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‘राज’नीति:22 शहरों की 1843 कच्ची बस्तियों के 2.28 लाख ‘अवैध’ घरों को मिलेगा पट्‌टा; कांग्रेस ने 15 साल पहले जिसे अवैध माना, अब वैध करेगी

जयपुर2 महीने पहलेलेखक: डूंगरसिंह राजपुरोहित
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ठीक 15 साल बाद अब इन 1843 बस्तियों के 2.28 लाख से अधिक परिवारों को पट्टे की तैयारी चल रही है। - Dainik Bhaskar
ठीक 15 साल बाद अब इन 1843 बस्तियों के 2.28 लाख से अधिक परिवारों को पट्टे की तैयारी चल रही है।

राजस्थान के 22 बड़े शहरों में कच्ची बस्तियों की भरमार है। 1843 कच्ची बस्तियां तो सरकारी स्तर पर अवैध चिन्हित हैं। कांग्रेस ने 2008 की सरकार के समय सबसे पहले प्रशासन शहरों की ओर अभियान चलाया था। तब इन कच्ची बस्तियों के नियमन पर रोक लगा दी गई थी। एक भी पट्टा जारी करने पर पाबंदी थी। लेकिन ठीक 15 साल बाद अब इन 1843 बस्तियों के 2.28 लाख से अधिक परिवारों को पट्टे की तैयारी चल रही है।

हालांकि अभी तो नगर निगमों सहित विभिन्न निकाय पत्र लिखकर सर्वे के लिए दबाव बना रहे हैं। मगर सरकार ने अपने स्तर पर पट्टा अभियान में कच्ची बस्तियों को शामिल कर लिया है। इससे साफ है कि कच्ची बस्तियों की करीब 9.2 लाख की आबादी के ए 2 अक्टूबर से शुरू होने वाला प्रशासन शहरों के संग अभियान खुशी की लहर साबित होगा। अंदरखाने पट्‌टे देने के लिए विधायकों का भी निकायों पर भारी दबाव है।

‘मेहरबानी’ इसलिए तो नहीं
8 मंत्रियों सहित 29 विधायकों का वोट बैंक हैं ये कच्ची बस्तियां, यहीं से तय होती है जीत-हार

प्रदेश सरकार के 8 मंत्रियों, कांग्रेस, बीजेपी के 29 विधायकों के इलाकों में कच्ची बस्तियां हैं। इन कच्ची बस्तियों के वोटर जीत-हार तय करते हैं। मालवीय नगर विधानसभा क्षेत्र में ही पिछले चुनाव के समय कच्ची बस्ती की आखिरी पेटी ने हार को जीत में बदल दिया था। इसी तरह सिविल लाइंस सीट का फैसला भी कच्ची बस्तियां करती हैं। सांगानेर, आदर्शनगर, हवामहल आदि क्षेत्र में कच्ची बस्ती के हजारों वोटर हैं। जयपुर में 308 व जोधपुर में 150 से अधिक कच्ची बस्तियां हैं।

तब गलत थे या अब?
2005 में राज्य सरकार के ही प्लानिंग डिपार्टमेंट की सचिव वीनू गुप्ता के नेतृत्व में कच्ची बस्ती नियमितिकरण कार्यक्रम का मूल्यांकन हुआ था। उसमें 2.18 लाख घरों को पट्टा देने योग्य नहीं माना गया और अवैध कब्जा माना, पर अब मानदंड बदल गए।

जयपुर में सबसे बुरा हाल; 2015 के सर्वे में जयपुर में 308 कच्ची बस्तियां पाई गईं। हवामहल में सर्वाधिक 65, सिविल लाइंस में 55, मालवीय नगर में 27, आदर्श नगर 43, किशनपोल में 37, बगरू में 20, सांगानेर में 28, आमेर में 13 कच्ची बस्तियां हैं।

मंत्री-अफसर चुप क्यों?
कच्ची बस्तियों के नियमन के सवाल पर अधिकारी और मंत्री कुछ भी कहने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि हम तो 2013 की शर्तों के आधार पर पट्टे देंगे। 2009 और इससे पहले बसी हुई बस्तियों के नियमन पर रोक नहीं है।

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