शक्तिपीठ:ज्योति स्वरूपा है ब्रह्माणी माता, 950 वर्ष पूर्व स्थापित, राजराजेश्वरी के नाम से विख्यात

लालसोट2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

यूं तो लालसोट की विभिन्न दिशाओं में 7 शक्तिपीठ है तथा प्रत्येक शक्तिपीठ अपनी-अपनी अपने अपने चमत्कारों के कारण न केवल प्रसिद्ध हैं। अपितु उन शक्तिपीठ स्थलों पर श्रद्धालुओं के प्रति वर्ष से भारी तादाद में मेले लगते हैं। मगर 950 वर्ष पूर्व मंडावरी में स्थापित ज्योति स्वरूपा राजराजेश्वरी मां भगवती ब्रह्माणी माता अपने चमत्कारों के कारण पूरे प्रदेश में विख्यात है।

सबसे पहले हरजी भगत को ब्रह्माणी माता ने दृष्टांत दिए तथा बालिका के रूप में दर्शन देकर उनकी पूजा-अर्चना के लिए कहा तब से ब्रह्माणी माता का मंदिर स्थापित कर अनवरत ज्योति स्वरूपा देवी के रूप में भगत परिवार द्वारा पूजा अर्चना की जाती रही है। ब्रह्माणी माता की आराधना का ही परिणाम है कि परसादी लाल मीणा राजस्थान की सरकार में सात बार विधायक बनकर पहुंचे तथा मंत्री बने ।वहीं दूसरी तरफ भाजपा सरकार में मंडावरी के ही वीरेंद्र मीणा सरकार में राज्य मंत्री के सम्मान से नवाजे गए ।वहीं दूसरी तरफ लगभग 700 की तादाद में युवाओं को नौकरी लगी।

नौकरी लगने वाला प्रत्येक युवक परिवार, युवक की पहली तनख्वाह ब्रह्माणी माता के मंदिर में चढ़ावा के रूप में चढ़ाता है ।वहीं दूसरी तरफ ब्रह्माणी माता के चमत्कारों के कारण अनेक असाध्य रोगों का भी निदान हो सका है ।माता के यहां प्रसाद से ज्यादा अखंड ज्योति के लिए लोगों द्वारा घी चढ़ाया जाता है ।जो अखंड ज्योति के साथ साथ हवन पूजा के अंदर भी काम आता है। माता के दरबार में चढ़ने वाले को कबूतरों के लिए उपलब्ध कराया जाता है। वहीं दूसरी तरफ प्रत्येक श्रावण तथा भादवा महा में सार्वजनिक भंडारा का आयोजन किया जाता है, जिसमें मंडावरी क्षेत्र की बालिकाएं उस विशाल भोज कार्यक्रम में भाग लेती हैं।

खबरें और भी हैं...