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कोरोनाकाल:एसएमएस में डेंगू से 2, स्क्रब टाइफस से 6 और चिकनगुनिया से 1 मौत, लेकिन चिकित्सा विभाग के रिकॉर्ड में कोई मौत नहीं

जयपुर6 दिन पहले
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चिंताजनक; डेंगू, चिकनगुनिया और स्वाइन फ्लू में राजधानी जयपुर पहले नंबर पर है और स्क्रब टाइफस व मलेरिया के मामलों में उदयपुर।
  • लोग समझ नहीं पा रहे उन्हें क्या बीमारी, बुखार होते ही हो रहे आइसोलेट
  • महामारी से मौतों पर जिला-स्टेट के अलग-अलग आंकड़ों के बाद मौसमी बीमारियों के आंकड़ों पर भी पर्दा
  • प्रदेश में स्क्रब टाइफस के 1050, डेंगू के 740 एवं चिकनगुनिया के 570 मामले सामने आए हैं आंकड़ों की मॉनिटरिंग सवालों में

(सुरेन्द्र स्वामी)। प्रदेश में कोरोना संक्रमित एवं उससे हो रहे मौतों के आंकड़े छिपाने के आरोपों से घिरे चिकित्सा विभाग अब मौसमी बीमारियों से पीड़ितों और मौतों की संख्या पर भी पर्दा डालने की कोशिश कर रहा है। एसएमएस अस्पताल में एडीज एजिप्टाई मच्छर के काटने से फैलने वाले डेंगू से अगस्त व सितंबर माह में एक-एक मौत हुई है।

चिकनगुनिया से सितंबर मेंं भी एक मौत हुई है। स्क्रब टाइफस से इस साल अब तक 6 मौत के मामले सामने आए हैं। लेकिन चिकित्सा विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट में एक भी मौत का जिक्र तक नहीं है। ये तो सिर्फ एसएमएस अस्पताल जयपुर में होने वाली मौतों की संख्या है। आखिर मौसमी बीमारियों के आंकड़ों को छिपाने की कोशिश क्यों की जा रही है? आंकड़ों की रिपोर्टिंग व मॉनिटरिंग करने वाली स्टेट आईडीएसपी सैल पर भी अब सवाल उठने लगे है।

अजमेर, अलवर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर, बीकानेर जैसे बड़े अस्पतालों में भी मौसमी बीमारियों से होने वाली मौत के आंकड़ो की जांच कर विभाग की ओर से जारी की जाने वाली रिपोर्ट में दर्ज होनी चाहिए। जिससे वास्तविक स्थिति का पता लग सकें। उधर, विभागीय अधिकारियों का कहना है कि एलाइजा से जांच रिपोर्ट में पॉजिटिव आने के बाद ही मौत के आंकड़ों को रिपोर्ट में शामिल किया जाता है।

प्रदेश में स्क्रब टाइफस के 1050, डेंगू के 740 एवं चिकनगुनिया के 570 मामले सामने आए हैं, आंकड़ों की मॉनिटरिंग सवालों में

सरकार एलाइजा टेस्ट को ही कन्फर्म मानती है

केन्द्र सरकार के नेशनल सेन्टर फॉर डिजीज कंट्रोल की गाइडलाइन के अनुसार एलाइजा को ही कन्फर्म मानती है। कार्ड टेस्ट संभावित जांच है। क्लीनिकल मरीज को डेंगू जैसे लक्षण नहीं दिखने पर एलाइजा कन्फर्म कराना चाहिए। एलाइजा 100 फीसदी सही टेस्ट माना जाता है। कई बार कार्ड टैस्ट फॉल्स परिणाम मिल जाता है। एेसे में सरकार को चाहिए कि पहले तो सभी सरकारी अस्पतालों में एलाइजा टेस्ट मशीन उपलब्ध करानी चाहिए।

  • एसएमएस से रिपोर्ट आने में समय लग जाता है। कन्फर्म मौत होने पर आंकड़ों में शामिल करते हैं। अस्पताल से रिपोर्ट मांगकर यदि मौत हुई है, तो शामिल करेंगे। जयपुर समेत सभी जिलों से मौत के आंकड़ों की रिपोर्ट मांगी है। हालांकि कार्ड या एलाइजा टेस्ट के चक्कर में हो सकता है शामिल नहीं किया हो। - डॉ. रवि शर्मा, अतिरिक्त निदेशक (ग्रामीण स्वास्थ्य)
  • मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया हो या इनसे मौत हो, हम विभाग को रिपोर्ट भेज देते हैं। - डॉ.राजेश शर्मा, अधीक्षक, एसएमएस अस्पताल जयपुर

एक्सपर्ट- मच्छर जनित बीमारियों का वक्त है, घर व आसपास कहीं भी पानी जमा ना होने दें

एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ.सुधीर भंडारी व अस्पताल के अतिरिक्त अधीक्षक डॉ.अजीत सिंह का कहना है कि बारिश के बाद यानी अगस्त व सितंबर माह में डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया और स्क्रब टाइफस के अधिक मामले आते है। ऐसे में पानी को एकत्र होने से रोकना चाहिए। जिससे मच्छर का लार्वा पनप नहीं सकें। चिकनगुनिया और डेंगू में आने वाले बुखार के लक्षण लगभग एक जैसे ही होते हैं।

डेंगू का वायरस चिकनगुनिया के वायरस से ज्यादा खतरनाक होता है। डेंगू में लगातार गिरते प्लेटलेट्स की वजह से बेहद कमजोरी महसूस होती है। जबकि चिकनगुनिया से 1 से 12 दिन तक पीड़ित रहता है। इसकी वजह से शरीर में कई सालों तक दर्द बना रहता है।

चिकनगुनिया के मरीज के शरीर पर लाल रंग के रैशेज हो जाते हैं। रोगी के शरीर पर खुजली हो सकती है। उसके शरीर पर चकत्ते भी निकल सकते हैं। चिकनगुनिया वायरस का सीधा असर जोड़ों पर होने की वजह से लोग दर्द से बेचैन हो जाते हैं।

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