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  • 2 Factions In The Government, Impoundments 3 Times In 3 Months, 3 Members Committee Tasked To Resolve, Sonia Gandhi Formed Committee To Resolve The Dispute

सियासी संघर्ष के 3 माह:सरकार में 2 गुट, 3 माह में 3 बार बाड़ाबंदी, 3 सदस्यों की कमेटी को समाधान का जिम्मा, विवाद के समाधान के लिए सोनिया गांधी ने बनाई कमेटी

जयपुर2 महीने पहले
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मानेसर बाड़ा टूटा, आज लौटेगा पायलट गुट।
  • 9 जून से 10 अगस्त तक राजस्थान की कांग्रेस सरकार में चली खींचतान... जयपुर, जैसलमेर, हरियाणा होकर दिल्ली पहुंची
  • पायलट गुट की मांग पर आलाकमान बनाएगा राजस्थान सरकार व संगठन का ब्लू प्रिंट

आखिर 31 दिनों की सियासी जंग के बाद पायलट की फिर घर वापसी हो गई। कांग्रेस आलाकमान से उनकी बातचीत के बाद राजस्थान कांग्रेस सरकार का सियासी संकट तो टल गया, लेकिन गहलोत खेमा इस समाधान से सहमत नहीं दिखता। रिश्तों में पड़ी तल्खियों की गांठें बरकरार हैं। सवाल है कि मजबूरी का यह समझौता क्या इतना मजबूत होगा कि पूरे पांच साल सरकार बिना संकट के चल सके।

पायलट वापस लौटते हैं तो उनका सियासी भविष्य क्या होगा। क्योंकि उनका सारा झगड़ा तो गहलोत को सीएम की कुर्सी से हटाने को लेकर था। यह साफ हो गया है कि गहलोत ही प्रदेश के मुख्यमंत्री रहेंगे तो समझौते से पायलट को हाथ क्या लगा? सवाल यह भी है कि क्या गहलोत इस समझौते से सहमत हैं और क्या पायलट अपने खिलाफ हुई तीखी बयानबाजी को भूल पाएंगे? क्योंकि बीते एक महीने में दोनों खेमों के बीच जिस तरह से एक दूसरे पर जुबानी हमले किए गए वह खटास अब भी नजर आ रही है। यही वजह है कि समझौते के अधिकारिक ऐलान के बावजूद राजस्थान कांग्रेस की तरफ से कोई बयान नहीं आया। गहलोत खेमे के नेता भले ही खुलकर नहीं बोल रहे लेकिन दबी जुबान में यह कह रहे हैं कि मजबूरी का यह समझौता ज्यादा टिकाऊ नहीं होगा। इस कैंप के कई नेताओं का कहना है कि जो लोग अपनी ही पार्टी से बगावत कर विरोधी पार्टी से मिले, उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता। अभी यह तय नहीं है कि पायलट को राजस्थान में वही सब मिलेगा जो था, उन्हें किसी राज्य का प्रभार दिया जा सकता है या कोई और ऐसी जिम्मेदारी जिससे उनकी शिकायत दूर हो।

सवाल ये भी

  • पायलट पार्टी में भले वापसी कर लें लेकिन उनके जाने के बाद संगठन उनकी पूरी टीम को रवाना कर दिया गया उनका क्या होगा?
  • जब सीएम अशोक गहलोत ही रहेंगे तो पायलट के कद का क्या होगा?
  • क्या पायलट अपने उनपर लगे आरोपों को सहन कर लेंगे या उनका जवाब देंगे?
  • बगावत से पहले वे जितने मुखर थे? अब भी वे वैसे ही रहेंगे?

वसुंधरा राजे की चुप्पी- जब बोलीं तो पूरी सियासत ही बदल गई

कांग्रेस के इस सियासी संकट को भाजपा ने हवा दी। प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया, गजेन्द्र सिंह शेखावत, गुलाबचंद कटारिया, राजेन्द्र राठौड़ पूरे घटनाक्रम में मुखर रहे। मगर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे कुछ नहीं बोलीं। उनका नाम भी इस विवाद में आया, मगर वे खामोश रहीं। तीन दिन पहले वे दिल्ली गईं और वहां राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌ढा, राजनाथ सिंह सहित कई वरिष्ठ नेताओं से मिलीं और राजस्थान की सियासी गर्मी की चर्चा की। इसके बाद ही राजस्थान में भाजपा विधायकों को गुजरात भेजा गया, जयपुर में बाड़ेबंदी की तैयारी हुई। मतलब- वसुंधरा राजे की चुप्पी टूटते ही संकट खत्म!

पायलट के समर्थन में जिन लोगों ने मंत्री की कुर्सी और प्रदेश कांग्रेस के पद गंवाए अब उनका क्या?

