालों की जांबाज कहानियां, पढ़िए आज दूसरी कड़ी- लोगों का मनोबल बढ़ाने के लिए उनकी मदद कर समाजसेवा से जुड़ा

टोनू राजौरिया | कोरोना वॉरियरमन के हारे हार है मन के जीते जीत…। कोरोना की लड़ाई में जीत के लिए इन दिनो यह अचूक मंत्र किसी दवा से कम नहीं है। यही मंत्र कोरोना संक्रमित मरीजों को दृढ़ इच्छाशक्ति से कोविड -19 वायरस से जंग जीतने में सार्थक भी साबित हो रहा है। कोरोना महामारी के दौर में जनता की सेवा करते हुए कोविड की चपेट में आए समाजसेवी टोनू राजौरिया की जुबानी।कोरोना की महामारी के बीच दाल-रोटी के संकट से जूझ रहे लोगों को कोरोना वॉरियर के रुप में चिकित्सालय, थाने सहित अन्य स्थानों पर अपना कर्तव्य निर्वहन कर रहे लोगों का मनोबल बढ़ाने एवं उनकी हर जरूरत को पूरा करने के उद्देश्य से मैने समाजसेवा से जुड़ कर जरूरतमंदों को घर-घर खाद्य सामग्री पहुंचाई और कोरोना वॉरियर का सम्मान किया।

वहीं बेजुबान पशु, पक्षियों, गाय, बंदरों के लिए भी चारे पानी की व्यवस्था कराई। इस दौरान लगभग 1 महीने बाद मई माह में अचानक तबीयत बिगड़ने लगी। जिस पर जिला अस्पताल करौली में मेरे भाई राजकुमार राजौरिया एवं पत्नी काजल राजौरिया ने मुझे भर्ती कराया। जहां 5 दिन भर्ती रहने के बाद भी मेरी तबीयत में सुधार नहीं हुआ और हालत और अधिक बिगड़ने लगे। पांचवे दिन मेरी कोरोना की जांच पॉजीटिव आई तो घर वाले डर गए। मुझे होम आइसोलेशन कर दिया गया लेकिन अधिक तबीयत खराब होने पर जयपुर आरएसएचयू में रैफर कर दिया।लगातार ऑक्सीजन लेवल गिरते गिरते 74 तक पहुंच गया और सांस लेने में दिक्कत आने लगी। जयपुर के चिकित्सकों ने मुझे वेंटीलेंटर पर शिफ्ट कर दिया और प्लाजमा की आवश्यकता पड़ने पर प्लाजमा भी चढ़ाया।

आंखों के सामने अच्छे बुरे पल आ रहे थे लेकिन मुझे पता था कि मैने आज तक किसी के साथ गलत नहीं किया है तो मेरे साथ कुछ गलत नहीं होगा। मैने हिम्मत करके अपने घर वालों के सहयोग से हार नहीं मानी और 14 दिन कुछ भी होश नहीं होने के बावजूद कोरोना को हरा के स्वस्थ हो गया। इस दौरान मेरे परिचित और मेरे मित्र गण मुझे वीडियो कॉल के जरिए सांत्वना देते रहे और मेरे शीघ्र सही होने की कामना की। जांच रिपोर्ट जब नेगेटिव आई तो मामा के यहां दिल्ली गया जहां एक निजी अस्पताल में मेरी पुन: जांच हुई और उपचार चला। 24 दिन बाद में मेरे घर वापस लौटा तो परिवार वाले खुश थे लेकिन मुझे अफसोस ये जरूर था कि मेरे कारण मेरे परिजनों को भी इस बीमारी से जूझना पड़ा। मेरे बाद मेरे भाई,माता, चचेरा भाई भी कोरोना संक्रमित हो गए।(जैसा उमेश कुमार शर्मा को बताया)

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