दुर्लभ मामला:3 माह की ‘हिना’ का खून सफेद और कोलेस्ट्रोल भी ज्यादा

जयपुर8 महीने पहलेलेखक: सुरेन्द्र स्वामी
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जयपुर की 3 महीने की ‘हिना’ की जांच में खून का रंग सफेद है। - Dainik Bhaskar
जयपुर की 3 महीने की ‘हिना’ की जांच में खून का रंग सफेद है।
  • डॉक्टरों का दावा-3 माह की बच्ची में संभवतया ऐसा पहला मामला

खून का रंग लाल सुनते और देखते आए हैं, लेकिन एक बच्ची में सफेद खून पाए जाने पर डॉक्टर भी हैरान हैं। जेके लोन अस्पताल की रेयर डिजीज यूनिट में जयपुर की 3 महीने की ‘हिना’ की जांच में खून का रंग सफेद है। डॉक्टरोंं का कहना है कि सरकारी हॉस्पिटल में संभवतया कम उम्र की बच्ची में लाल की बजाय सफेद खून का यह पहला मामला है।

मेडिकल भाषा में इस रोग को डिसलिपेडेमिया विथ हीमोलाइटिक एनीमिया के नाम से जाना जाता है। कम उम्र के लाखों बच्चों में ऐसा किसी एक में ही ऐसा रोग पाया जाता है। दुर्लभ मामले को देखते हुए राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के जर्नल में प्रकाशित होने के लिए भेजा जाएगा। इसके अलावा बच्ची में कोलेस्ट्राल और ट्राइग्लिसराइड की मात्रा भी अधिक पाई गई है।
क्यों होता है सफेद खून

ट्राइग्लिसराइड की मात्रा ज्यादा होेने पर आरबीसी की झिल्ली पर ट्राइग्लिसराइड जमा होने पर लाल कण फटने (हिमोलिसिस) लगते हैं। इससे हिमोग्लोबिन कम हो जाता है। खून में ट्राइग्लिसराइड तथा कोलेस्ट्राल अधिक होने से खून का रंग दूध जैसा प्रतीत होने लगता है। खून में लाल कण ज्यादा मात्रा में फटने पर स्ट्राबेरी शेक की तरह हो जाता है।

  • बच्ची का खून का रंग लाल की बजाय सफेद होना बहुत ही दुर्लभ है। इस मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर के जर्नल में प्रकाशित होने के लिए भेजा जाएगा। - डॉ.सुधीर भंडारी, प्राचार्य, एसएमएस मेडिकल कॉलेज
  • कम उम्र की बच्ची में खून का रंग सफेद होना दुर्लभ मामला है। ट्राइग्लिसराइड और कोलेस्ट्राल की ज्यादा मात्रा मिलने से जान को खतरा है। यूनिट में बच्ची का इलाज किया जा रहा है। - डॉ.अशोक गुप्ता, प्रभारी रेयर डिजीज यूनिट एवं शिशु रोग विशेषज्ञ, जेके लोन जयपुर