जेब पर भारी कोरोना जांच:दुबई-शारजाह की उड़ान से पहले लिए जा रहे हैं टेस्ट के 3000 रुपए

जयपुर2 महीने पहलेलेखक: शिवांग चतुर्वेदी
  • कॉपी लिंक
एयरपोर्ट से विदेश यात्रा करना इन दिनों जेब पर भारी पड़ रहा है। - Dainik Bhaskar
एयरपोर्ट से विदेश यात्रा करना इन दिनों जेब पर भारी पड़ रहा है।

एयरपोर्ट से विदेश यात्रा करना इन दिनों जेब पर भारी पड़ रहा है। एयरपोर्ट पर कोरोना जांच के नाम पर यात्रियों से 2980 रुपए वसूले जा रहे हैं। दुबई-शारजाह जाने के लिए यह टेस्ट कराना जरूरी है। 1 साल बाद जयपुर एयरपोर्ट से इंटरनेशनल फ्लाइट्स का संचालन शुरू हुआ है। 29 सितंबर से जयपुर से दुबई के लिए फ्लाइट शुरू हो चुकी हैं। दुबई और शारजाह की यात्रा महंगी साबित हो रही है। इसकी वजह है जयपुर एयरपोर्ट पर फ्लाइट में चढ़ने से पहले यात्रियों की कोरोना जांच।

यह कोरोना जांच आरटी-पीसीआर टेस्ट से अलग है। यहां कोरोना की मुख्य जांच आरटी-पीसीआर है और इसका रिजल्ट आने में 6 से 7 घंटे का समय लगता है। एयरपोर्ट पर होने वाली जांच का नाम रैपिड पीसीआर टेस्ट है। रैपिड पीसीआर टेस्ट की रिपोर्ट आने में 15 से 20 मिनट का समय लगता है। दुबई और शारजाह की यात्रा के लिए यूएई सरकार ने विमान में बैठने से 6 घंटे पहले की रेपिड पीसीआर जांच अनिवार्य रूप से करने के निर्देश दिए हुए हैं। इसलिए एयरपोर्ट पर यह जांच कराना अनिवार्य भी है। लेकिन हवाई यात्रियों के लिए यह जांच कराना जेब पर भारी पड़ रहा है। एयरपोर्ट प्रशासन ने जिस निजी कंपनी को इसकी जिम्मेदारी दी है, वो प्रति यात्री ₹2980 जांच के लिए ले सकती है।

जयपुर एयरपोर्ट पर होने वाली जांच के लिए ₹2980 ले रहे हैं। दुबई जाने वाले यात्रियों में ज्यादातर कामगार हैं। इस कारण 2980 रुपए की जांच महंगी है। सैंपल डिपार्चर गेट के पास ही लिया जाता है। सैंपलिंग के लिए एक ही काउंटर बना होने से कतार/लाइन लंबी लग जाती है। एयरपोर्ट का तर्क है कि किट महंगी होने से टेस्ट महंगा है। दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट पर 4 हजार वसूले जाते हैं।

आरटीपीसीआर को विदेशों में मान्यता नहीं दी जा रही
कोरोना की विश्वसनीय जांच आरटी पीसीआर सस्ताी है। यह जांच 350 रुपए में हो जाती है, वहीं रैपिड के लिए 3000 रुपए वसूले जा रहे हैं। कंपनी की दलील है किट महंगी है। जरूरत है कि जांच शुल्क के बारे में यात्रियों को पहले से सूचना मिले। ज्यादातर यात्रियों को एयरपोर्ट पहुंचने पर ही महंगी जांच की जानकारी मिलती है। इससे कई कमजोर तबके के यात्रियों के लिए अजीब स्थिति खड़ी हो जाती है। ऐसे में केंद्र सरकार इस टेस्ट की अनिवार्यता को हटाने के लिए यूएई सरकार के साथ कूटनीतिक वार्ता करे, जिससे यात्रियों को राहत मिल सके।

खबरें और भी हैं...