गहलोत गुट के विधायक कहते रहे हैं कि बागी विधायकों को फिर से पार्टी में नहीं लेना चाहिए। हालांंकि प्रदेशाध्यक्ष गोविंदसिंह डोटासरा सहित खुद सीएम अशोक गहलोत भी कहते रहे हैं- माफी मांग लेंगे तो गले लगाएंगे। ... इस बीच पायलट के साथ गए मंत्री पद गंवा चुके। संगठन में पद गंवाने वाले लोगों को फिर जगह मिलेगी? यानी सत्ता-संगठन में फिर फेरबदल होंगे? राजस्थान कांग्रेस के आगामी दिन इन्हीं सवालों के जवाब में गुजरेंगे।

इस बीच बाड़ाबंदी का लंबा सिलसिला तो टूट ही रहा है। सचिन पायलट और उनके साथ गए विधायक हरियाणा के मानेसर की होटल से बाड़ाबंदी छोड़कर जयपुर लौट रहे हैं। ये गुट मंगलवार सुबह जयपुर पहुंचेगा। गहलोत खेमे के विधायक, जयपुर की फेयरमोंट से जैसलमेर के सूर्यगढ़ में शिफ्ट हो गए थे। अभी वे 12 अगस्त तक वहीं रुकेंगे। सूत्रों के मुताबिक ये विधायक 12 अगस्त को जयपुर लौटेंगे। ...और भाजपा को अब बाड़ाबंदी की जरूरत ही नहीं रह गई। 3 महीने में 3 बाड़ाबंदी के बाद गहलोत सरकार पर मंडराया संकट फिलहाल छंट गया है।

पहली बाड़ाबंदी- 11 जून से 19 जून
राज्यसभा चुनाव की घोषणा के बाद मुख्य सचेतक ने एसीबी को लिखा- हमारे विधायको को प्रलोभन दे रहे हैं

9 जून को मुख्य सचेतक महेश जोशी ने राजस्थान के पुलिस महानिदेशक, एसीबी को शिकायती पत्र लिखा- मेरी जानकारी में आया है कि कर्नाटक, मध्यप्रदेश व गुजरात की तर्ज पर राजस्थान में भी हमारे विधायकों को भारी प्रलोभन दिया जा रहा है। सीएम अशोक गहलोत ने 10 जून को अपने निवास पर कांग्रेस के विधायकों सहित आरएलडी के 1 और 13 निर्दलीय विधायकों को बुलाया। 11 जून को सरकार ने राज्य से बाहर आने-जाने पर पास सिस्टम लागू किया। 11 जून को ही विधायकों की होटल शिव विलास में बाड़ाबंदी। 15 जून को चिट्ठी बम...राज्यसभा चुनाव की वोटिंग से पहले राजस्थान कांग्रेस के एक वरिष्ठ विधायक की चिट्ठी से सियासी पारा अचानक चढ़ गया है. पूर्व मंत्री और विधायक भरत सिंह कुंदनपुर ने कांग्रेस महासचिव और प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे को चिट्ठी लिखकर राज्यसभा प्रत्याशी के चयन पर सवाल उठाया।

दूसरी बाड़ाबंदी- 13 जुलाई से 1 अगस्त
ऑडियो वायरल होने पर एसओजी ने 10 जुलाई को केस दर्ज किया। इसी दिन पायलट गुट बागी हो गया।

10 जुलाई को मुख्य सचेतक की शिकायत पर एसओजी में हॉर्स ट्रेडिंग का मुकदमा दर्ज किया। राजद्रोह की धाराएं लगाईं। सीएम-डिप्टी सीएम-िवधायकों को नोटिस दिए। 11 जुलाई को सरकार ने समर्थन दे रहे 3 निर्दलीय विधायक ओमप्रकाश हुड़ला, सुरेश टांक व खुशवीर सिंह को कांग्रेस की एसोसिएट की सदस्यता से हटा दिया। 12 जुलाई को कैबिनेट की बैठक में नहीं आए डिप्टी सीएम सचिन पायलट, मंत्री रमेश मीणा और विश्वेंद्र सिंह। 13 जुलाई को सचिन पायलट ने ट्वीट किया- गहलोत सरकार अल्पमत में है। 30 विधायक हमारे संपर्क में हैं। 13 जुलाई को ही सीएमआर में विधायक दल की बैठक हुई, यहीं से सब फेयर मोंट होटल चले गए। 14 जुलाई को विधायक दल की बैठक बुलाकर राजस्थान मंत्रिमंडल से सचिन पायलट और रमेश मीणा व विश्वेंद्र सिंह को बर्खास्त कर दिया। शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया।

तीसरी बाड़ाबंदी- 1 अगस्त से लगातार...

14 जुलाई से अब तक जांच एजेंसियों, अदालतों, विधानसभा और राजभवन होता हुआ यह मामला दिल्ली जाकर सुलझा

23 जुलाई को विधानसभा सत्र बुलाने के प्रस्ताव के साथ गहलोत राज्यपाल कलराज मिश्र से मिले। 24 जुलाई को राज्यपाल ने आपत्ति जताते हुए सरकार को फाइल लौटा दी। 24 जुलाई को गहलोत समर्थक विधायक राजभवन पहुंच गए और करीब 3 घंटे तक धरना-नारेबाजी की। 25 जुलाई को सरकार ने फिर से प्रस्ताव राजभवन भेजा। 26 जुलाई को राज्यपाल ने फिर प्रस्ताव लौटा दिया। 28 जुलाई को सरकार ने फिर से प्रस्ताव भेजा 29 जुलाई को राज्यपाल ने 21 दिन के नोटिस के साथ सत्र बुलाने की सशर्त अनुमति दे दी। यानी सत्र 14 अगस्त से। 1 अगस्त को बाड़ाबंदी जयपुर फेयरमोंट होटल से जैसलमेर के सूर्यागढ़ में शिफ्ट कर दी गई। 9 अगस्त को कांग्रेस विधायक दल की बैठक में विधायकों ने एकमत होकर कहा पायलट व अन्य बागी विधायकों की पार्टी में वापसी नहीं होनी चाहिए। 10 अगस्त को राहुल-प्रियंका से मिलने के बाद संकट टला

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