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सरकार की अनदेखी:राजस्थान में 17 आईएएस; 12 आईपीएस व 4 आरएएस डाॅक्टर, लेकिन सरकार ने नहीं किया कोविड महामारी में उनका उपयोग

जयपुर19 दिन पहलेलेखक: त्रिभुवन
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प्रतीकात्मक फोटो। - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक फोटो।

प्रदेश के 247 आईएएस में 17 एमबीबीएस डाॅक्टर हैं, 185 आईपीएस में 12 और आरएएस में चार डॉक्टर हैं; लेकिन कोविड संकट के दौरान इनमें से दो-तीन को छोड़कर न तो कोई सीधे मेडिकल विभाग में है और न ही इनका कोई उपयोग सरकार ने कोविड महामारी के दौरान विशेषज्ञ अधिकारी की तरह किया है। खुद कई आईएएस मानते हैं कि वे कोविड से जूझने की अच्छी रणनीति बनाने में सहयोगी हो सकते थे।

ये ग्राउंड पर और बेहतर काम कर सकते थे। ये सरकारी और गैरसरकारी अस्पतालों तथा सरकार के बीच समन्वय कर सकते थे। इनकी टीम बनाई जाती तो महामारी के इस संकट के दौरान समय रहते प्रदेश के सरकारी अस्पतालों की कमियों को दूर करवा सकती थी। लेकिन यह हैरानीजनक है कि एमबीबीएस के साथ-साथ इंटर्नशिप कर पूरी व्यवस्थाओं को समझ चुके ये अधिकारी ऐसे-ऐसे विभागों में लगे हैं, जहां इनकी मेडिकल शिक्षा का कोई उपयोग ही नहीं है।

खासकर ऐसे समय जब इस समय कोविड संकट के दौरान बेहतरीन व्यवस्थाएं करके देश और दुनिया में चर्चित हुए नंदरूबार (महाराष्ट्र) कलक्टर राजेंद्र भारुड़ का मानना है कि वे मेडिकल डॉक्टर नहीं होते तो सिस्टम की बारीकियों और हालात को इतनी अच्छी तरह नहीं भांप पाते। ये अधिकारी ये तो बाकी से बेहतर समझते ही हैं कि क्या सही है और क्या गलत है।

हम इस पर विचार करेंगे: मुख्य सचिव-

भास्कर : राजस्थान आईएएस कैडर में 17 एमबीबीएस डाॅक्टर हैं। कुछ अन्य भी हैं। क्या पेंडेमिक के दौरान इनका उपयोग किया गया? क्या इनकी कोई टीम बनाई गई, ताकि पेंडेमिक के नियंत्रण में इनकी बेहतर भूमिका होती? प्रदेश में किसी एमबीबीएस आईएएस को कलेक्टर के रूप में भी पोस्टिंग नहीं दी हुई है।
निरंजन आर्य : हमने दो-तीन डाॅक्टरों को लगाया हुआ है। लेकिन टीम तो नहीं बनाई है। लेकिन हम इस सुझाव पर विचार जरूर करेंगे।

और ये हैं डाॅक्टरों की पोस्टिंग की स्थिति

  • डाॅ. पृथ्वीराज : 2002 बैच के हैं। एमबीबीएस हैं। नवंबर-2020 से वित्त सचिव हैं। 2016 में कुछ महीनों के लिए मेडिकल एजुकेशन में स्पेशल सेक्रेटरी रहे।
  • प्रीतम बी. यशवंत : 2003 बैच के हैं। एमबीबीएस हैं। दिसंबर 2020 से विभागीय जांच में आयुक्त हैं।
  • डॉ. समित शर्मा : 2004 बैच। एमबीबीएस और एमडी (पीडिऐट्रिक्स) हैं। सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग में सचिव हैं। नेशनल हैल्थ मिशन में मिशन डायरेक्टर, राजस्थान मेडिकल हैल्थ सर्विस कार्पोरेशन में तीन साल रहे।
  • डाॅ. आरुषी मलिक : 2005 बैच। एमबीबीएस हैं। पशुपालन और मत्स्य विभाग में सचिव। नेशनल हैल्थ मिशन में एडिशनल मिशन प्रोजेक्ट और मेडिकल हैल्थ में स्पेशल सेक्रेटरी के पदों पर महज तीन महीने रहीं।
  • डॉ. ओमप्रकाश : 2006 बैच। एमबीबीएस। सचिव कृषि और पंचायतीराज। चार साल कृषि विभाग में ही।
  • डॉ. प्रदीप गवांडे : 2013 बैच। एमबीबीएस। राजस्थान स्किल्स एंड लाइव्लीहुड्स डिवेलप्मेंट कार्पोरेशन में एमडी। राजस्थान चिकित्सा सेवाएं निगम और स्टेट हैल्थ इंश्याेरेंस में अतिरक्ति जिम्मेदारियां।
  • डॉ. भारती दीक्षित : 2014 बैच। एमबीबीएस। योजना विभाग में संयुक्त सचिव। नेशनल हेल्थ मिशन में अतिरक्त मिशन निदेशक की जिम्मेदारी।
  • डॉ. भंवरलाल : 2014 बैच। एमबीबीएस। आयुक्त स्कूल शिक्षा।
  • डॉ. खुशाल यादव : 2015 बैच। एमबीबीएस। अजमेर नगर निगम में आयुक्त।
  • डॉ. अंजलि राजोरिया : 2015 बैच। एमबीबीएस। सीईओ डूंगरपुर जिला परिषद।
  • डॉ. रवींद्र गोस्वामी : 2016 बैच। एमबीबीएस।

