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  • 52 Patients Suffering From Diabetes In 15 Days Have Lost Vision; Do Not Delay If You Have Eye Problems, Delay Of 7 8 Days Is Also Fatal.

ये खबर सिर्फ इसलिए ताकि आप ज्यादा सतर्क रहें:15 दिन में 52 काेरोना पीड़ित डायबिटीज रोगी दृष्टि खो चुके; आंख में परेशानी हो तो देर न करें, 7-8 दिन की देरी भी घातक

जयपुरएक महीने पहलेलेखक: संदीप शर्मा
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मीना खंडेलवाल (49), दिल्ली। - Dainik Bhaskar
मीना खंडेलवाल (49), दिल्ली।

कोरोना का शिकार होने वाले डायबिटीज पीड़िताें को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है...वजह है- ये खबर। जयपुर में पिछले 15 दिन में 52 लोग अपनी आंखों की रोशन हमेशा के लिए खो चुके हैं। इन सभी को डायबिटीज थी और ये काेरोना संक्रमित हुए थे। ये तो सिर्फ वो आंकड़ा है, जो अस्पतालों में पहुंचा और जिनका पता लग पाया। डॉक्टरों की मानें तो गत एक महीने में यह संख्या 200 से भी ज्यादा होगी।

दरअसल, डायबिटीज पीड़ितों में कोरोना के बाद म्यूकोरमाइकोसिस नाम की बीमारी हो रही है। इसमें आंख की नसों के पास फंगस जमा हो जाता है, जो सेंट्रल रेटाइनल आर्टरी का ब्लड फ्लो बंद कर देता है। नतीजतन आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चली जाती है। इस बीमारी वजह है- स्टेराॅयड। यानी यदि डायबिटीज के मरीजों को स्टेराॅयड दिए जाएं और उनकी इम्युनिटी जरा भी कम हो तो ये स्टेराॅयड बहुत तेजी से साइड इफेक्ट दिखाते हैं और सबसे पहले आंखों और चेहरे को निशाना बनाते हैं।

म्यूकोरमाइकोसिस...वो सब जो आपके लिए जानना जरूरी

क्या है? आंंख की नसों के पास में फंगस जमा हो जाता है, जो सेंट्रल रेटाइनल आर्टरी का ब्लड फ्लो बंद कर देता है। इससे आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चली जाती है।

क्यों? कोरोना में दिए जाने वाले स्टेरॉयड इम्युनिटी को और भी कम कर देते हैं। ऐसे में दवा का साइड इफेक्ट होने लगता है और व्यक्ति को म्यूकोरमाइकोसिस हो जाता है।

लक्षण? नाक खुश्क होती है। नाक की परत अंदर से सूखने लगती है व सुन्न हो जाती है। चेहरे व तलवे की त्वचा सुन्न हो जाती है। चेहरे पर सूजन आती है। दांत ढीले पड़ते हैं।

इलाज? इस फंगस व इंफेक्शन को रोकने के लिए एकमात्र इंजेक्शन लाइपोसोमल एम्फोटेरिसिन-बी आता है। कीमत 5 हजार रु. है। मरीज को 6 लगते हैं। यदि इंफेक्शन बढ़ जाए तो पहले ऑपरेशन कर नाक-आंख के बीच के गले हुए हिस्से को निकाला जाता है और फिर दवाएं चलती हैं। ऑपरेशन भी काफी जटिल होता है।

खतरा? सात से आठ दिन में ही इलाज न हो और फंगस न निकाला जाए तो ब्रेन तक फंगस इंफेक्शन फैलना तय है। इसके बाद व्यक्ति को बचाना लगभग नामुमकिन है।

बचाव? कम से कम 4-5 दिन बाद डायबिटीज पेशेंट का फीडबैक लेकर संतुलत मात्रा में स्टेरॉयड देने चाहिए। शुरुआती लक्षण बहुत सामान्य हैं, लोग ध्यान नहीं देते।

एक्सपर्ट पैनल; जैन ईएनटी के सीईओ डॉ. अजय जैन और जैन ईएनटी हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. सतीश जैन ने इस बीमारी के बारे में जैसा दैनिक भास्कर को बताया।

4 केस, जो सबक दे रहे कि देर न करें...वरना रोशनी बचाना नामुमकिन

1- मीना खंडेलवाल (49), दिल्ली- दस अप्रैल को पॉजिटिव आईं। उन्हें स्टेराइड दिए गए। डायबिटिक थीं तो उन्हें साइड इफेक्ट हो गया। चेहरे पर इतनी सूजन आ गई कि मॉस्क लगाना मुश्किल हो गया। 20 अप्रैल को जयपुर जैन ईएनटी हॉस्पिटल आए। इलाज चला। पर एक आंख नहीं बच पाई।

2- ताराचंद (46), इटावा- डायबिटिक थे। 27 अप्रैल को संक्रमित हुए। स्टेराॅयड देने के कुछ ही दिन में साइड इफेक्ट आने लगे। इटावा के डॉक्टर्स ने जयपुर जाने को कहा। जैन ईएनटी हॉस्पिटल में उनकी सर्जरी की गई लेकिन देेरी की वजह से दोनों आंखें नहीं बचाई जा सकीं।

3-मुनाफ (42), कोटा- मुनाफ की कोिवड रिपोर्ट तो निगेटिव आई लेकिन एचआरसीटी में इंफेक्शन आया। वहां डॉक्टर्स ने स्टेराॅयड दे दिए। मुनाफ के इतना अधिक इंफेक्शन हुआ कि महज पांच दिन में ही दोनों आंखें प्रभावित हो गईं और सर्जरी के बाद भी दोनों आंखें नहीं बचाई जा सकीं।

4- कोटा के ही नंद किशोर 15 अप्रैल को कोरोना पॉजिटिव हुए और 20 अप्रैल से उनकी आंखें इफेक्ट होने लगीं। लेकिन समय पर अस्पताल पहुंच गए और एक आंख बचा ली गई। डॉक्टरों के मुताबिक चार-पांच दिन की देरी होती तो दूसरी आंख भी जा सकती थी।

ऐसे घातक सिद्ध हो रहा मर्ज...आंख की नसों के पास में फंगस जमा हो जाता है, जो सेंट्रल रेटाइनल आर्टरी का ब्लड फ्लो बंद कर देता है। नतीजा- आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चली जाती है।

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