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खून का अवैध रिश्ता:झुंझुनूं से यूपी भेजा जा रहा था 100 यूनिट अवैध ब्लड, जयपुर में पुलिस ने पकड़कर ड्रग विभाग को सौंपा, डीसीओ ने जाने दिया

जयपुर4 महीने पहलेलेखक: संदीप शर्मा
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राजस्थान-यूपी में तस्करों की रक्त-वाहिनी का जयपुर कनेक्शन। - Dainik Bhaskar
राजस्थान-यूपी में तस्करों की रक्त-वाहिनी का जयपुर कनेक्शन।

राजस्थान और यूपी में खून का अवैध रिश्ता सामने आया है। ‘खून की तस्करी’ करने वाले गिरोह के सक्रिय सदस्य लगातार अपना साम्राज्य फैला रहे हैं और ड्रग विभाग आंखें मूंदे है। पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के लखनऊ में पकड़े गए खून के सौदागर डॉ. अभय ने कबूल किया था कि वह जयपुर से रक्तदान शिविर लगाकर यूपी-बिहार में खून का बेचान करता था।

भास्कर ने मामले की तह तक पड़ताल की तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। मामले के अनुसार, झुंझुनूं से आ रही ब्लड वैन को 16 मई को जयपुर की चित्रकूट पुलिस ने नाके पर रोका। पुलिस ने वैन चालक से ब्लड सम्बन्धी जानकारियां मांगी। सही जवाब नहीं मिलने पर पुलिस ने ड्रग विभाग को सूचना दी।

सूत्रों की मानें तो मौके पर पहुंची डीसीओ सीमा तनान ने बेचान का बिल और अन्य ब्लड संबंधी कागजात नहीं होने के बावजूद वैन को जाने दिया। हालांकि झुंझुनूं के सहायक औषधि नियंत्रक (एडीसी) देवेन्द्र गर्ग ने ब्लड डोनेशन कैंप और 100 यूनिट ब्लड बिना कागजात के झुंझुनूं से फिरोजाबाद भेजना पाया गया। इस संबंध में झुंझुनूं के श्री आरएलजेटी ब्लड बैंक को दोषी पाया गया। बकौल गर्ग, रिपोर्ट ड्रग कंट्रोलर को सौंप दी है।

एडीसी की रिपोर्ट में ब्लड का अवैध बेचान पाया; शिविर भी फर्जी... 4 माह में कार्रवाई क्यों नहीं?

1. जांच रिपोर्ट के पॉइंट नं. 10 में साफ लिखा है- झुंझुनूं के ब्लड बैंक श्री आरएलजेटी ने 100 यूनिट ब्लड अवैध रूप से बेचा। विस्तृत रिपोर्ट में मास्टर रिकॉर्ड में करीब 150 यूनिट ब्लड का रिकॉर्ड नहीं मिलना पाया गया।

2. पहले पॉइंट में ही बताया है कि ब्लड बैंक ने मूल लाइसेंस ही प्रस्तुत नहीं किया। 3. ब्लड बैंक ने कैंप की सूचना किसी भी स्तर पर नहीं दी थी यानी ब्लड बैंक द्वारा लगाए गए कई कैंप फर्जी हैं। 4. तीसरे पॉइंट में है- ब्लड बैंक के लिए अनुमोदित मेडिकल ऑफिसर व तकनीकी स्टाफ की अनुपस्थिति में ब्लड कलेक्शन किया गया। डोनर फॉर्म भी अधूरे भरे थे। निजी वैन का इस्तेमाल किया गया।

5. ब्लड को फिरोजाबाद के लक्ष्मी चैरिटेबल ब्लड बैंक को बिना लिखित आदेश व बिना बिल बेचने के लिए ले जाया जा रहा था। 6. मौके पर सीपीडी ब्लड बैंक का एलिजा किट, एमपी टेस्ट किट, बीडीआरएल किट का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।

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ड्रग विभाग सोया ना रहता तो यूपी एसटीएफ नहीं, जयपुर पुलिस 4 माह पहले करती गिरोह का खुलासा

यूपी पुलिस ने 17 सितंबर को लखनऊ में डॉ. अभय सहित 2 लोगों को अवैध खून के साथ पकड़ा था। वह जयपुर में रक्तदान शिविर लगाता, खून जुटाता और उत्तर प्रदेश जाकर गिरोह के जरिए 6000 यूिनट के हिसाब से बेचता था। दोनों केसों में 3 प्रमुख समानताएं हैं।

पहली, डॉ. अभय से भी 100 यूनिट ब्लड बरामद किया गया, झुंझुनूं के ब्लड बैंक से भी 100 यूनिट यूपी में बेचना पाया गया। दोनों ही केसों में निजी वैन का इस्तेमाल किया गया। दोनाें मामलों में दस्तावेज नहीं मिले। बताया जा रहा है कि 4 माह पहले ड्रग विभाग लापरवाही नहीं करता तो जयपुर पुलिस ही इसका खुलासा कर देती।

सवाल; 100 यूनिट खून आखिर गया कहां?

  • सबसे बड़ा सवाल- झुंझुनूं से यूपी के फिरोजाबाद जा रहा 100 यूनिट ब्लड आखिर कहां गया? जबकि जयपुर की चित्रकूट पुलिस ने वैन को संदिग्ध मानते हुए ड्रग विभाग के हवाले किया था।
  • एडीसी की जांच रिपोर्ट में ब्लड बैंक की गड़बड़ी 17 मई को ही सामने आ गई थी तो सितंबर तक कार्रवाई क्याें नहीं की गई?
  • ड्रग विभाग मामले में जवाब देने से क्यों बच रहा है? ड्रग कंट्रोलर ने ब्लड बैंक को कितने नोटिस दिए और उनमें कितनों के जवाब आए? क्यों छिपाया जा रहा है?
  • 16 मई को डीसीओ सीमा तनान ने बेचान का बिल व अन्य कागजात नहीं होने पर भी वैन को जाने क्यों दिया?

‘काम का लोड है, टाइम लगता है’

  • सभी के पास काम होता है, मेरे पास भी काम का लोड है, इसलिए टाइम लग रहा है। हमने नोटिस भेजे हुए हैं, जवाब आएगा तो कार्रवाई कर देंगे। कार्रवाई के लिए कोई टाइम निर्धारित नहीं है। - राजाराम शर्मा, ड्रग कंट्रोलर, जयपुर
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