ईजीएस में आईएएस

  • डॉ. मंजु : 2016 बैच। एमबीबीएस, एमएस। सीईओ ईजीएस, माड़ा योजना।
  • डॉ. गौरव सैनी : 2017 बैच। एमबीबीएस। सीईओ ईजीएस अजमेर।
  • डॉ. सौम्या झा : 2017 बैच। एमबीबीएस। सीईओ ईजीएस टोंक।
  • डॉ. धीरजकुमार सिंह : 2020 बैच। एसीएम करौली।
  • डॉ. रविकुमार सुरपुर : 2004 बैच। एमबीबीएस हैं। अभी कर्नाटक सरकार के सामाजिक न्याय विभाग में आयुक्त हैं।
  • डॉ. विक्रम जिंदल : 2012 बैच। एमबीबीएस। अवकाश पर हैं। लेकिन मेडिकल में कभी नहीं लगे।

ये आईपीएस भी एमबीबीएस हैं : एडीजी प्रशाखा माथुर, नितिनदीप ब्लग्गन, अमरदीप सिंह कपूर, रवि, एसपी विकास पाठक, गगनदीप सिंगला, राजीव पचार, किरण कंग सिद्धू, दीपक यादव और अमृत दुहन, एमबीबीएस हैं ताे आईजी बीएल मीणा एमडी हैं। डीआईजी एस परिमाला फार्मेसी स्नातक हैं।

भारतीय वन सेवा के पांडे को मानते हैं योग गुरु रामदेव : भारतीय वन सेवा के अधिकारी डीएन पांडेय को भले कोविड के दौरान सरकार ने कोई जिम्मेदारी न दी हो, लेकिन वे आयुर्वेद के अच्छे जानकार हैं और योग गुरु रामदेव तक सोशल मीडिया पर उनके ज्ञान को दूसरे लोगों तक पहुंचाते हैं।

आरएएस में भी हैं चार मेडिकल डॉक्टर : आरएएस में भी चार मेडिकल डॉक्टर हैं। आरएएस वीरेंद्रसिंह 2001 बैच एमएमबीएस हैं और पशुपालन में संयुक्त सचिव हैं। छह महीने मेडिकल में डिप्टी सेक्रेटरी रहे हैं। डाॅ. राष्ट्रदीप यादव होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी में बैचलर और हैल्थ मैनेजमेंट में पीजी हैं। लेकिन कभी संबंधित विभाग में नहीं रहे। अभी जयपुर में डीएसओ फस्ट हैं। नवनीतकुमार एसडीओ हैं थानागाजी में। वे एमबीबीएस हैं।

डॉक्टर न होता तो ये नहीं कर पाता : राजेंद्र भारूड़
महाराष्ट्र के आदिवासी और सबसे पिछड़े जिले नंदूरबार में कोविड की पहली लहर के बाद सितंबर 2020 में कलेक्टर राजेंद्र भारूड़ ने हालात का जायजा लिया तो उन्हें स्थिति चिंताजनक नजर आई। वे हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठे और उन्होंने आशंकाओं को भांपते हुए तीन बड़े ऑक्सीज़न प्लांट सरकारी और तीन ही निजी क्षेत्र में शुरू करवाए। इससे प्रतिदिन 48 से 50 लाख लीटर ऑक्सीजन मिल सकती है।

उन्होंने कुछ ही समय में सरकारी अस्पतालाें में 1250 ऑक्सीजन बेड भी तैयार करवा दिए। उन्होंने रेलवे कोच को भी आईसोलेशन वार्ड के लिए तैयार करवाया। भारूड़ बताते हैं कि अभी उन्होंने चार और ऑक्सीजन प्लांअ का ऑर्डर दिया है। उनका कहना है कि वे शायद यह सब नहीं कर पाते अगर उनका एमबीबीएस का बैकग्राउंड नहीं होता। बड़ी पंचायतों को अपनी-अपनी एंबुलेंस खरीदने और हर समय मोबाइल वैक्सीन यूनिट्स जैसे निर्णय इसी शिक्षा का नतीजा थे।

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