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आरएमसी ने 2 डॉक्टरों पर कार्रवाई की:15 दिन निजी अस्पताल में रखा; न्यूरोसर्जन को नहीं दिखाया, मरीज की मौत हो गई थी

जयपुर7 दिन पहले
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आरोप है कि 17 मई 2017 को हादसे में घायल हुए व्यक्ति का 15 दिन तक निजी अस्पताल में इलाज किया। - Dainik Bhaskar
आरोप है कि 17 मई 2017 को हादसे में घायल हुए व्यक्ति का 15 दिन तक निजी अस्पताल में इलाज किया।
  • SMS के न्यूरो फिजी. डॉ.रविन्द्र का लाइसेंस 9 माह के लिए सस्पेंड
  • दूसरी कार्रवाई; पीएचडी लिखने और 55 की जगह 160 शोध प्रकाशित होने की गलत सूचना पर अजमेर के जेएलएन मेडिकल कॉलेज की डॉ. मोनिका की प्रैक्टिस पर भी 6 माह रोक

एसएमएस अस्पताल जयपुर के न्यूरोफिजीशयन डॉ. रविन्द्र सिंह का प्रैक्टिस लाइसेंस 9 माह और जेएलएन अजमेर की कार्डियोलोजिस्ट डॉ.मोनिका माहेश्वरी का लाइसेंस 6 माह के लिए सस्पेंड कर दिया गया है। डॉ. रविन्द्र सिंह पर आरोप है कि 17 मई 2017 को हादसे में घायल हुए व्यक्ति का 15 दिन तक निजी अस्पताल में इलाज किया।

मरीज को न्यूरो सर्जन की जरूरत थी लेकिन डॉ. रविन्द्र खुद ही इलाज करते रहे। 31 मई 2017 को मरीज की मौत हो गई। इस पर इलाज में लापरवाही मानते हुए राजस्थान मेडिकल काउंसिल ने 9 महीने तक प्रैक्टिस करने पर रोक लगा दी है। दूसरी ओर, अजमेर की जेएलएन मेडिकल कॉलेज की हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ.मोनिका का लाइसेंस 6 माह के लिए रद्द कर दिया गया है।

दोनों डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन रद्द होने की सूचना कॉलेज प्रशासन को भेज दी गई है। काउंसिल द्वारा मेडिकल कॉलेजों की दो फैकल्टी का रजिस्ट्रेशन सस्पेंड करने का पहला मामला है। डॉ. मोनिका पर आरोप है उन्होंने प्रिस्क्रिप्शन पर पीएचडी लिखा था और 160 शोध पेपर पब्लिश की सूचना दे रखी थी, लेकिन सिर्फ 55 ही पेपर प्रकाशित हैं।

विभागाध्यक्ष के फर्जी हस्ताक्षर करने की शिकायत की गई थी। बैठक में सदस्य डॉ. ईश मुंजाल, डॉ. दीपक माथुर (एसएमएस), डॉ. वीरभद्र सिंह (अजमेर), डॉ.जगमोहन माथुर (जोधपुर), डॉ. दीपक शर्मा (कोटा), डॉ. श्रीकांत (जयपुर) डॉ. ललित (उदयपुर) मौजूद थे।

मेडिकल काउंसिल अध्यक्ष डॉ. केके शर्मा का कहना है मीटिंग में डॉ. रविन्द्र सिंह का 9 माह, डॉ.मोनिका का 6 माह के लिए लाइसेंस रद्द करने का निर्णय लिया गया है।

मेरे खिलाफ यह साजिश हैऔर न्याय मेरे पक्ष में होगा

यह प्रकरण मेरे खिलाफ षड्यंत्र है और जो भी इसमें शामिल हैं उनके चेहरे बेनकाब होंगे। मामला सरकार और न्याय पालिका में विचाराधीन है। जीत न्याय की होगी। आज के पहले सभी समितियों द्वारा की गई जांच मेरे पक्ष में रही है। मुझे न्याय पालिका पर पूरा भरोसा है।
डॉ. रविन्द्र सिंह, न्यूरो फिजीशियन

इलाज में लापरवाही की सीधे आरएमसी में शिकायत की जा सकती है

राजस्थान मेडिकल काउंसिल में कोई भी व्यक्ति किसी रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर के खिलाफ इलाज में लापरवाही बरतने की शिकायत कर सकता है। हालांकि शिकायत सही और पूरे सबूतों के साथ की जानी चाहिए। काउंसिल में सुनवाई की शिकायत के लिए पैनल और एथिक्स कमेटी गठित की गई है। जरूरत पड़ने पर लीगल चिकित्सक और अन्य डॉक्टरों की राय लेकर निर्णय देती है। इसके बाद में मामला जनरल बॉडी मीटिंग (जीबीएम) में जाता है। इसके बाद लापरवाही को गंभीरता को देखते हुए काउंसिल फैसला लेती है।

किसी चिकित्सक की प्रैक्टिस पर रोक लगाने का अधिकार सरकार के पास

डॉ. रविन्द्र सिंह ने दोनों जगह अपील कर रखी है। राजस्थान मेडिकल काउंसिल ने तो प्रस्ताव भेज दिया है। लेकिन प्रैक्टिस पर रोक का अधिकार सरकार के पास है। फिलहाल, हम सरकार के फैसले का इंतजार करेंगे, जो आदेश आएगा उसकी पालना की जाएगी।
-डॉ.सुधीर भंडारी, प्राचार्य, एसएमएस मेडिकल कॉलेज

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