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लॉकडाउन में संक्रमण डाउन:राजस्थान में 19 दिन में घटा पॉजिटिव रेट, एक जून से खुल सकते हैं 22 जिले, 21 की संक्रमण दर 5% से नीचे

जयपुर2 महीने पहलेलेखक: डूंगरसिंह राजपुराेहित
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बड़ी चौपड़। - Dainik Bhaskar
बड़ी चौपड़।

प्रदेश में भयंकर कोरोना विस्फोट के बीच लॉकडाउन कितना प्रभावी रहा और दूसरी लहर का संक्रमण तोड़ने में कितनी कामयाबी मिली? इसको लेकर सरकार मंथन कर रही है। एक जून से प्रदेश के कम संक्रमित कुछ जिलों में भी लॉकडाउन खोलने की भी बात सरकार कह चुकी है।

इस बीच भास्कर की पड़ताल में सामने आया है कि 19 दिन के लॉकडाउन के दौरान प्रदेश में 21 जिलों की संक्रमण दर 5% से भी नीचे और इसकी भी करीब आधी रही है। एक जिले में 5% से कुछ ही अधिक है। यानी इन जिलों में हर 100 सैंपल पर 5 से कम मरीज मिले हैं।

इन जिलों में पिछले 3 से 7 दिन के अंदर लगातार 100 से रोगी मिल रहे हैं। जबकि पूरे प्रदेश में लॉकडाउन के दौरान संक्रमण दर 15% से भी अधिक बनी हुई है। इनमें भी 11 जिलों में तो संक्रमण दर 20% से अधिक है। ऐसे में 21 जिलों में संक्रमण दर का 5% से नीचे आना सुखद आंकड़ा है। बारां और जालोर में तो पाॅजिटिव दर 0.11 से 0.33% के बीच रही।

प्रदेश में लॉकडाउन के 19 दिन में 10,83,175 सैंपल लिए गए। इनमें 1,62,968 रोगी सामने आए। 19 दिन की पॉजिटिव दर 15.04% रही। लॉकडाउन में प्रदेश में 2426 मौतें हुईं। नए रोगियों की तुलना में रिकवर लगभग दोगुने 3,06,931 हुए हैं।

माैतें भी घटीं; बारां-जालोर समेत 9 जिले ऐसे जिनमें 19 दिन में औसत एक मौत
लॉकडाउन की अवधि के दौरान 22 में से 9 जिले से रहे जिनमें औसतन प्रतिदिन एक व्यक्ति की मौत भी नहीं हुई। 19 दिन में बारां 1, बूंदी में 15, दौसा में 9, धौलपुर में 11, जालोर में एक, झालावाड़ में तीन, करौली में 17, सवाई माधोपुर में 12 और सिरोही में 15 मौतें हुई। इसी बीच, प्रदेश की रिकवरी रेट 93.06% पहुंच गई है।

सीएम बोले- ऑक्सीजन, वैक्सीनेशन और मेडिकल की मास्टर प्लानिंग करें

सीएम अशोक गहलोत ने शनिवार को कोविड समीक्ष की बैठक की। इस दौरान सीएम ने कहा कि अब ओवरऑल 26 जिलाें में संक्रमण दर 5% से भी नीचे है, जबकि 7 जिलों में 10% से ऊपर है। सीएम ने कहा- सरकार ने पहली लहर की तरह ही दूसरी लहर में भी कोविड का बेहतरीन प्रबंधन करते हुए देशभर में उदाहरण पेश किया है।

तीसरी लहर की आशंका को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में ऑक्सीजन उत्पादन, वैक्सीनेशन और मेडिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर की मास्टर प्लानिंग जल्द से जल्द की जाए। एलोपैथी के साथ आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी व प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों का भी समुचित उपयोग करने के लिए प्रोटोकाॅल बनाएं।

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