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टोक्यो पैरालिंपिक में जयपुर की बेटी ने दी दोहरी खुशी:11 साल की उम्र में हुआ था एक्सीडेंट, पहली बार गन उठा तक नहीं पाई थीं, जज बनना चाहती हैं अवनि

जयपुरएक वर्ष पहले

टोक्यो पैरालिंपिक में जयपुर की बेटी अवनि लेखरा ने गुरुवार को 50 मीटर एयर राइफल प्रतियोगिता में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर नया कीर्तिमान बना दिया है। अवनि ने भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन कर दिया है। अवनि ने देश में भी एक अनूठा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। इससे पहले अवनि एयर राइफल 10 मीटर प्रतियोगिता में भी गोल्ड जीत चुकी हैं। ऐसे में किसी एक पैरालिंपिक में दो मेडल जीतने वाली अवनि भारत की पहली खिलाड़ी बन गई हैं।

अवनि की जीत के बाद जयपुर में शास्त्री नगर स्थित उनके घर में परिजनों ने नाच गाकर जश्न मनाया। इस दौरान अवनि के परिवार ने बताया कि वो खेल के साथ पढ़ाई में भी अव्वल है। अवनि के दादा जीआर लेखरा ने बताया कि अवनि का जयपुर से टोक्यो तक का सफर काफी संघर्ष भरा है। अवनि ने हिम्मत और लगातार मेहनत करके सभी बाधाओं को हराकर कामयाबी हासिल की है।

2012 में महाशिवरात्रि के दिन अवनि का एक्सीडेंट हो गया, जिससे उसको पैरालिसिस हो गया। तब वह पूरी तरह हिम्मत हार चुकी थी। अपने कमरे से भी बाहर नहीं निकलती थी, लेकिन हम सभी ने उसे हिम्मत दी। उसके माता-पिता की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उसकी मेहनत का ही नतीजा है कि वह दुनियाभर में भारत नाम रोशन कर रही है।

शूटिंग में निशाना साधती अवनि लेखरा।
शूटिंग में निशाना साधती अवनि लेखरा।

जज बनना चाहती हैं अवनि
परिवार ने बताया कि शूटिंग में इतिहास रचने वाली अवनि लेखरा पढ़ाई में भी काफी होशियार हैं। परिजनों ने बताया कि उसे किताबें पढ़ने का काफी शौक है। हर दिन अवनि खेल के साथ पढ़ने में भी काफी वक्त बिताती है। अवनि के भाई अरनव ने बताया कि फिलहाल वह आरजेएस की तैयारी कर रही हैं, ताकि वह जज बन न्याय कर सके। अब जब अवनि ने दूसरा मेडल जीता है, तो पूरे परिवार में खुशियां मनाई जा रही हैं।

पिता ने शूटिंग रेंज के पास घर खरीदा
अवनि के दादा जीआर लेखरा ने बताया कि अवनि को जगतपुरा में शूटिंग रेंज प्रेक्टिस करने के लिए जाना पड़ता था। ऐसे में उसके पिता ने जगतपुरा में ही घर खरीद लिया था। बेटी को प्रेक्टिस के लिए सहूलियत मिली। अवनि पहली बार में शूटिंग के लिए गन तक उठा नहीं पाई थी और आज देश को दो मेडल दिलाएं हैं।

भाई ने कहा, बहुत संघर्ष किया है मेरी बहन ने
अवनि के भाई अरनव ने भास्कर को बताया कि शूटिंग देखने में और सुनने में जितना आसान दिखता है, असलियत में यह इतना आसान खेल नहीं है। मेरी बहन को इसे सीखने और शुरू करने में काफी संघर्ष करना पड़ा है। शुरुआत में हमें कुछ गैजेट्स के नाम तक नहीं पता थे, जिन्हें हमने बाहर से मंगवाया और उसी का नतीजा है कि आज अवनि ने दो मेडल जीत कर अपने संघर्ष को पहचान दी है।

पहली बार अवनि के संघर्ष की कहानी PHOTOS में:11 साल की उम्र में एक्सीडेंट, उधार राइफल से पहला मेडल जीत बनाया रिकॉर्ड; कमजोरी को ताकत बना बढ़ाया देश का गौरव

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