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तीसरी लहर से कैसे बचेंगे ?:डब्ल्यूएचओ की गाइड लाइन-1000 बच्चों पर 1 डॉक्टर होना चाहिए, जिले में 4 लाख बच्चे, 400 की बजाय 16 ही डॉक्टर, कैसे पाएंगे कोविड पर काबू

करौली6 दिन पहले
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  • मेन पावर की कमी, जो डॉक्टर हैं उनको भी नहीं दिलाया प्रशिक्षण, सीएमएचओ बोले- पुख्ता व्यवस्था कर ली

सुनील पाराशर | कोरोना महामारी की दूसरी लहर पूरे देश में अभी खत्म नहीं हुई है, लेकिन तीसरी लहर की चर्चाओं का बाजार गर्म है. तीसरी लहर कब आएगी इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता. लेकिन किस तरह की तैयारी होनी चाहिए। डॉक्टरों के अनुसार इस लहर से निपटने के लिए मैन पावर एक बड़ा अहम रोल अदा कर सकता है। कोरोना महामारी की जिस वक्त शुरूआत हुई तो सबके के लिए एक अनोखा अनुभव था। पहली लहर में मास्क सेनिटाइजर आदि की किल्लत देखने को मिली। दूसरी लहर में ऑक्सीजन सिलेंडर, अस्पतालों में बेड की भारी किल्लत हुई जिसके कारण कई लोगों को जान गवानी पड़ी।

तीसरी लहर में ऐसा क्या किया जाए जिससे लोगों की जान बचाई जा सके? या जिस तरह से दूसरी लहर में हालात गंभीर हुई, उस तरह के हालात फिर नहीं हो। तीसरी लहर में बच्चों के प्रभावित होने की बात कही जा रही है, लेकिन बच्चों में इतनी गंभीर बीमारी नहीं होती है। दूसरी लहर में भी बच्चों में गंभीर बीमारी नहीं थी। हालांकि राज्य सरकार ने जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि तीसरी लहर को ध्यान में रखते हुए अभी से प्रभावी कदम उठाएं। जिला अस्पताल में बच्चों के उपचार की व्यवस्थाएं कर ली गई, लेकिन डब्ल्यूएचओ के मापदंडों को देखा जाए तो मेन पावर की कमी है।

डांग ग्रस्त करौली जिले में चिकित्सा के क्षेत्र में मेन पावर की कमी है। अगर डब्ल्यूएचओ के नियम अनुसार देखा जाए तो 1000 बच्चों पर एक डॉक्टर का होना आवश्यक है जबकि करौली जिले में लगभग 4 लाख से अधिक बच्चों की आबादी है ऐसे में 400 डॉक्टरों के पद होने चाहिए लेकिन मात्र जिले में 16 डॉक्टर कार्यरत हैं। हालांकि जिला अस्पताल में बच्चों के 7 डॉक्टर पद स्थापित है जिनको चिकित्सालय प्रशासन पर्याप्त मान रहा है।

तीसरी लहर के संकेत, लेकिन एक भी डॉक्टर नहीं प्रशिक्षित देश में कोरोना की तीसरी लहर बच्चों पर भारी पड़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि चिकित्सा विभाग इस लहर को देखते हुए अपने संसाधनों को जुटाने में पूरी तरह लगा हुआ है लेकिन अभी तक चिकित्सा कर्मियों को प्रशिक्षित नहीं कराया गया है जिससे आगामी समय में परेशानी हो सकती है। इस लहर से निपटने के लिए समय रहते डॉक्टर और नर्सिंग कर्मी प्रशिक्षित हो जाएं तो उस समय संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा।

पुख्ता व्यवस्था कर ली, डॉक्टरों कोभी जल्द दिलाएंगे प्रशिक्षण कोरोना की तीसरी लहर की संभावनाओं को देखते हुए जिले में चिकित्सा व्यवस्था पुख्ता कर दी गई है। अभी चिकित्सा कर्मियों को प्रशिक्षण नहीं दिलाया है। जल्द ही प्रशिक्षण भी दिलाया जाएगा।डॉ दिनेश मीणा, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, करौली

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