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राजस्थान यूनिवर्सिटी की स्थापना के 75 साल:22 कॉलेज, 2.50 लाख रुपए से शुरू हुई थी; 75 साल में 598 कॉलेज और 440 करोड़ बजट

जयपुर4 महीने पहलेलेखक: विनोद मित्तल
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दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम में आए थे। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम में आए थे। (फाइल फोटो)

देश के बड़े शिक्षा संस्थानों में शुमार राजस्थान विश्वविद्यालय 8 जनवरी को 76वां स्थापना दिवस मनाएगा। आरयू की स्थापना 8 जनवरी 1947 को हुई और देश 15 अगस्त को आजाद हुआ था। अंग्रेजी शासनकाल में स्थापित होने वाला आखिरी वि‌श्वविद्यालय है। पहले इसका नाम राजपूताना यूनिवर्सिटी था। 1956 में राजस्थान विश्वविद्यालय हुआ। 22 महाविद्यालयों से शुरू इस विवि से 598 कॉलेज संबद्ध हैं। 2.50 लाख के अनुदान से शुरू हुए विश्वविद्यालय का बजट 440 करोड़ पहुंच गया है।

स्वतंत्रता से पहले जयपुर रियासत के प्रधानमंत्री मिर्जा स्माइल और उनके उत्तराधिकारी वीटी कृष्णमाचार्य के प्रयासों से 8 जनवरी 1947 को विवि बना।

  • 300 एकड़ जमीन दी है राजपरिवार ने।
  • 5.5 लाख छात्र अभी हैं यहां।
  • 1016 पद हैं टीचिंग स्टाफ के

प्रथम गवर्नर जनरल सी. राजगोपालाचारी ने 20 फरवरी 1949 को विवि की नींव रखी थी। वर्तमान में कुलपति प्रो. राजीव जैन हैं।

कभी देशभर के टॉप-5 में शुमार होता था हमारा राजस्थान विश्वविद्यालय

प्रो. आरके कोठारी, पूर्व वीसी (यहीं छात्र, प्रोफेसर, प्रिंसिपल और वीसी भी रहे)
मेरा सौभाग्य ही है कि मैंने इसी विवि में पढ़ाई की और फिर यहीं कुलपति बना। 1975 में मैंने यहां एमकॉम में एडमिशन लिया था और 1978 में एमफिल में टॉप किया। नवंबर 1978 में सहायक प्रोफेसर बना।

कन्वीनर प्रो. एलएस राठौड़ ने विवि का दौरा करने के बाद कहा था...मैंने 250 विश्वविद्यालय देखे हैं पर यहां जैसा एलुमिनाई कहीं नहीं। मेरे सेवा काल में यूनिवर्सिटी में 16 कुलपतियों का कार्यकाल रहा। एक समय था जब इसकी गिनती देश के टॉप 5 विश्वविद्यालयों में होती थी। यहां करीब 1100 शिक्षक होते थे। लेकिन आज यूनिवर्सिटी का क्षेत्राधिकार सिर्फ जयपुर और दौसा में ही सीमित रह गया है।

राजस्थान विश्वविद्यालय के नायाब हीरे

  • भैरोसिंह शेखावत, पूर्व उपराष्ट्रपति
  • अरविंद पनगढ़िया, पूर्व उपाध्यक्ष, नीति आयोग
  • डीबी गुप्ता, पूर्व सीएस, राजस्थान
  • नवल किशोर, पूर्व राज्यपाल
  • शुचि शर्मा, पूर्व उच्च शिक्षा सचिव
  • प्रो. बीएम शर्मा, पूर्व चेयरमैन, RPSC
  • प्रो. केएल शर्मा, पूर्व वीसी, आरयू
  • मयंक सिंह, सबसे कम आयु में जज
  • अवनी लेखरा, गोल्ड मेडलिस्ट
  • इरफान, फिल्म अभिनेता

आरयू का स्थापना दिवस व दीक्षांत समारोह आज
राजस्थान विश्वविद्यालय का 31वां दीक्षांत समारोह और 76वां स्थापना दिवस शनिवार को वर्चुअल तरीके से मनाया जाएगा। राज्यपाल एवं कुलाधिपति कलराज मिश्र समारोह की अध्यक्षता करेंगे। विशिष्ट अतिथि उच्च शिक्षामंत्री राजेंद्र यादव होंगे। ऑनलाइन समारोह सुबह 11:30 बजे से आरए पोद्दार प्रबंध संस्थान में आयोजित होगा। समारोह में शारीरिक शिक्षा विभाग के 2, दर्शनशास्त्र के 1 छात्र को डी लिट और विभिन्न परीक्षाओं में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले 113 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल प्रदान किया जाएगा। कुलपति प्रो. राजीव जैन ने बताया कि समारोह कोविड गाइडलाइन का पालन करते हुए मनाया जाएगा।

देश की कई यूनिवर्सिटी को दिए वाइस चांसलर
इस विश्वविद्यालय से निकले विद्यार्थी देश के कई विश्वविद्यालयों में कुलपति पद तक पहुंचे हैं। इनमें बनारस हिंदु विवि के प्रो. इकबाल नारायण, कोटा यूनिवर्सिटी के वीसी व आरपीएससी के पूर्व चैयरमेन प्रो. बीएम शर्मा, उदयपुर विवि के वीसी प्रो. जेपी शर्मा, लखनऊ और गोरखपुर यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. अशोक कुमार, गोरखपुर यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. वीसी त्रिवेदी, दिल्ली और जोधपुर यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. वीआर मेहता, कोटा ओपन यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. नरेश दाधीच भी यहीं के स्टूडेंट रहे हैं।

