पहले बहाने, अब सुप्रीम डांट से माने:8822 विधवाओं को इसी हफ्ते 50-50 हजार रु. का कोविड मुआवजा देगी राज्य सरकार

जयपुर5 महीने पहलेलेखक: हर्ष खटाना
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सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद कोविड मृतकों के परिजनों को मुआवजे के लिए दौड़ी चिट्‌ठी। - Dainik Bhaskar
सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद कोविड मृतकों के परिजनों को मुआवजे के लिए दौड़ी चिट्‌ठी।

काेविड के दाैरान हुई मृत्यु के मामलाें में राज्य सरकार 8822 विधवाओं काे इसी हफ्ते 50-50 हजार रु. तक का मुआवजा देगी। प्रदेश में सरकार ने कोविड से 8954 मौतें मानी हैं, लेकिन इस मुआवजा राशि में वे विधवाएं शामिल हैं, जिनके पति की मृत्यु कोविड होने के एक माह के भीतर हुई। भले की रिपोर्ट निगेटिव रही हो। दरअसल, सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजा न देने पर सरकार को फटकार लगाई थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने मुआवजा जारी कराने के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग काे पत्र लिखा है।

अब तक 98 करोड़ की मदद दी
सहकारिता विभाग के सचिव डाॅ. समित शर्मा ने कहा कि एक हफ्ते के अंदर मुआवजा जारी करने की दिशा में काम हाेगा। विभाग के पास मृतक आश्रिताें, कुल मृत्यु के मामलाें और आवेदन का डाटा अपडेट है। काेविड में मृतक आश्रिताें काे मदद देने के मामले में अभी तक 98 कराेड़ रुपए की सहायता सामाजिक विभाग दे चुका है। साथ ही करीब दाे हजार कराेड़ रु. संबल देने के लिए बताैर मदद जरूरतमंदों तक पहुंचाए हैं।

माता-पिता दोनों को खो चुके 178 बच्चों को भी 1-1 लाख की मदद दे चुकी सरकार... जिन्हें नहीं मिला, उन्हें भी जल्द मिलेगा

प्रदेश में 178 मामले ऐसे हैं, जिनमें माता और पिता दाेनाें की मृत्यु हुई है। इन्हें 1-1 लाख हजार रु. का मुआवजा दिया गया। उन मामलाें में क्या-क्या एक्शन रहा है। इसकाे लेकर भी बुधवार काे सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग समीक्षा करेगा और जिन मामलाें में मुआवजा नहीं पहुंचा है, उसे भी मुआवजा दिलाया जाएगा। कुछ मामलाें में देरी से आवेदन के कारण कुछ लाेगाें के मुआवजे भी प्रभावित हुए हैं।

14,540 लोगों को अब तक मदद पहुंचाई गई है। इनमें मृतक आश्रित महिलाओं व उनके परिवार शामिल हैं।

काेर्ट ने कहा था- पीड़ितों के प्रति संवेदना रखे सरकार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कोरोना से हुई मौतों का पीड़ित परिवारों को मुआवजा न देने पर राजस्थान समेत कई राज्यों को फटकार लगाई थी। कहा था कि अब तक मुआवजा न मिलना चिंताजनक है। सरकारें पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना रखें।

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