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कोरोना की रफ्तार तेज:3 दिन में 418 केस, आरयूएचएस में 90 मरीज भर्ती, एक्टिव केस 1400 पार; होली की लापरवाही न पड़ जाए भारी

जयपुरएक महीने पहले
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मंगलवार को रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की जांच करते स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी। - Dainik Bhaskar
मंगलवार को रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की जांच करते स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी।
  • होली की लापरवाही और चुनावी सभा हालात बिगाड़ेंगे ही...सतर्क रहें

हमारी लापरवाही ने कोरोना का खतरा बढ़ा दिया है। दूसरी लहर तेजी से बढ़ रही है और इसे पहली से खतरनाक माना जा रहा है। जल्दी स्थिति काबू में नहीं की गई तो अभी 100 तक आने वाले मरीजों की संख्या 300 तक पहुंच सकती है। वैसे भी एक्सपर्ट का मानना है कि होली और चुनावों के मद्देनजर एकत्र होने वाली भीड़ कोरोना का प्रकोप और तेजी से बढ़ा सकती है। तीन दिन में 418 से केस आए हैं। त्योहार की वजह से पिछले दो दिनों में सैंपलिंग कम हुई लेकिन खतरा बढ़ना तय है। रविवार को 209, सोमवार को 135 और मंगलवार को 74 पॉजिटिव सामने आए हैं।

एक दिन में 209 आना खतरे का संकेत, एक्टिव केस बढ़े
28 मार्च को जयपुर में ही 209 केस आए। एक दिन में इतने अधिक केस आने का मतलब है कि कोरोना पॉजिटिव तेजी से बढ़ रहे हैं। हालांकि अगले दिन 135 केस आए लेकिन जो लोग पॉजिटिव आए हैं, वह संख्या चेताने के लिए काफी है कि किसी भी दिन कोरोना विस्फोट हा़े सकता है और आंकड़ा 300 से 400 के बीच में जा सकता है।

होम क्वारेंटाइन तो नहीं बढ़ा रहा है खतरा!
दिसम्बर तक जो पॉजिटिव केस आ रहे थे, उनमें से अधिकांश अस्पताल में भर्ती हो रहे थे लेकिन जैसे-जैसे केस कम होते गए, होम क्वारेंटाइन की संख्या बढ़ गई। जनवरी, फरवरी और मार्च मेें तो 100 केस तक पॉजिटिव आने के बाद भी महज 17 जने एडमिट किए गए। शेष सभी को होम क्वारेंटाइन किया गया।

जहां एक मरीज भर्ती था वहीं अब 15 आईसीयू में
आरयूएचएस केस बढ़ने लगे हैं। फरवरी में एक फ्लोर पर एक मरीज था, अब 20-25 हैं। पूरे अस्पताल में 90 मरीज हैं और आईसीयू में 15। रोजाना आठ से दस को छुट्टी दी जा रही है। अभी एहतियात भी मरीज भर्ती किए जा रहे हैं, लेकिन यदि इसी तरह केस बढ़े तो हालात भयावह होने में अधिक दिन नहीं लगेंगे।

कोरोना से बचने का एक मंत्र-गाइड लाइन जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कोरोना गाइडलाइन की पालना जरूरी है। मॉस्क, सोशल डिस्टेंसिंग जरूरी है। करना चाहिए। लेकिन इन क्लीनिकल एसेसमेंट की जानी चाहिए ताकि इसकी गंभीरता का आंकलन हा़े सके। जितने पॉजिटिव आ रहे हैं, उनमें कितने सीरियस और कितनी मौतें हो रही हैं। गंभीर रोगियों के लिए यह खतरनाक है। और रहेगा। डॉ. रमन शर्मा और डॉ. पुनीत सक्सेना, सीनि. प्रोफेसर, मेडिसिन, एसएमएस व डॉ. पंकज वर्मा, कंसल्टेंट फिजि. राजस्थान हॉस्पिटल।

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