पहला विवि जहां विद्यार्थियों का 7 लाख का दुर्घटना बीमा
विवि के पीआरओ डॉ. भूपेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि विवि ने अभिनव पहल की और यहां पढ़ाई कर रहे नियमित विद्यार्थियों का 7 लाख का दुर्घटना बीमा कराया। ऐसा करने वाला देश का पहला विवि है। दुर्घटना में घायल होने पर 70 हजार चिकित्सा सहायता भी दी जाती है। अब तक 1.50 करोड़ की सहायता दी जा चुकी।

इतिहास के झरोखे से यूनिवर्सिटी से जुड़ीं कुछ रोचक झलकियां

जयपुर महाराजा के आग्रह पर पहले वीसी बने थे डॉ. महाजनी
विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद इस बारे में चर्चा प्रारंभ हुई कि इसका पहला कुलपति कौन हो। इस बारे में जयपुर, बीकानेर, उदयपुर, अलवर व जोधपुर रियासतों के प्रतिनिधियों ने देशभर के विद्वानों के नाम पर चर्चा की। फिर तय हुआ कि महान गणितज्ञ पूना के फर्ग्युसन कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जीएस महाजनी को दायित्व सौंपा जाए। जयपुर के महाराजा ने डॉ. महाजनी से कुलपति बनने के लिए आग्रह किया था।

पद की गरिमा को लेकर बहुत सतर्क थे डॉ. मोहनसिंह मेहता
एक बार तत्कालीन सीएस के पीए ने कुलपति डॉ. मोहनसिंह मेहता के पीए को फोन कर कहा कि सीएस कुलपति से बात करना चाहते हैं। पीए का इस तरह से फोन करना मेहता को पद की गरिमा के अनुकूल नहीं लगा। उन्होंने तुरंत तत्कालीन मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाडि़या को फोन कर कहा...अपने सीएस को तहजीब सिखाइए। क्या वे फोन से बात करेंगे? इसके बाद सीएम ने सीएस को बुलाया और वीसी से मिलकर आने के लिए कहा। हिदायत दी कि कुलपति से टाइम लेकर मिलने जाएं।

ऐसी भामाशाह शिक्षिका, जिन्होंने जीवनभर की कमाई दान कर दी
विवि की एक शिक्षिका ऐसी भी रही हैं जिन्होंने भामाशाह के रूप में पहचान बनाई। डॉ. भवानी कच्छावा ने वेतन की अधिकांश राशि खेलों की सुविधा मुहैया कराने में खर्च कर दी। 2001 में रिटायरमेंट पर मिले 1 करोड़ भी खेलों के विकास के लिए दान कर दिए। इस राशि से महारानी कॉलेज में स्पोर्ट्स स्टेडियम व आरयू में फिजिकल एजुकेशन विभाग के भवन का निर्माण कराया गया।

विवि में छात्रसंघ अध्यक्ष रहे कई प्रमुख चेहरे जो आज भी राजनीति में सक्रिय हैं

  • महेश जोशी: वर्तमान में जलदाय मंत्री व मुख्य सचेतक हैं। जयपुर से सांसद भी रह चुके हैं
  • महेंद्र चौधरी: विधायक व उपमुख्य सचेतक हैं।
  • रघु शर्मा: विधायक हैं। हाल ही में कांग्रेस में गुजरात के प्रभारी बनाए गए हैं। प्रदेश के चिकित्सा मंत्री भी रह चुके।
  • प्रताप सिंह खाचरियावास: विधायक हैं। अब खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री हैं।
  • हनुमान बेनीवाल: लोकसभा में सांसद हैं। विधायक भी रह चुके हैं।
  • राजकुमार शर्मा: विधायक हैं। सीएम के सलाहकार बनाए गए हैं। पिछली कांग्रेस सरकार में मंत्री रह चुके हैं।
  • कालीचरण सराफ: विधायक हैं। भाजपा सरकार में केबीनेट मंत्री रह चुके हैं।
  • राजेंद्र राठौड़: विधायक और विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष हैं। भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं।
  • अशोक लाहोटी: विधायक हैं। महापौर भी रह चुके।
  • राजपाल सिंह शेखावत: कई बार विधायक रहे हैं। वर्ष 2018 में विधानसभा चुनाव हार गए थे। भाजपा सरकार में केबीनेट मंत्री रह चुके हैं।
  • पुष्पेंद्र भारद्वाज: वर्ष 2018 में सांगानेर विधानसभा सीट से चुनाव हार गए थे। राजनीति में सक्रिय है।
  • मनीष यादव: वर्ष 2018 में शाहपुरा विधानसभा सीट से चुनाव हार गए थे। राजनीति में सक्रिय हैं।

विश्वविद्यालय का गौरवमयी इतिहास रहा है। विश्वविद्यालय दिनों-दिन प्रगति पथ पर अग्रसर है। कोरोनाकाल में भी हमने समय पर पढ़ाई, परीक्षा और परिणाम जारी किए। अभी हम नैक और एनआईआरएफ में अच्छी ग्रेडिंग का प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए प्रोफेसर पद पर पदोन्नतियां की और 2018 की भर्तियों के पेचदगियां दूर कर चयनितों का कंफर्मेशन किया। विवि में आधुनिक लाइब्रेरी, संविधान पार्क और अंबेडकर की मूर्ति बनकर तैयार है। इनका जल्द ही उद्घाटन होगा। -प्रो. राजीव जैन, कुलपति राजस्थान विश्वविद्यालय