पिछले 5 साल से नहीं हुई पदोन्नति:ग्रुप ‘ए’ बनने का सपना लिए 200 रिटायर, 2 हजार प्रमोटी की ख्वाहिश भी अंधेरे में

जयपुरएक महीने पहलेलेखक: शिवांग चतुर्वेदी
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रेलवे बोर्ड की लापरवाही और सुस्त रवैए के चलते इन अधिकारियों (ग्रुप-बी) की पदोन्नति अटकी हुई है। - Dainik Bhaskar
रेलवे बोर्ड की लापरवाही और सुस्त रवैए के चलते इन अधिकारियों (ग्रुप-बी) की पदोन्नति अटकी हुई है।

प्रदेश की 2200 से अधिक और देशभर की 20 हजार से अधिक यात्री और मालगाड़ियों को सुरक्षित और संरक्षित ट्रेनों का संचालन संभाल रहे ग्रुप ‘बी’ यानि प्रमोटी ऑफिसर्स का ग्रुप ‘ए’ में पदोन्नत होना पिछले 5 साल से सपना ही बना हुआ है। इसी सपने को देखकर प्रदेश (उपरे/उमरे) के करीब 200 अधिकारी तो रिटायर ही हो गए। करीब 2200 अधिकारी ग्रुप-ए में पदोन्नत होने का सपना देख रहे हैं। रेलवे बोर्ड की लापरवाही और सुस्त रवैए के चलते इन अधिकारियों (ग्रुप-बी) की पदोन्नति अटकी हुई है।

रेलवे की रीड की हड्डी कमजोर, लेकिन ध्यान किसी का नहीं...रेलवे बोर्ड सेक्रेटरीएट सर्विस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रमोटी ऑफिसर्स रेलवे की रीड की हड्डी हैं। इनकी उपेक्षा कर रेलवे संरक्षा से बड़ा समझौता कर रहा है। विभागीय प्रोन्नति समिति (डीपीसी) द्वारा पदोन्नति की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है। ट्रैफिक सहित अन्य आठ सेवाओं के प्रमोटी ऑफिसर्स की ग्रुप-ए में पदोन्नति 2017-18 से अटकी हुई है।

जबकि केंद्र सरकार के स्थापना नियमों के हिसाब से डीपीसी समय से होनी चाहिए, ताकि अधिकारियों को 1 अप्रैल से पदोन्नति देकर नियुक्ति दी जा सके। रेलवे के सेवानिवृत्त मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (सीएओ/सी) सीएल मीना कहते हैं कि 2017 में वित्त मंत्रालय ने एक नियम बनाया था कि जो पद 2 साल से खाली हैं, उन्हें सरकार खत्म (सरेंडर) कर देगी।

रेलवे सहित अन्य सेवाओं में प्रमोटी ऑफिसर्स के साथ हमेशा भेदभाव किया जाता है। पिछले साल पर्सनल सर्विस के अधिकारियों को तो ग्रुप-ए में प्रमोशन दिया गया था, लेकिन ट्रैफिक, सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग सहित 7 कैडर को पिछले 5 साल से प्रमोशन ही नहीं दिया गया है।

ऑफिसर्स फेडरेशन को जनप्रतिनिधियों का समर्थन
इस संबंध में ऑल इंडिया रेलवे प्रमोटी ऑफिसर्स फेडरेशन (एआईआरपीओएफ) और विभिन्न जोनल रेलवे की ऑफिसर्स एसोसिएशन द्वारा रेलवे बोर्ड चेयरमैन (सीआरबी) को कई पत्र लिखे जा चुके हैं। अब इन्हें जनप्रतिनिधियों का भी समर्थन मिल रहा है। नॉर्थ मुंबई से लोकसभा सांसद गोपाल शेट्टी, गोरखपुर सांसद रविकिशन शुक्ला सहित अन्य जनप्रतिनिधियों द्वारा केंद्र सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग की गई है।

उन्होंने कहा है कि प्रमोटी ऑफिसर्स किसी भी विभाग के लिए रीड की हड्डी होते हैं। उनके अनुभव से ही विभाग सुव्यवस्थित संचालित होता है। ऐसे में उनके साथ इस तरह का भेदभाव बिल्कुल गलत है। अगर सिस्टम सीधी भर्ती से आए अधिकारियों (डायरेक्ट ऑफिसर्स) से ही संचालित होता है, तो उन्हें ग्रुप-ए में पदोन्नत किए जाने के सपने ही क्यों दिखाए जाते हैं ?