रोडवेज बसें खाली, घाटा भी बढ़ा:सिंधी कैंप से 1300 सरकारी बसें चलती हैं, बाहर 2600 निजी बसें 20-50 रुपए कम में यात्रा करवाती हैं

जयपुर6 महीने पहले
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सीएमडी ने रोडवेज की दुर्दशा के लिए परिवहन एसीएस को पत्र लिखा था पर हालात जस के तस। - Dainik Bhaskar
सीएमडी ने रोडवेज की दुर्दशा के लिए परिवहन एसीएस को पत्र लिखा था पर हालात जस के तस।

सिंधी कैंप बस अड्डे से हर दिन 1300 सरकारी बसों का संचालन होता है। इन बसों को काउंटर देने के लिए निजी ऑपरेटरों की 2600 बसें सिंधी कैंप के बाहर खड़ी रहती हैं। एक सरकारी बस की सवारी हथियाने के लिए दो प्राइवेट बसें रहती हैं। यही नहीं किराया भी 20 से 50 रुपए तक कम लगता है। यही वजह है कि सरकारी बसों को सवारियां मिलती ही नहीं हैं।

पूर्व में रोडवेज डिपो के महाप्रबंधक से लेकर रोडवेज सीएमडी तक ने थाना पुलिस, ट्रैफिक पुलिस, जिला कलेक्टर व ट्रांसपोर्ट कमिश्नर से प्राइवेट बसों पर लगाम लगाने के लिए पत्र व्यवहार भी किया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। यही नहीं सिंधी कैंप, बनीपार्क, सी स्कीम व आसपास की कॉलोनियों के लोगों ने भी मुख्य मार्गों पर पार्किंग की जाने वाली बसों को अवैध मानते हुए कार्रवाई करने की मांग की गई थी ताकि वहां लगने वाले जाम से निजात मिल सके।

प्राइवेट बसें रोकने को परिवहन विभाग और पुलिस को कई रिमाइंडर पर कार्रवाई नहीं

कलेक्टर की अधिसूचना दिनांक 01 मार्च, 2006 द्वारा चांदपोल से रेलवे स्टेशन, गवर्नमेंट हॉस्टल चौराहे से चांदपोल एवं वनस्थली मार्ग को भारी वाहनों के लिए नो पार्किंग जोन घोषित है। इसके बावजूद अवैध व निजी वाहनों द्वारा सिंधी कैम्प बस स्टैंड के बाहर बुकिंग की जा रही है। इधर, रोडवेज के कार्यकारी प्रबंधन सुधीर भाटी का कहना है कि इस बारे में कई बार जिला प्रशासन और पुलिस को पत्र लिखा हे लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

इधर, रोडवेज की समीक्षा बैठक में मंत्री ने कहा...50 सीएनजी और 50 इलेक्ट्रिक बसें खरीदेंगे
परिवहन मंत्री बृजेंद्र ओला ने बुधवार को परिवहन निगम की समीक्षा बैठक की। परिवहन विभाग ओला का पैतृक विभाग माना जाता है, उनके पिता शीशराम ओला भी परिवहन मंत्री रह चुके हैं। परिवहन मंत्री ने वेतन व भत्ते देने और सातवें वेतन आयोग को लागू करवाने को प्राथमिकता में रखा है।

उन्होंने कहा कि रोडवेज की स्थापना सामाजिक सरोकार की रही है, फिर भी हम इसे घाटे से उबारने में जुटे हैं। कई बार रोडवेज मुनाफे में भी रहा है। उन्होंने कहा कि जल्द ही रोडवेज प्रबंधन 50 इलेक्ट्रिक बस और 50 सीएनजी बसें खरीदने की योजना बना रहे है।

एमडी संदीप वर्मा ने विस्तृत जानकारी दी। परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग के प्रमुख शासन सचिव अभय कुमार ने सभी बसों को एंबुलेंस की तरह जीपीएस से जोड़ने के लिए निगम प्रबंधन को सुझाव दिए। ओला ने कहा कि हमारी कोशिश है कि रोडवेज के अधिकारियों -कर्मचारियों को हर माह पहली तारीख को तनख्वाह मिल जाए।