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सदन में कैग की रिपोर्ट पेश:विभागों में खराब हालात, आबकारी में 26 करोड़, अल्पसंख्यक मामलात विभाग में 3 करोड़ रुपए का नुकसान

जयपुर4 दिन पहले
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रिपोर्ट में बताया गया कि राजस्व में कमी की मुख्य वजह केंद्र से प्राप्त होने वाले केंद्रीय कर, शुल्क के राज्य की हिस्सा राशि के कम प्राप्त होना रही।  - Dainik Bhaskar
रिपोर्ट में बताया गया कि राजस्व में कमी की मुख्य वजह केंद्र से प्राप्त होने वाले केंद्रीय कर, शुल्क के राज्य की हिस्सा राशि के कम प्राप्त होना रही। 

भारत के महालेखा परीक्षक (नियंत्रक) की रिपोर्ट मंगलवार को विधानसभा में पेश की गई। इसमें उच्च शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, आबकारी अल्पसंख्यक मामलात विभाग सहित कई विभागों में खराब हालात का जिक्र किया गया।

रिपोर्ट में राज्य सरकार को राजस्व प्राप्तियों में 14.57 की कमी बताई गई है। वर्ष 2019-20 के दौरान बजट अनुमान 1,64,005 करोड़ रुपए थे। इस अवधि में राजस्व प्राप्ति 1,40,114 करोड़ रुपए हुई। इस तरह से 23,891 करोड़ रुपए की कमी हुई। रिपोर्ट में बताया गया कि राजस्व में कमी की मुख्य वजह केंद्र से प्राप्त होने वाले केंद्रीय कर, शुल्क के राज्य की हिस्सा राशि के कम प्राप्त होना रही।

इस रिपोर्ट में चिकित्सा विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, भू राजस्व विभाग, मुद्रांक एवं पंजीयन शुल्क, आबकारी सहित कई अन्य विभागों में गड़बड़ियो का खुलासा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार अकेले आबकारी में ही 26.27 करोड़ रुपए की राजस्व हानि के मामले सामने आए हैं।

अल्पसंख्यक मामलात विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के कारण 3.17 करोड़ रुपए के ऋण की वसूली नहीं हो सकी। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के निदेशालय भवन के निर्माण स्थल में परिवर्तन के कारण 5.47 करोड़ रुपए का खर्चा बेकार चला गया और आठ सालों से लाभार्थियों को कोई लाभ नहीं मिला। इसी तरह से चिकित्सा शिक्षा विभाग ने महाविद्यालयों और चिकित्सालयों में विद्युत के स्वीकृत भार में बढ़ोतरी नहीं कराई।

उच्च शिक्षा के हालात खराब, नई शिक्षा नीति को लागू करने की तैयारी नहीं, 9 साल से नामांकन में मामूली बढ़त
रिपोर्ट में उच्च शिक्षा के खराब हालातों का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले 9 सालों में नामांकन में मामूली बढ़ोतरी हुई है। जेएनवीयू जोधपुर, जीजीटीयू बांसवाड़ा में मूल्यांकन प्रणाली ठीक नहीं थी। यही कारण रहा कि पुनर्मूल्यांकन के बाद जोधपुर में 96 प्रतिशत और बांसवाड़ा में 68 प्रतिशत और राजस्थान विश्वविद्यालय में 26 प्रतिशत विद्यार्थियों के अंकों में बदलाव हो गया।

राज्य में नैक ग्रेडिंग प्राप्त उच्च शिक्षण संस्थानों का केवल 6.04 प्रतिशत ही रहा। वर्ष 2014-19 के दौरान सीनेट, सिंडिकेट की बैठकें नहीं हुई। रिपोर्ट में कहा गया कि इन स्थितियों को देखते हुए लग रहा है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति -2020 को अपनाने के लिए प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थान तैयार नहीं है।

मैट्रो मास अस्पताल में 2.17 फीसदी बीपीएल का ही उपचार
रिपोर्ट में जयपुर में मैट्रो मास अस्पताल में बीपीएल श्रेणी के मरीजों के इलाज में लापरवाही का मामला भी सामने आया। रिपोर्ट में कहा गया कि इस अस्पताल में 2012-18 के बीच कुल 1.44 लाख रोगियों का उपचार किया गया। इनमें से बीपीएल श्रेणी के महज 3124 मरीज यानी 2.17 प्रतिशत ही थे। जबकि 20 प्रतिशत के हिसाब से 28788 मरीज होने चाहिए थे।